सितंबर में शुरू हो सकता है 5G ट्रायल, चाइनीज़ कंपनियों को नहीं मिलेगी एंट्री

5G स्पेक्ट्रम शुरू होने पर इंटरनेट की स्पीट बढ़ जाएगी.

अगर 5G स्पेक्ट्रम शुरू हो गया तो आपके मोबाइल इंटरनेट की स्पीड और बढ़ जाएगी....

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    5G का ट्रायल इस साल सितंबर से शुरू हो सकता है. मुमकिन है कि टेलीकॉम डिपार्टमेंट कंपनियों को उनके 5G नेटवर्क की टेस्टिंग के लिए स्पेक्ट्रम मुहैया कराना शुरू करें. CNBC-TV 18 के मुताबिक सूत्रों ने इसकी जानकारी दी. फिलहाल मोबाइल फोन पर 4G नेटवर्क चलता है. लेकिन अगर 5G स्पेक्ट्रम शुरू हो गया तो आपके मोबाइल इंटरनेट की स्पीड और बढ़ जाएगी. पहले 5G नेटवर्क की टेस्टिंग इस साल मार्च में होने वाली थी लेकिन कोरोना वायरस (Covid-19) महामारी की वजह से इसे टाल दिया गया.

    टेलीकॉम डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने नाम जाहिर ना करने की शर्त पर बताया, ‘स्पेक्ट्रम का ऑक्शन शुरू करने से पहले टेलीकॉम कंपनियों को कम से कम 6 महीने तक 5G डिवाइस और स्पेक्ट्रम का ट्रायल लेना होगा.’ अधिकारी ने बताया, ‘हम कंपनियों को सितंबर से स्पेक्ट्रम मुहैया कराने की सोच रहे हैं ताकि वो अपने 5G डिवाइस की जांच कर सकें.’

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    चाइनीज कंपनियों की एंट्री नहीं
    CNBC-TV18 के मुताबिक, टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने 5G के ट्रायल और ऑक्शन से चाइनीज कंपनियों को बाहर रखने का सुझाव दिया है. दूरसंचार विभाग ने कहा कि चाइनीज कंपनियां ट्रायल या ऑक्शन में शामिल नहीं हो सकती हैं. भारत में दो चाइनीज कंपनियां हुवावे और ZTE टेलीकॉम इक्विपमेंट सेगमेंट में हैं.

    अधिकारी ने बताया, ‘दिसंबर 2019 में जिन कंपनियों ने ऐप्लिकेशन जमा किया था, हमने उनमें से सिर्फ नोकिया, एरिक्सन और सैमसंग को ही 5G ट्रायल में शामिल होने की अनुमति दी है.’ भारती एयरटेल ने भी अपना ऐप्लिकेशन जमा किया है और वह सैमसंग, नोकिया, हुवावे और एरिक्सन के साथ साझेदारी में 5G ट्रायल करेंगी.

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    हुवावे और ZTE जैसी चाइनीज़ कंपनियों को 5G से दूर रखा गया है जिससे इस सेगमेंट में प्रतियोगिता कम हो गई है. हुवावे ने भारत में रोड शो भी शुरू कर दिया था और 5G इकोसिस्टम के मामले में वह बाकी कंपनियों से आगे है.