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    जुलाई-सितंबर में बिके 5 करोड़ स्मार्टफोन, टॉप-5 में चार चीनी कंपनियां

    प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो क्रेडिट- Getty Images)
    प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो क्रेडिट- Getty Images)

    बाजार के आंकड़े जुटाने वाली कंपनी कैनालिस की रपट के मुताबिक शीर्ष पांच मोबाइल फोन कंपनी शियोमी, सैमसंग, विवो, रीयलमी और ओप्पो की बिक्री में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई है.

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    नई दिल्ली. लॉकडाउन (Lockdown) के बाद देश में स्मार्टफोन बाजार में फिर से सुधार दिखायी दे रहा है. साल 2020 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में इनकी बिक्री अब तक के सर्वकालिक उच्च स्तर यानी 5 करोड़ इकाई रही. इस दौरान, बाजार में सभी चीनी कंपनियों (Chinese Companies) की कुल 76 प्रतिशत हिस्सेदारी रही.

    चीनी सामान का बायकॉट बेअसर
    बाजार के आंकड़े जुटाने वाली कंपनी कैनालिस की रपट के मुताबिक शीर्ष पांच मोबाइल फोन कंपनी शियोमी, सैमसंग, विवो, रीयलमी और ओप्पो की बिक्री में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई है. कैनालिस ने एक बयान में कहा, ''2020 की तीसरी तिमाही में देश में स्मार्टफोन की बिक्री आठ प्रतिशत बढ़कर पांच करोड़ इकाई रही. पिछले साल इसी तिमाही में यह 4.62 करोड़ इकाई रही थी. यह देश में किसी एक तिमाही में स्मार्टफोन की बिक्री का सर्वकालिक उच्च स्तर है.''

    शियोमी ने सबसे ज्यादा 1.31 करोड़ फोन बेचे
    शियोमी 26.1 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर रही. कंपनी ने 1.31 करोड़ फोन की बिक्री की. सैमसंग ने वीवो को पछाड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल किया. कंपनी ने 1.02 करोड़ फोन की बिक्री के साथ 20.4 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी हासिल की.



    एप्पल ने भी बेचे 8 लाख फोन
    इसके बाद वीवो की 88 लाख फोन की बिक्री के साथ 17.6 प्रतिशत, रीयलमी की 87 लाख के साथ 17.4 प्रतिशत और ओप्पो की 61 लाख स्मार्टफोन की बिक्री के साथ 12.1 प्रतिशत हिस्सेदारी रही. समीक्षावधि में एप्पल ने भी बाजार में दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की और इस दौरान आठ लाख इकाई की बिक्री की.

    कैनालिस के शोध विश्लेषक वरुण कन्नन ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में भारत-चीन के बीच का तनाव लोगों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय रहा है. लेकिन बाजार में लोगों के खरीद निर्णयों पर इसका असर अभी दिखना बाकी है.

    गौरतलब है कि दोनों देशों के तनाव के बीच सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में चीनी सामानों के बहिष्कार का मुद्दा छाया रहा. इस बीच सरकार ने भी राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता को खतरा बताते हुए कई चीनी मोबाइल ऐप को बैन किया है.
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