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जल्लीकट्टू के बाद अब उठी भैंसा दौड़ ‘कंबाला’ से बैन हटाने की मांग

जल्लीकट्टू के बाद अब उठी भैंसा दौड़ ‘कंबाला’ से बैन हटाने की मांग

पड़ोसी तमिलनाडु में जल्लीकट्टू उत्सव मनाने का रास्ता साफ होने के साथ कर्नाटक में तटीय जिलों के दलदली खेतों में सालाना भैंसा दौड़ ‘कंबाला’ के आयोजन के लिए मांग बढ़ रही है

पड़ोसी तमिलनाडु में जल्लीकट्टू उत्सव मनाने का रास्ता साफ होने के साथ कर्नाटक में तटीय जिलों के दलदली खेतों में सालाना भैंसा दौड़ ‘कंबाला’ के आयोजन के लिए मांग बढ़ रही है

पड़ोसी तमिलनाडु में जल्लीकट्टू उत्सव मनाने का रास्ता साफ होने के साथ कर्नाटक में तटीय जिलों के दलदली खेतों में सालाना भैंसा दौड़ ‘कंबाला’ के आयोजन के लिए मांग बढ़ रही है

    पड़ोसी तमिलनाडु में जल्लीकट्टू उत्सव मनाने का रास्ता साफ होने के साथ कर्नाटक में तटीय जिलों के दलदली खेतों में सालाना भैंसा दौड़ ‘कंबाला’ के आयोजन के लिए मांग बढ़ रही है. 'कंबाला' समितियों ने अपने आंदोलन की रणनीति तय करने के लिए कल मंगलुरू में बैठक करने का फैसला किया है.

    'कंबाला' समिति अध्यक्ष अशोक राय ने बताया कि उडुपी और मंगलुरू क्षेत्रों से 'कंबाला' प्रेमी और 150 से 200 जोड़ी भैंसा इसमें भाग लेंगे.  'कंबाला' के लिए भी इजाजत मिलनी चाहिए क्योंकि इसमें किसी तरह की हिंसा नहीं होती. यह हमारे सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है.

    कंबाला समितियों ने इसके आयोजन पर कर्नाटक उच्च न्यायालय के स्थगन को हटाने के लिए एक अंतरिम याचिका भी दायर की है. इस मामले को शनिवार को उच्च न्यायालय ने 30 जनवरी के लिए स्थगित कर दिया था. बता दें कि तमिलनाडु में बैल की लड़ाई का महापर्व यानी, जल्लीकट्टू सियासत की दुनिया का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है. बैल की जंग पर सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध के खिलाफ जो आवाज उठी उसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दी.

    जानिए: जल्लीकट्टु क्या है?, क्या होता है इस खेल में हारने और जीतने वाले बैलों के साथ

     

    Tags: Jallikattu, Karnataka, Tamil nadu

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