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फेसबुक बन जाएगा सबसे बड़ा 'कब्रिस्तान', जिंदा से ज़्यादा मरे लोगों का होगा अकाउंट: स्टडी

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Updated: April 28, 2019, 1:00 PM IST
फेसबुक बन जाएगा सबसे बड़ा 'कब्रिस्तान', जिंदा से ज़्यादा मरे लोगों का होगा अकाउंट: स्टडी
स्टडी के मुताबिक साल 2070 तक मृत लोगों के फेसबुक अकाउंट की संख्या जिंदा लोगों के अकाउंट से ज़्यादा हो जाएगी.

स्टडी के मुताबिक साल 2070 तक मृत लोगों के फेसबुक अकाउंट की संख्या जिंदा लोगों के अकाउंट से ज़्यादा हो जाएगी.

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  • Last Updated: April 28, 2019, 1:00 PM IST
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आने वाले 50 सालों में फेसबुक पर मरे हुए लोगों के अकाउंट जिंदा लोगों के अकाउंट की संख्या को पार कर सकता है. ‘Big Data and Society’ जरनल में छपी एक स्टडी में बताया गया है कि साल 2100 तक फेसबुक के 1.4 अरब मौजूदा यूज़र्स की मौत हो चुकी होगी और अगर ऐसा ही रहा तो साल 2070 तक मृत लोगों के फेसबुक अकाउंट की संख्या जिंदा लोगों के अकाउंट से ज़्यादा हो जाएगी.

इस स्टडी के प्रमुख लेखक (ऑक्सफोर्ड इंटरनेट इंस्टिट्यूट) Carl Ohman कहते हैं, 'इन आंकड़ों से एक नया और मुश्किल सवाल उठ खड़ा होता है कि इस डेटा पर किसका अधिकार होगा, मृत लोगों के परिवार और दोस्तों के बेहतर हित तथा अतीत को समझने के लिए भविष्य के इतिहासकारों द्वारा इसे किस तरह इस्तेमाल किया जाना चाहिए.' (ये भी पढ़ें-एक नहीं Facebook पर 5 अकाउंट चला सकते हैं आप, वीडियो में देखें पूरा तरीका)

कार्ल ने यह भी कहा कि हमारा डिजिटल मैनेजमेंट उन सभी को प्रभावित करेगा जो सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि हम सभी एक दिन इस दुनिया से चले जाएंगे और अपने डेटा पीछे छोड़ देंगे.



इस स्टडी के दौरान विश्लेषकों ने दो संभावित परिदृश्यों को तैयार किया, जिसमें कहा गया कि भविष्य उन दोनों में से ही कोई एक हो सकता है. पहला यह कि अगर 2018 तक कोई भी नया यूज़र फेसबुक में शामिल नहीं हुआ तो सदी के अंत तक एशिया में मृतकों की हिस्सेदारी बढ़कर 44 प्रतिशत हो जाएगी. (ये भी पढ़ें-फेसबुक मैसेंजर में इस्तेमाल करें WhatsApp का ये इंट्रेस्टिंग फीचर, वीडियो में देखें पूरा तरीका)



दूसरी सूरत यह कि हर साल 13% की दर से फेसबुक के यूज़र्स बढ़ते रहे तो ऐसे हाल में अफ्रीका मृतकों का प्रमुख क्षेत्र होगा. यह दर बताता है कि सदी समाप्त होने से पहले मरे हुए यूज़र्स की संख्या 4.9 अरब तक बढ़ सकती है.

ओहमन ने कहा कि परिणामों की व्याख्या भविष्यवाणी के रूप में नहीं, बल्कि मौजूदा सूरतेहाल पर एक टिप्पणी के रूप में की जानी चाहिए. साथ ही ये उस दिशा को आकार देने का अवसर भी है, जिसे हम भविष्य में ले जा रहे हैं.

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First published: April 28, 2019, 1:00 PM IST
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