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iPhone को वॉटरप्रूफ बताना Apple को पड़ा महंगा, कंपनी पर लगा 88 करोड़ रु का जुर्माना

Apple पर झूठ बोलने के आरोप में लगा जुर्माना
Apple पर झूठ बोलने के आरोप में लगा जुर्माना

इटली की एंटी-ट्रस्ट अथॉरिटी AGCM ने iPhones के वॉटरप्रूफ होने को लेकर झूठे दावे करने के आरोप में 10 मिलियन यूरो करीब 88 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 1, 2020, 1:00 PM IST
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नई दिल्ली. अमेरिका की स्मार्टफोन दिग्गज कम्पनी Apple की तरफ से iPhone के मॉडल को लेकर झूठ बोला गया था. इसके चलते Apple कंपनी पर 10 मिलियन यूरो करीब 88 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है. इटली की एंटी ट्रस्ट अथॉरिटी AGCM ने एप्पल पर यह जुर्माना लगाया है. गौरतलब है कि कंपनी पर iPhones की वाटर रेजिस्टेंस क्षमता को लेकर भ्रामक या गलत दावे करने के लिए सोमवार को जुर्माना लगाने का आदेश सुनाया गया है. बता दें कि इससए पहले भी कंपनी पर पुराने iPhone स्लो करने के आरोप में जुर्माना लगाया जा चुका है.

iPhone को लेकर झूठ बोलने का है आरोप
इटली की एंटी ट्रस्ट अथॉरिटी ने कहा कि Apple कंपनी ने iPhone मॉडल के वाटर रजिस्टेंस होने का काफी प्रचार प्रसार किया. लेकिन कंपनी के डिस्क्लेमर में कहा गया है कि फोन के तरल पदार्थ से होने वाले नुकसान के मामले में वारंटी को कवर नहीं किया जाएगा. साथ ही यह नहीं बताया गया कि आखिर किन परिस्थितियों में iphone का वाटर रजिस्टेंस फीचर काम करेगा. यह एक तरह से ग्राहकों के प्रति धोखा है. फिलहाल इस मामले में अभी तक Apple की तरफ से कोई बयान जारी नहीं किया गया है.

Apple ने किया ये दावा
एप्पल ने दावा किया है कि उसके अलग अलग आईफोन मॉडल चार मीटर तक की गहराई पर 30 मिनट तक रेजिस्टेंट यानी वाटरप्रूफ हैं. एप्पल की उसके वाटरप्रूफ होने के दावों की आलोचना करते हुए, AGCM ने कहा कि दावे कुछ निश्चित स्थितियों में ही सच हैं. ACGM ने एक बयान में कहा कि एप्पल का डिस्कलेमर लोगों से छल कर रहा है क्योंकि इसमें बताया गया है कि आईफोन्स पर वारंटी नहीं मिलेगी, अगर नुकसान किसी पानी की वजह से हुआ है. फिलहाल कंपनी ने अब तक इस खबर को लेकर कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है.



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पुराने iPhone स्लो करने पर लगा था जुर्माना
इससे पहले एप्पल पर नवंबर में 11.3 करोड़ डॉलर (838.95 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया गया था. यह जुर्माना 33 अमेरिकी स्टेट्स और कोलंबिया जिले के लगाए आरोपों पर है. कंपनी पर आरोप है कि उसने बैटरी से जुड़े मुद्दों को छिपाने के लिए पुराने आईफोन्स को स्लोडाउन किया जिससे यूजर्स नए डिवाइसेज खरीदें.

2017 में ऐपल ने ऐसा अपडेट जारी किया था जिसके चलते कंपनी के पुराने iPhone स्लो हो गए थे और इसकी जानकारी कंपनी ने यूजर्स को पहले से नहीं दी थी. ऐपल के इस अपडेट के बाद पुराने आईफोन स्लो हो गए. जब लोगों ने इसकी शिकायत की तो कंपनी ने अपनी सफाई में कहा कि फोन में परेशानी न आए और बैटरी के चलते फोन बंद न हों, इसलिए कंपनी ने ऐसा किया है.

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34 राज्यों ने ऐपल के खिलाफ शुरू की जांच
कंपनी की ये दलील लोगों को रास नहीं आई और अमेरिका के लगभग 34 राज्यों ने ऐपल के खिलाफ जांच शुरू करने और कोर्ट जाने का फ़ैसला किया. स्टेट्स का कहना था कि ऐपल लोगों को नए और महंगे आईफ़ोन ख़रीदने के लिए मजबूर कर रहा है. पुराने फ़ोन को अपडेट के ज़रिए स्लो किया जाता है ताकि लोग कंपनी के नए और महंगे iPhone मॉडल्स ख़रीद सकें.
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