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सोशल मीडिया मामले में नियम बनाने के लिए सरकार ने SC से मांगा तीन महीने का वक्त

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Updated: October 21, 2019, 7:46 PM IST
सोशल मीडिया मामले में नियम बनाने के लिए सरकार ने SC से मांगा तीन महीने का वक्त
मंत्रालय द्वारा कोर्ट में फाइल किए गए एफिडेविट में कहा गया कि सरकार इस बात पर विचार करेगी कि सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए कंटेट के लिए कंपनी को ही जिम्मेदार ठहराया जा सके.

पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने सरकार को तीन हफ्ते के अंदर सोशल मीडिया के गलत प्रयोग के संबंध में गाइडलाइन जारी करने की बात कही थी.

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  • Last Updated: October 21, 2019, 7:46 PM IST
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सोशल मीडिया (Social Media) जैसे वॉट्सऐप (WhatsApp), फेसबुक (Facebook) पर पोस्ट किए कंटेट की जिम्मेदारी के मामले में सरकार की तरफ से मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट फाइल कर दिया है. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को संकेत दिए हैं कि इस मामले में कड़े नियम बनाए जाएंगे ताकि सोशल मीडिया को और बेहतर तरीके से रेक्युलेट किया जा सके.

मंत्रालय द्वारा कोर्ट में फाइल किए गए एफिडेविट में कहा गया कि सरकार इस बात पर विचार करेगी कि सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए कंटेट के लिए कंपनी को ही जिम्मेदार ठहराया जा सके. इसमें कहा गया कि सरकार की कोशिश होगी कि मामले से जुड़े सभी पक्षों को कवर किया जा सके.

एफिडेविट में कहा गया है कि इस संबंध में नियम 15 जनवरी 2020 तक बना लिए जाएंगे और उन्हें नोटीफाई कर दिया जाएगा. बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक मंत्रालय ने कहा कि टेक्नॉलजी की वजह से आर्थिक विकास में काफी सहायता मिली है लेकिन वहीं दूसरी तरफ हेट स्पीच, फेक न्यूज, पब्लिक ऑर्डर और देश विरोधी गतिविधियों में भी काफी बढ़ोत्तरी हुई है.

बता दें कि पिछली सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने सरकार को तीन हफ्ते के अंदर सोशल मीडिया के गलत प्रयोग के संबंध में गाइडलाइन जारी करने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि फेसबुक, व्हाट्सऐप जैसी सोशल मीडिया कंपिनयां किसी मैसेज के ओरिजिन को पकड़ पाने में अपनी अक्षमता दिखा रही हैं ऐसे में सरकार को इस मामले में ध्यान देना पड़ेगा.

इस मामले में कई पीआईएल (Social Media Related PIL) डाले जा चुके हैं. पहला पीआईएल जुलाई 2018 में मद्रास हाईकोर्ट के सामने डाला गया था. याचिकाकर्ता एंटोनी क्लीमेंट रूबिन ने इस मामले में मांग की थी कि कोर्ट, सरकार को निर्देश दे कि वह हर सोशल मीडिया अकाउंट के साथ किसी सरकारी आईडी प्रूफ को अनिवार्य बनाए ताकि सोशल मीडिया अकाउंट की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान नहीं लगाया जा सके.

कोर्ट ने ये आदेश एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया था जिसमें फेसबुक और वॉट्सऐप ने मांग की थी कि मद्रास, बॉम्बे और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से आधार को सोशल मीडिया अकाउंट से लिंक करने के मामले को सुप्रीम में सुना जाए.

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First published: October 21, 2019, 7:42 PM IST
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