• Home
  • »
  • News
  • »
  • tech
  • »
  • Clubhouse: टैलेंट हंट से लेकर लाइव शो तक- क्लब हाउस ऐप का भारत में कुछ यूं हो रहा इस्तेमाल

Clubhouse: टैलेंट हंट से लेकर लाइव शो तक- क्लब हाउस ऐप का भारत में कुछ यूं हो रहा इस्तेमाल

Clubhouse.

Clubhouse.

Clubhouse एक ऑडियो ऐप है, जिसकी सबसे खास बात ये है कि इसमें रोज़ाना लाखों लोग एक दूसरे से रोज रियल टाइम में जुड़ते हैं. वो एक दूसरे को देख नहीं सकते हैं लेकिन किसी भी विषय पर खुल कर चर्चा कर सकते हैं.

  • Share this:

    21 मई को भारत में एक लाइव ऑडियो ऐप Clubhouse एंड्रॉयड पर लॉन्च किया गया और महज दो हफ्ते में 20 लाख भारतीय इससे जुड़ गए. इसकी सबसे खास बात ये है कि इसमें रोज़ाना लाखों लोग एक दूसरे से रोज रियल टाइम में जुड़ते हैं. वो एक दूसरे को देख नहीं सकते हैं लेकिन किसी भी विषय पर खुल कर चर्चा कर सकते हैं. चाहे फिर कोई बढ़िया घूमने की जगह हो, खाने से जुड़ी बात हो, किसी को कहानी सुनानी हो, गाना गाना हो या फिर रोज़गार पाना हो. ये नई उम्र और नए तरीके की क्लबिंग हैं. जिसमें लोग अपने अपने घरों में बैठ कर क्लब की चर्चा का लुत्फ उठाते हैं. ऐसा और किसी भी डिजिटल प्लेटफार्म पर नहीं हो सकता है.

    अगर आप फेसबुक, इंस्टाग्राम, वॉट्सएप या जूम पर कोई ग्रुप बनाना चाहते हैं या चर्चा करना चाहते हैं तो आपको लोगों को इन्वाइट की लिंक भेजनी होती है, इसी तरह से आप चर्चा में शामिल भी तभी हो सकते हो जब आपको किसी ने इन्वाइट भेजी है. लेकिन एक ऐसी ऐप जिसमें किसी भी चीज़ की ज़रूरत नहीं है. हम बात कर रहे हैं क्लबहाउस की. जहां आप बगैर किसी इन्वाइट यानि न्यौते के किसी भी क्लब में दस्तक दे सकते हैं बस वो बंद ना हो.

    (ये भी पढ़ें- पहले से और भी सस्ता मिल रहा है Oppo का शानदार 5G स्मार्टफोन, मिलेगी 8GB तक RAM)

    मकसद भी है..
    अखिल भारतीय स्टार्टअप एक क्लब था, जो उद्यमिता के बारे में चर्चा करने के लिए खोला गया था. अब ये लोगों को रोज़गार दिलाने वाला एक फोरम बन चुका है. इसके 66,000 से ज्यादा फॉलोअर हैं. क्लब हर्षा एमवी की मॉडरेटर का कहना है कि हम रोज़ाना कंपनी के संस्थापकों को उनकी कंपनी की नौकरियों के बारे में 30 सेकेंड के लिए बात करने के लिए कहते हैं. उनसे ये जानने की कोशिश करते हैं कि लोग उनसे कैसे जुड़ सकते हैं. एक घंटे में औसतन 60-70 नियोक्ता आ जाते हैं

    इसी तरह एडवाइजर क्लब हर हफ्ते करियर से जुड़ा रूम तैयार करता है, जहां युवाओं को रोज़गार से जुड़ी बातें बताई जाती है. यहां पर रेज्यूमे कैसे तैयार होता है, नेटवर्किंग कैसे बढ़ाई जा सकती है और भी इस तरह की युवाओं और उनके करियर से जुड़ी बातें बताई जाती है. हाल ही में इस पर ये बताया गया कि क्या कंटेट तैयार करने से क्लबहाउस पर फुलटाइम नौकरी हासिल की जा सकती है.

    इसके अलावा अगर आप ट्रेडिंग में दिलचस्पी रखते हैं या बिटकॉइन के बारे में कुछ जानना चाहते हैं. या फिर आप खेती की ओर रुख करने का मन बना रहे हैं. या फिर फिल्म के लिए स्क्रिप्ट लिखने का सोच रहे हैं. यहां किसी भी विषय पर चर्चा की जा सकती है.

    (ये भी पढ़ें- WhatsApp पर आसान तरीके से छुपा सकते हैं अपनी प्राइवेट Chats, किसी को नहीं चलेगा पता…) 

    अगर कहीं इस पर चर्चा हो रही है तो आप उसमें शामिल हो सकते हैं नहीं तो आप अपना रूम भी तैयार कर सकते हैं. कहीं पर पैगासस या ट्विटर विवाद पर बात चल रही होती है तो कहीं पर ये बताया जा रहा होता है कि किस तरह क्राउड फंडिग से पैसे जुटाए जा सकते हैं. अच्छी बात ये है कि जहां इस पर चर्चा चल रही होती है और सभी को बोलने का मौका मिल रहा होता है वहीं इसका एक मकसद भी है.

    इसके ज़रिए लोगों को काम मिल भी रहा है और काम देने वालों को भी एक प्लेटफार्म मिल रहा है. अगर आप में कोई टैलेंट है चाहे फिर वो गाने का हो या स्टैंडअप कॉमेडी का, तो आप भी यहां हाथ आज़मा सकते हैं. यही नहीं महामारी के दौरान जिस तरह लोगों की आर्थिक कमर टूटी है, ऐसे में कई लोग जो कभी एक दूसरे से मिले नहीं, एक शहर में रहते नहीं है. बस एक जैसे विचार और पसंद की वजह से साथ मिल कर ग्रुप बना रहे हैं और अलग अलग तरह के काम कर रहे हैं.

    दिल से दिल को राह
    क्लबहाउस एक तरह से ऑडियो लिंक्डइन बन चुका है, लेकिन अच्छी बात ये है कि यहां और भी विषय, जिन पर दूसरे प्लेटफॉर्म पर बात करना मुश्किल है, उनपर भी यहां खुल कर चर्चा होती है. इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य, डेटिंग, तलाक, सेक्स, महिलाओं पर सामाजिक दबाव, कहानियां, एलजीबीटीक्यूआईए, अकेले रहना मेरा चुनाव, दलित जाति, पर्यावरण कानून, और ऐसे तमाम फोरम बने हुए हैं जहां पर इन विषयों पर अलग अलग राय मिलती है. क्लबहाउस की अच्छी बात ये है कि यहां पर बोलने से कई लोगों का आत्मविश्वास भी जागा है. यहां कई क्लब भी हैं, जहां सार्वजनिक मंच पर बोलने का अभ्यास किया जाता है. इसके साथ ही भाषा को कुशल करने के लिए भी कई मंच है.

    जानेमाने अभिनेता आशीष विद्यार्थी जो एक मोटिवेशनल स्पीकर हैं वो भी इससे जुड़े हुए हैं, वहीं आइईएलटीएस प्रशिक्षक और ट्रेवल ब्लॉगर दीपा करांजे जो यहां पर एक ट्रेवल क्लब चलाती हैं उनका कहना है कि इससे मुझे एक आत्मविश्वास मिला है, पहले अपने शर्मीले स्वभाव की वजह से मैं चर्चा नहीं कर पाती थी लेकिन अब कोई दिक्कत नहीं होती है.

    वहीं दिल्ली के सिद्धार्थ अरोरा एक सेलिब्रिटी बन चुके हैं. वो यहां पर खुद का एक म्यूजिक शो चलाते हैं. उनके करीब 46000 फॉलोअर हैं. इसी तरह से खेलप्रेमियों का भी यहां अलग समूह है. दिल्ली के रहने वाले गुलाटी टीवी पर विंबलडन और यूरो कप देखते हैं लेकिन साथ ही साथ में रियल टाइम में क्लबहाउस पर चर्चा भी कर रहे होते हैं.

    स्याह पक्ष
    हालांकि कोई भी सोशल ऐप के अपने फायदे हैं तो अपने नुकसान भी हैं. क्लबहाउस के साथ भी ऐसा ही है. यहां पर एक जैसे विचार के लोग एक साथ क्लब बना रहे हैं. और ध्रुवीकरण, चरमपंथी, घृणा फैलाने वाली बातें, इस्लामोफोबिया, लव जिहाद, जातिवाद, जैसे विषयों पर भी खुले आम चर्चा होती है, और इसकी निगरानी करने वाला कोई नहीं है. जो लोग इस बात से सहमत नहीं होते हैं उन्हें ऑनलाइन लताड़ा जाता है. ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने जब किसी समूह में विरोधी सुर लगाया है तो उन्हें या तो ब्लॉक कर दिया गया या बुरी तरह लताड़ा गया है.

    इसी तरह कुछ लोगों का मानना है कि गुणवत्ता का यहां कोई ख्याल नहीं रखा जा सकता है. ये सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात है. जो लोग खुद प्रशिक्षित नहीं हैं वो मानसिक स्वास्थ्य पर बात कर रहे हैं. इससे ज्यादा डराने वाली बात ये है कि कोई भी किसी थर्ड पार्टी ऐप से आपकी आवाज़ को रिकॉर्ड कर सकता है और उसका दुरुपयोग कर सकता है.

    क्या ये महामारी के बाद भी टिक पाएगा?
    ये जानना दिलचस्प होगा कि क्या क्लबहाउस का बुखार टिक पाएगा. साक्षात्कार देने वालों को नहीं लगता क्योंकि जैसे ही लोग अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी में लौटे यहां आने वालों की संख्या कम होती गई. कवि अम्बिका उप्पल सीक्रेट पोएट्स सोसायटी चलाती हैं और कहती हैं कि क्लबहाउस सही वक्त पर सही जगह था क्योंकि यह अप्रैल 2020 में आया जब लोग अकेले रहने के लिए मजबूर थे. इससे जुड़ा ट्रेंड कम हो सकता है लेकिन उप्पल को लगता है कि क्लबहाउट टिकेगा क्योंकि इससे लोगों की सोच को जानने का मौका मिलता है.

    भारत में ढाई लाख यूज़र्स वाले लहर के सहसंस्थापक विकास मालपानी कहते हैं कि इस तरह के मंच को एक साइकिल से होकर गुज़रना पड़ता है और हां सोशल ऑडियो एप से जुड़ा नयापन तो खत्म हो ही जाता है. लेकिन एक बार जब तूफान थम जाए तब इस माध्यम के स्थायी यूजर इसे आगे ले जाएंगे.
    (स्टोरी सोर्स-moneycontrol.com)

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    विज्ञापन