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Paytm, गूगल पे जैसी ऐप्स से आप भी उठाते हैं Cashback का फायदा, तो भरना होगा Tax!

News18Hindi
Updated: June 29, 2019, 9:33 AM IST
Paytm, गूगल पे जैसी ऐप्स से आप भी उठाते हैं Cashback का फायदा, तो भरना होगा Tax!
ऑनलाइन शॉपिंग में जो पैसे हम खर्च करते हैं कैशबैक्स उसी पर मिले हुए डिस्काउंट होते हैं. ये ट्रांजैक्शन होने के तुरंत बाद या कुछ वक्त बाद आपको ई-वॉलेट या लिंक्ड बैंक अकाउंट में आ जाते हैं.

ऑनलाइन शॉपिंग में जो पैसे हम खर्च करते हैं कैशबैक्स उसी पर मिले हुए डिस्काउंट होते हैं. ये ट्रांजैक्शन होने के तुरंत बाद या कुछ वक्त बाद आपको ई-वॉलेट या लिंक्ड बैंक अकाउंट में आ जाते हैं.

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ऑनलाइन ट्रांजैक्शन्स के दौरान हमारा फोकस कैशबैक, डिस्काउंट ऑफर्स पर रहता है. ऑनलाइन खरीदारी के लिए कंपनियां ग्राहकों को UPI, e-wallets, credit/debit cards या ऐप्स के ज़रिए बहुत से कैशबैक ऑफर्स करती हैं. पेटिएम, Google Pay, फोन पे, Mobiquik जैसी ऐप्स भी अपने प्लैटफॉर्म पर कैशबैक ऑफर करती है. ये ऑफर्स काफी कन्विंसिंग और ल्यूक्रेटिव होते हैं. लेकिन अब आपको कैशबैक पर टैक्स चुकाना पड़ सकता है.

ऑनलाइन शॉपिंग में जो पैसे हम खर्च करते हैं कैशबैक्स उसी पर मिले हुए डिस्काउंट होते हैं. ये ट्रांजैक्शन होने के तुरंत बाद या कुछ वक्त बाद आपको ई-वॉलेट या लिंक्ड बैंक अकाउंट में आ जाते हैं. ये अमाउंट टैक्सेबल हो सकता है. बस शर्त ये है कि ये अमाउंट सालाना 50,000 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. (ये भी पढ़ें- Online सामान खरीदते हैं तो कभी ना करें ये 5 गलतियां, हो सकता है भारी नुकसान)

गूगल पे और फोन पे ऐप्स भी देती हैं कैशबैक ऑफर


दरअसल, इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 56(2) के तहत किसी भी टैक्सपेयर का 50,000 से ज्यादा ऐसे अमाउंट पर गिफ्ट टैक्स या किसी दूसरे स्रोत से होने वाली आय की तरह टैक्स लागू होता है.

हालांकि, ये कैशबैक अगर फ्री मूवी टिकट्स, पेन ड्राइव या इयरफोन्स जैसी चीजों के रूप में मिले तो इनपर कोई टैक्स नहीं लगेगा. शर्त ये होगी कि ये प्रॉडक्ट्स टैक्सपेयर के लिए इनकम का सोर्स ना हों. अगर इनसे टैक्सपेयर को इनकम होती है तो इसपर आईटी एक्ट के सेक्शन 28 (iv) के तहत उनके मार्केट वैल्यू के हिसाब से उनपर टैक्स लगेगा. (ये भी पढ़ें- कहीं आपका WhatsApp अकाउंट भी तो नहीं हुआ है हैक, ऐसे जानें)



इसलिए सालाना कैशबैक का अमाउंट 50,000 से ऊपर जा रहा है तो आपको ITR में इसे इनकम के तौर पर डिक्लेयर करना होगा. ऐसा ना करने पर आईटी एक्ट के सेक्शन 147 के तहत आपको इसे रीअसेसमेंट करना पड़ेगा.
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(सोर्सः मनिकंट्रोल)

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First published: June 29, 2019, 9:26 AM IST
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