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आपकी कार से होने वाला प्रदूषण ही अब बनेगा ईंधन, वैज्ञानिक ने बनाई तकनीक


Updated: November 6, 2019, 1:18 PM IST
आपकी कार से होने वाला प्रदूषण ही अब बनेगा ईंधन, वैज्ञानिक ने बनाई तकनीक
सभी मोटर वाहनों के लिए पीयूसी अनिवार्य होता है.

पिछले पांच साल (2014-2018) अब तक के सबसे गर्म पांच साल दर्ज किए गए हैं. जैसा कि अरहेनियस को संदेह था, इस ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) का मुख्य कारण कार्बन उत्सर्जन ही है. जो हम वायुमंडल में लगातार छोड़ रहे हैं.

  • Last Updated: November 6, 2019, 1:18 PM IST
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लंदन. एक स्वीडिश इलेक्ट्रोकैमिस्ट स्वांते एर्हेनियस (Swedish electrochemist Svante Arrhenius) ने 1895 में ही भविष्यवाणी (Predictions) की थी कि मानव निर्मित कार्बन डाइऑक्साइड  (Carbon Emissions) उत्सर्जन नाटकीय रूप से पृथ्वी की जलवायु (Climate Change) को बदल देगा. हम और आप जिस समय में रह रहे हैं उसने इसे 130 साल पहले आते हुए देख लिया था. पिछले पांच साल (2014-2018) अब तक के सबसे गर्म पांच साल दर्ज किए गए हैं. जैसा कि अरहेनियस को संदेह था, इस ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) का मुख्य कारण कार्बन उत्सर्जन ही है. जो हम वायुमंडल में लगातार छोड़ रहे हैं.

इस समय यह सबसे बड़ी चुनौती है. 2017 के दौरान एक साल में इंसानों ने 36.8 बिलियन मीट्रिक टन ग्रीनहाउस गैस का उत्पादन किया. दुनिया भर में पर्यावरण को खराब करने के लिए इतनी गैस काफी है. ज्यादातर दोष हमारा परिवहन ढांचा है. वैश्विक CO2 उत्सर्जन का लगभग 20 प्रतिशत कार, ट्रक, हवाई जहाज और अन्य वाहनों द्वारा होता है. क्या यह अच्छा नहीं होगा यदि हम CO2 को पतली हवा से बाहर निकाल सकें और इसे एक नए प्रकार के वाहन ईंधन में शामिल कर सकें जो पर्यावरण के लिए बेहतर हो?

हम ऐसा करने के लिए तैयार हो सकते हैं. ऊर्जा अनुसंधान पत्रिका जूल ने हार्वर्ड के प्रोफेसर डेविड कीथ के नेतृत्व में एक अध्ययन प्रकाशित किया. एक प्रायोगिक भौतिक विज्ञानी और सार्वजनिक नीति विशेषज्ञ, कीथ ने 2009 में कंपनी कार्बन इंजीनियरिंग (CE) की स्थापना की. संगठन का मिशन "ऐसी तकनीक का विकास और व्यवसायीकरण करना है, जो सीधे तौर पर हवा से CO2 की मात्रा को नियंत्रित करती है."

Co2_to_Fuel
यह तकनीक ठीक उसी तरह से काम करती है जैसे प्राकृतिक रूप से पौधे सूरज की रोशनी मिलने पर कार्बन डाईऑक्साइड से ऑक्सीजन बनाते हैं.


अंग्रेजी अखबार द इंडिपेंडेंट के मुताबिक वैज्ञानिक अब एक ऐसा कृत्रिम पत्ता बनाने में सफल हो गए हैं जो हवा में मौजूद कार्बन डाईऑक्साइड को ईंधन में बदल सकता है. यह तकनीक ठीक उसी तरह से काम करती है जैसे प्राकृतिक रूप  से पौधे सूरज की रोशनी मिलने पर कार्बन डाईऑक्साइड से ऑक्सीजन बनाते हैं. प्राकृतिक प्रक्रिया को फोटोसिंथेसिस कहा जाता है.

कृत्रिम पत्ता असली पेड़ की तरह यह काम कप्रस ऑक्साइड नाम के एक लाल पाउडर की मदद से करता है. इस प्रक्रिया में कार्बन डाईऑक्साइड से मिथेनॉल और ऑक्सीजन का निर्माण होता है. नेचर एनर्जी पत्रिका में प्रकाशित इस शोध के मुताबिक इस कृत्रिम पत्ते से निकले पदार्थ को गरम करके इसमें मौजदू पानी को अलग किया जा सकता है. बचा हुआ पदार्थ मिथेनॉल होगा.

वाटरलू यूनिवर्सिटी के प्रोफसेर और इस वैज्ञानिक खोज के मुख्य शोधकर्ता यिमिन वू के मुताबिक इस कृत्रिम प्रक्रिया की दक्षता प्राकृतिक प्रक्रिया से 10 गुना अधिक है.
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वू ने बताया कि अब अगला कदम उद्योगों के साथ मिलकर इस खोज को अमल में लाया जाए और व्यावसायिक उत्पादन किया जाए.

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First published: November 6, 2019, 12:57 PM IST
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