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गूगल ने Passkey फीचर किया पेश, बिना पासवर्ड किसी भी वेबसाइट पर कर सकेंगे लॉगिन

गूगल ने passkey फीचर पेश किया (सांकेतिक तस्वीर)

गूगल ने passkey फीचर पेश किया (सांकेतिक तस्वीर)

गूगल ने यूजर्स को एक्सट्रा सिक्योरिटी प्रदान करने की लिए पासकी फीचर पेश कर दिया है. पासकी यूजर्स को अधिक सिक्योरिटी प्र ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

गूगल ने अपने यूजर्स के लिए पासकी फीचर पेश कर दिया है.
पासकी आने के बाद यूजर्स बिना पासवर्ड के लॉग इन कर सकेंगे.
Google साल के अंत तक रेगूलर यूजर्स को पासकी सुविधा दे सकती है.

नई दिल्ली. गूगल ने एंड्रॉयड डिवाइस और Google Chrome के लिए एक नई पासकी फीचर पेश किया है. यह फीचर यूजर्स को एक्सट्रा सिक्योरिटी प्रदान करता है. इस फीचर के जरिए यूजर्स किसी भी वेबसाइट या ऐप में लॉग इन करने के लिए पासवर्ड के बजाय पिन या बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन का उपयोग करके अपनी पहचान प्रमाणित कर सकेंगे. Two-factor Authentication मैथड की तुलना में नया फीचर यूजर्स को एक अधिक सुरक्षित विकल्प देता है.

गौरतलब है कि इस साल मई की शुरुआत में Apple, Google और Microsoft ने यूजर्स के लिए एक सामान्य पासवर्ड रहित साइन-इन विकल्प की पेशकश करने की घोषणा की थी. इसे वर्ल्ड वाइड वेब कंसोर्टियम (W3C) और FIDO एलायंस द्वारा डेवलप ‘पासकी’ कहा जाता है. सर्च दिग्गज अब इसे हकीकत बना रहा है. हालांकि, यह सुविधा वर्तमान में केवल डेवलपर्स के लिए उपलब्ध है और Google इस वर्ष के अंत में रेगूलर यूजर्स को पासकी सुविधा प्रदान करने की योजना बना रही है.

किसी भी एंड्रॉयड डिवाइस पर बन सकती है पासकी
टेक दिग्गज का कहना है कि किसी भी एंड्रॉयड डिवाइस पर पासकी बनाई जा सकती है और उसका इस्तेमाल भी किया जा सकता है. इसके लिए क्लाउड- सर्विस का बैकअप लेना आवश्यक है, क्योंकि जब कोई यूजर किसी पुराने डिवाइस से डेटा ट्रांसफर करके एक नया एंड्रॉइड डिवाइस सेट करता है, तो Google के अनुसार मौजूदा एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पासकी सुरक्षित रूप से नए डिवाइस में ट्रांसफर हो जाएगी.

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गूगल अकाउंट से बन सकती है पासकी
गूगल का कहना है कि यूजर्स केवल गूगल अकाउंट की मदद से एक आसान प्रक्रिया को पूरा करके अपनी रजिस्टर्ड फिंगरप्रिंट या फेस अनलॉक को प्रमाणित करके अपने एंड्रॉयड डिवाइस पर आसानी से पासकी बना सकेंगे. पासकी एक क्रिप्टोग्राफिक प्राइवेट पासकी है. ज्यादातर मामलों में यह प्राइवेट कुंजी केवल यूजर्स के अपने डिवाइसों, जैसे लैपटॉप या मोबाइल फोन पर ही रहती है.

एक ही डिवाइस में आ सकती है पासकी
गूगल का कहना है कि जब कोई पासकी बनाई जाती है, तो ऑनलाइन सर्विस द्वारा केवल उसकी संबंधित पब्लिक पासकी स्टोर की जाती है. लॉगिन के दौरान सर्विस प्राइवेट पासकी सिग्नेचर वेरीफाई करने के लिए पब्लिक पासकी का उपयोग करती है, यह केवल यूजर्स के किसी एक डिवाइस से आ सकती है.

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