आपकी मोबाइल सिम क्लोन करके ऐसे पैसे चुरा रहे हैकर्स

ऐसे स्कैम में हैकर्स आपके मोबाइल सिम की कॉपी बनाकर धोखाधड़ी करते हैं.

News18Hindi
Updated: November 23, 2018, 8:10 PM IST
आपकी मोबाइल सिम क्लोन करके ऐसे पैसे चुरा रहे हैकर्स
हैकर्स, टेलीकॉम कंपनियों के एग्जिक्यूटिव्स के बहाने लोगों से डिटेल्स हासिल कर लेते हैं.
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Updated: November 23, 2018, 8:10 PM IST
धोखाधड़ी करने वालों ने पिछले एक साल में एक नया मोबाइल स्कैम किया है. यह स्कैम है SIM स्वैप. यानी, इस स्कैम में हैकर्स आपके मोबाइल सिम की कॉपी बनाकर धोखाधड़ी करते हैं. ये हैकर्स टेलीकॉम कंपनियों के बहाने आम लोगों से उनके डिटेल्स हासिल कर लेते हैं और उस सूचना का इस्तेमाल उनके सिम को कॉपी करने में करते हैं. यानी, हासिल की गई सूचना के आधार पर डुप्लीकेट सिम तैयार कर लेते हैं और यूजर को पैसों की चपत लगा देते हैं.

भारत में तेजी से बढ़ रही ऐसी धोखाधड़ी
सिम कॉपी करके धोखाधड़ी करने की शुरुआत करीब 5 साल पहले यूरोप में हुई, लेकिन अब ये भारत में तेजी से बढ़ रहा है. दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में SIM स्वैप करके धोखाधड़ी किए जाने से जुड़े ढ़ेरों मामले दर्ज किए गए हैं. कुछ दिनों पहले ही सिम स्वैप के एक मामले में एक व्यक्ति को 93.5 लाख रुपये की चपत लगी है.

धोखाधड़ी करने वाले ऐसे क्लोन करते हैं SIM कार्ड

सबसे पहले ये फर्जी ई-मेल्स से आपको निशाना बनाते हैं और आपको नेट बैंकिंग अकाउंट से जुड़े डिटेल्स हासिल कर लेते हैं. धोखाधड़ी करने वाले इन लोगों को इसके बाद आपके मोबाइल नंबर की जरूरत होती है. आपके बैंक अकाउंट से पैसा ट्रांसफर करने या शॉपिंग करने के लिए मोबाइल नंबर जरूरी होता है. इसके लिए, ये लोग टेलीकॉम कंपनी का एग्जिक्यूटिव बनकर आपको फोन करते हैं.

इस फोन कॉल में ये लोग SIM स्वैप करने के लिए जरूरी जानकारी हासिल कर लेते हैं. इसके बाद, स्कैमर्स (धोखाधड़ी करने वाले लोग) बेहतर इंटरनेट स्पीड या ज्यादा डेटा के लिए SIM अपग्रेड कराने के लिए कहते हैं. अगर आप इसमें दिलचस्पी दिखाते हैं तो वो आपका आधार नंबर और 20 अंकों वाला सिम कार्ड नंबर मांगते हैं. कुछ देर बाद वो आपको बताते हैं कि आपके पास टेक्स्ट मैसेज आएगा, जिसमें आपको ऑफर एक्टिवेट करने के लिए 1 दबाना है.

डुप्लीकेट सिम एक्टिवेट होते ही बंद हो जाती है ओरिजनल सिम
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इतना करके स्कैमर आपके नंबर के लिए ऑफिशियल SIM स्वैप की रिक्वेस्ट भेज देते हैं. टेलीकॉम कंपनियां यूजर्स को फोन खोने या बड़ी से नैनो SIM में स्विच करने की स्थिति में स्वैप की सहूलियत देती हैं. टेलीकॉम कंपनियों के पास रिक्वेस्ट पहुंचने के 3-4 घंटे में उस नंबर की सिम एक्टिवेट हो जाती है, जिससे स्कैमर के पास आपके OTP समेत बैंक अकाउंट का डिटेल पहुंच जाता है और इन सारी इंफॉर्मेशन के साथ वो आपको बड़ी चपत लगा देता है. स्कैमर आपके बैंक खाते से पैसा ट्रांसफर करने के साथ, ऑनलाइन शॉपिंग या आपके सोशल मीडिया अकाउंट में सेंधमारी कर सकते हैं. ध्यान रखें कि डुप्लीकेट सिम के एक्टिवेट होते ही, ओरिजनल सिम बंद हो जाती है.
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