डेटा लीक: कानून से बच निकला फेसबुक, यूजर्स की प्राइवेसी फिर खतरे में

Lalit Fulara | News18Hindi
Updated: April 20, 2018, 1:30 PM IST
डेटा लीक: कानून से बच निकला फेसबुक, यूजर्स की प्राइवेसी फिर खतरे में
Lalit Fulara | News18Hindi
Updated: April 20, 2018, 1:30 PM IST
फेसबुक इस वक्त दुनियाभर में डेटा लीक को लेकर विवादों में है. 8 करोड़ से ज्यादा यूजर्स के डेटा में क्रैंबिज एनालिटिका की सेंधमारी के बाद भी मार्क जकरबर्ग अभी तक डेटा की पुख्ता सुरक्षा को लेकर कोई ठोस पॉलिसी या नियम नहीं बता पाए हैं. इससे साफ है कि फेसबुक डेटा चोरी की सुरक्षा का सिर्फ नाटक करता रहता है. फेसबुक की एक चालाकी ने उसकी पूरी पोल खोलकर रख दी है. फेसबुक डेटा चोरी को लेकर सभी देशों में एक-सा कानून लागू नहीं कर रहा है. ऐसा करके फेसबुक यूजर्स के साथ धोखा तो कर ही रहा है साथ ही में डेटा चोरी कानून के भारी जुर्माने से बचने के लिए बीच का रास्ता भी तैयार कर रहा है.

कानून से बचने के लिए फेसबुक ने की ये चालाकी
फेसबुक ने न्यूज एजेंसी रॉयटर से कहा है कि वो दुनियाभर में यूरोपियन यूनियन का डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन लॉ (जीडीपीआर) को एक्सटेंड नहीं कर सकता है. इसका मतलब हुआ कि एशिया,अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और लैटिन अमेरिका के 150 करोड़ यूजर्स यूरोपियन यूनियन डेटा प्रोटेक्शन कानून का फायदा नहीं उठा सकते हैं. जबकि यूरोपियन यूनियन में शामिल 28 देश ही इस कानून का फायदा उठा पाएंगे.

यूजर्स फेसबुक से चाहते हैं सेफ्टी फीचर्स, जकरबर्ग करते हैं सिर्फ वादा

फेसबुक के इस कदम के बाद यह साफ हो गया है कि फेसबुक डेटा प्रोटेक्शन को लेकर दुनियाभर में एक-सी नीति लागू नहीं कर पा रहा है. उसके पास यूजर्स के डेटा को सुरक्षित बनाए रखने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं है. मार्क जकरबर्ग अपने बयानों के जरिए सिर्फ यूजर्स से वादा ही कर रहे हैं जबकि यह वक्त ऐसा है जब यूजर्स फेसबुक से डेटा प्रोटेक्शन को लेकर ठोस सेफ्टी फीचर चाहता है.

यूरोपियन यूनियन जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन कानून अगले महीने 25 मई से लागू होगा. इस कानून के तहत किसी भी कंपनी को डेटा कलेक्ट करने, उसका इस्तेमाल करने और उसे किसी को भी शेयर करने से पहले यूजर्स की सहमति लेनी जरूरी है. चाहे यह डेटा विज्ञापन और किसी दूसरे प्लेटफॉर्म के लिए ही इस्तेमाल क्यों न किया गया हो.

इतना ही नहीं जो कंपनियां इस कानून का पालन नहीं करेंगी उन्हें भारी जुर्माना भरना होगा. यह जुर्माना कंपनियों के एनुअल ग्लोबल रेवन्यू का 4 फीसदी होगा. फेसबुक के मामले में यह अरबों रुपये का हो सकता है क्योंकि दुनियाभर में फेसबुक के 220 करोड़ से ज्यादा मंथली एक्टिव यूजर्स हैं. वैसे भी क्रैंबिज एनालिटिका विवाद के बाद फेसबुक दुनियाभर की सरकारों के नजरें में चढ़ा हुआ है. भारत में भी फेसबुक को साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि वह किसी भी तरह चुनाव प्रभावित करने की कोशिश न करें. इतना ही नहीं भारतीय राज्यों में होने वाले विधानसभा को लेकर फेसबुक से इस बात का लिखित जवाब मांगा गया है कि वो चुनावों को प्रभावित नहीं करेगा.
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अरबों यूजर्स का डेटा ऐसे लग जाएगा दांव पर!
अगर फेसबुक यूरोपियन यूनियन जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन कानून दुनियाभर के देशों के लिए लागू नहीं करता है तो इससे अरबों से ज्यादा यूजर्स की प्राइवसी दांव पर लग जाएंंगी. उन देशों का क्या होगा जो यूरोपियन यूनियन में शामिल नहीं है. फेसबुक ने जैसा की रॉयटर को कहा है कि वो इस कानून को सभी देशों के लिए लागू नहीं कर सकता है. इससे डेटा को सुरक्षित बनाने के फेसबुक की मंशा पर साफ तौर पर सवालिया निशान खड़े होते हैं.

फेसबुक की इस चालाकी के बाद अगर आप अमेरिका,यूरोप और कनाडा के बाहर के फेसबुक यूजर्स हैं तो आप कंपनी के खिलाफ आयरलैंड कोर्ट में केस फाइल नहीं कर सकेंगे. और आयरलैंड कोर्ट ही है जो जीडीपीआर कानून को लागू न करने को लेकर फेसबुक के खिलाफ भारी जुर्माना लगा सकता है. इस तरह फेसबुक ने भारी जुर्माने से बचने का तरीका निकाल लिया है.
First published: April 20, 2018, 1:28 PM IST
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