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सरकार का फैसला- AGR नहीं चुकाने वाली कंपनियों के खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं

भाषा
Updated: January 24, 2020, 7:38 PM IST
सरकार का फैसला- AGR नहीं चुकाने वाली कंपनियों के खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने भारती एयरटेल (Bharti Airtel) और वोडाफोन (Vodafone) आइडिया (Idea) को 88,264 करोड़ रुपये का पिछला एजीआर (AGR) का बकाया 23 जनवरी तक की चुकाने की समयसीमा दी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने भारती एयरटेल (Bharti Airtel) और वोडाफोन (Vodafone) आइडिया (Idea) को 88,264 करोड़ रुपये का पिछला एजीआर (AGR) का बकाया 23 जनवरी तक की चुकाने की समयसीमा दी थी.

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नयी दिल्ली: दूरसंचार विभाग ने समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के वैधानिक बकाए का तय समयसीमा के भीतर भुगतान नहीं करने वाली दूरसंचार कंपनियों के खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं करने का बुधवार को फैसला किया. कंपनियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में भुगतान समय सीमा बढ़ाने को लेकर दायर याचिका को देखते हुये विभाग ने यह निर्णय किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को 88,264 करोड़ रुपये का पिछला एजीआर का बकाया 23 जनवरी तक की चुकाने की समयसीमा दी थी. यह समयसीमा गुरुवार को समाप्त हो गयी. कोर्ट ने 24 अक्टूबर के अपने आदेश में दूरसंचार कंपनियों की कुल इनकम में उनकी दूरसंचार के अलावा दूसरी इनकम को भी काउंट करने के सरकार के पक्ष को सही ठहराया था. कोर्ट ने कंपनियों को ऐसी आय पर भी शुल्क एवं कर चुकाने का आदेश दिया.

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने बकाये के भुगतान नहीं किये वहीं अरबपति मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस जियो ने बकाये की मद में 195 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया. इस बीच, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि गेल, ऑयल इंडिया और पावर ग्रिड जैसे सरकारी क्षेत्र के गैर-दूरसंचार उपक्रमों पर एजीआर की मद में कोई बकाया नहीं बनता है. दूरसंचार विभाग द्वारा इन कंपनियों से एजीआर के तहत तीन लाख करोड़ रुपये बकाये की मांग करना वास्तव में ‘चीजों को समझने में गलतफहमी’ हो सकती है.

सुप्रीम कोर्ट में एजीआर को लेकर चले मामले में ऑयल इंडिया लि., पावर ग्रिड और गेल शामिल नहीं थीं. हालांकि, इन कंपनियों ने अब दूरसंचार विभाग का नोटिस मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट में स्पष्टीकरण दिये जाने को लेकर याचिका दायर की हैं. कोर्ट के 24 अक्टूबर के आदेश के बाद दूरसंचार विभाग ने भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और 13 अन्य दूरसंचार कंपनियों से 1.47 लाख करोड़ रुपये की मांग की. इसी तरह, उसने गेल इंडिया से 1.72 लाख करोड़ रुपये, ऑयल इंडिया से 48,000 करोड़ रुपये, पावर ग्रिड से 40,000 करोड़ रुपये, गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर्स से 15,019 करोड़ रुपये और रेलटेल जैसी कुछ अन्य कंपनियों से बकाया भुगतान करने को कहा है.

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि दूरसंचार विभाग के लाइसेंसिंग फाइनेंस पॉलिसी इकाई के निदेशक ने संबंधित विभागों को यह निर्देश दिया है कि अगर दूरसंचार कंपनियां सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक समायोजित सकल आय के बकाये का भुगतान तय समयसीमा में नहीं करती हैं, तो उनके खिलाफ अगले आदेश तक कोई कार्रवाई नहीं की जाए.'

शीर्ष अदालत के 24 अक्टूबर के फैसले को लेकर भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया द्वारा दायर की गई पुनरीक्षा याचिका को कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है. उसके बाद कंपनियों ने भुगतान की समयसीमा बढ़ाने को लेकर याचिका दायर की है. दोनों कंपनियों ने विभाग से कहा कि वे समयसीमा के भीतर बकाये का भुगतान नहीं करेंगी और इस संदर्भ में कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगी. समयसीमा बढ़ाने संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अगले सप्ताह सुनवाई होगी.

दूरसंचार विभाग ने गैर-दूरसंचार कंपनियों से बकाया भुगतान मांग उनके आप्टिकल फाइबर नेटवर्क पट्टे पर देने को लेकर की है. ये आप्टिकल फाइबल एनएलडी (नेशनल लांग डिस्टेंस सर्विस) लाइसेंस के तहत उनके अंदरूनी कम्युनिकेशन के लिए है.

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First published: January 24, 2020, 7:32 PM IST
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