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देवेंद्र फडणवीस ने दिया इस्तीफ़ा, राष्ट्रपति शासन के अलावा राज्यपाल के पास बचे हैं क्या विकल्प?

देवेंद्र फडणवीस ने दिया इस्तीफ़ा, राष्ट्रपति शासन के अलावा राज्यपाल के पास बचे हैं क्या विकल्प?

नई सरकार को गठन लेकर सोमवार को पूरे दिन मुंबई से लेकर दिल्ली और जयपुर तक अफवाहों का बाजार गर्म रहा

नई सरकार को गठन लेकर सोमवार को पूरे दिन मुंबई से लेकर दिल्ली और जयपुर तक अफवाहों का बाजार गर्म रहा

देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के इस्‍तीफे के बाद राज्यपाल (Governor) भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat singh Koshyari) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो गई है. ऐसे में राज्यपाल आगे क्या निर्णय लेते हैं, इस पर सबकी निगाहें रहेंगी.

नई दिल्‍ली. महाराष्‍ट्र (Maharashtra) में सरकार बनाने को लेकर बीजेपी (BJP) और शिवसेना (Shiv sena) के बीच बातचीत बेनतीजा रहने के बाद शुक्रवार को देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने मुख्‍यमंत्री पद से इस्‍तीफा दे दिया. उन्‍होंने राज्‍यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी (Bhagat Singh Koshyari) को इस्‍तीफा सौंपा. महाराष्ट्र विधानसभा (Maharashtra Assembly) के कार्यकाल का शुक्रवार को आखिरी दिन है. फडणवीस के इस्‍तीफे के बाद राज्यपाल (Governor) भगत सिंह कोश्यारी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो गई है. ऐसे में राज्यपाल आगे क्या निर्णय लेते हैं, इस पर सबकी निगाहें रहेंगी. सवाल यह उठ रहा है कि क्या राज्यपाल के पास राष्ट्रपति शासन (President Rule) ही अंतिम विकल्प है या कोई और रास्ता भी शेष बचा है. इसके साथ ही क्या वो सरकार बनाने की कोशिशों के बीच इंतजार करेंगे या कोई और निर्णय ले सकते हैं?

सरकार बनाने का अंतिम रास्ता
चुनाव परिणाम के बाद भी कोई राजनीतिक दल सरकार बनाने का दावा पेश नहीं कर रहा हो तो राज्यपाल सभी दलों के नेताओं से मिल सकते हैं. वो अपने विवेक के अनुसार किसी भी पार्टी के विधानमंडल दल के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं (आमतौर पर सबसे बड़ी पार्टी को ही सरकार गठन के लिए राज्यपाल आमंत्रित करते हैं). इसके बाद नई सरकार को बहुमत साबित करने के लिए वो 30 दिन तक का समय दे सकते हैं.

कार्यवाहक मुख्‍यमंत्री का विकल्‍प
राज्यपाल चाहें तो लोकप्रिय सरकार के गठन के लिए और समय ले सकते हैं. ऐसे में वो देवेन्द्र फडणवीस को कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाए रखते हुए नई सरकार के गठन का प्रयास कर सकते हैं. ऐसी स्थिति में कार्यवाहक मुख्यमंत्री के पास प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार नहीं होंगे. हालांकि फडणवीस ने शुक्रवार को इस्‍तीफा दे दिया है. संविधान में विधानसभा का कार्यकाल तो पांच साल तय है लेकिन कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल की कोई सीमा नहीं है. हालांकि राज्यपाल इस विकल्प को चुनें इसकी उम्मीद कम है.

देवेंद्र फडणवीस ने मुख्‍यमंत्री पद से दिया इस्‍तीफा.


सदन का नेता चुनने के लिए कह सकते हैं
राज्यपाल चाहें तो विधानमंडल दल की बैठक बुलाकर सदन का नेता चुनने के लिए कह सकते हैं और जो भी सदन का नेता चुना जाए उसे मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला सकते हैं. लेकिन ऐसी सरकार के सामने विश्वास मत का संकट रहेगा. क्योंकि सदन के नेता चुनते समय तो कई विकल्प होंगे लेकिन जब बहुमत साबित करने का मौका आएगा तो सिर्फ सरकार के साथ होना, विपक्ष में होना और सदन से वॉकआउट करने जैसे तीन ही विकल्प होंगे.

अंतिम विकल्प राष्ट्रपति शासन
राज्यपाल के पास राष्ट्रपति शासन का अंतिम विकल्प है. वो चाहें तो विधानसभा को निलंबित रखते हुए केंद्र सरकार को प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने का प्रस्ताव भेज सकते हैं. जिस तरह राज्यपाल ने पिछले दिनों राज्य के महाधिवक्ता और मुख्य सचिव जैसे अधिकारियों के साथ बैठक की, उससे ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है.

यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र LIVE: इस्‍तीफा देने के बाद बोले देवेंद्र फडणवीस- उद्धव ने मेरा फोन नहीं उठाया

Tags: BJP, Maharashtra, Maharashtra Assembly Election 2019, Maharashtra Election 2019, Shiv sena

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