नकली ब्रैंड के सामान की दिक्कत से निपटने के लिए अमेज़न लाया ये नई सर्विस

 प्रोजेक्ट जीरो के तहत एक एडिशनल प्रोऐक्टिव मैकेनिज़म और पावरफुल टूल को अपनाया जाएगा जिससे जाली लोगों को इस अमेज़न के प्लेटफॉर्म से हटाया जा सकेगा.
प्रोजेक्ट जीरो के तहत एक एडिशनल प्रोऐक्टिव मैकेनिज़म और पावरफुल टूल को अपनाया जाएगा जिससे जाली लोगों को इस अमेज़न के प्लेटफॉर्म से हटाया जा सकेगा.

यूरोप, जापान और यूएस में लगभग 7 हज़ार ब्रैंड्स प्रोजेक्ट जीरो (Project zero) के तहत एनरोल करा चुके हैं. भारत की भी काफी कंपनियों ने इसमें हिस्सा लिया.

  • Last Updated: November 13, 2019, 1:19 PM IST
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कस्टमर सर्विस को और बेहतर बनाने के लिए अमेज़न एक नया प्रोजेक्ट लेकर आया है. मंगलवार को अमेज़न ने इस बात की घोषणा की. इसका नाम 'प्रोजेक्ट ज़ीरो' है. प्रोजेक्ट जीरो के तहत एक एडिशनल प्रोऐक्टिव मैकेनिज़म और पावरफुल टूल को अपनाया जाएगा जिससे जाली लोगों को इस अमेज़न के प्लेटफॉर्म से हटाया जा सकेगा.

यूरोप, जापान और यूएस में लगभग 7 हज़ार ब्रैंड्स इस प्रोजेक्ट के तहत एनरोल करा चुके हैं. भारत की भी काफी कंपनियों ने इसमें हिस्सा लिया. अमेज़न के वर्ल्डवाइड कस्टमर ट्रस्ट एंड पार्टनर सपोर्ट वाइस प्रेसीडेंट धर्मेश एम मेहता ने कहा, 'इस लॉन्च के साथ ही इंडिया में हम लोग काफी ब्रैंड्स को देखकर बहुत उत्साहित हैं. इसमें छोटे, मीडियम और बड़े स्तर के मल्टी नेशनल ब्रैंड्स जुड़े हुए हैं ताकि नकली लोगों को बाहर किया जा सके.

प्रोजेक्ट ज़ीरो अमेज़न की एडवॉन्स्ड टेक्नॉलजी और इनोवेशन से जुड़ती है. जिससे ब्रैंड्स के बारे में पता लगाने में आसानी होती है कि कौन सा नकली है और कौन सा असली. इसके लिए तीन टूल्स का प्रयोग किया जाता है- ऑटोमेटेड प्रोजेक्शन्स, सेल्फ सर्विस काउंटरफीट रिमूवल टूल और प्रोडक्ट सीरियलाइज़ेशन. उन्होंने कहा, 'प्रोजेक्ट जीरो पर हम काफी लंबे समय से काम कर रहे थे ताकि ग्राहकों को अमेज़न पर शॉपिंग करते वक्त विश्वसनीय चीज़ें मिल सकें.'



प्रोडक्ट सीरियलाइज़ेशन में एक यूनीक कोड दिया जाता है जो कि कोई भी ब्रैंड अपने मैन्यूफैक्चरिंग और पैकेजिंग प्रोसेस में अपनाता है. इसे स्कैन करके अमेज़न व्यक्तिगत तौर पर प्रोडक्ट की विश्वसनीयता को चेक करता है.
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