सावधान! आपको हार्ट अटैक तक करवा सकते हैं हैकर्स, MRI रिपोर्ट भी कर सकते हैं गड़बड़ी

साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज हैकर्स इतने सक्षम हो गए हैं कि किसी मेडिकल डिवाइस को भी हैक कर यूज़र का नुकसान पहुंचा सकते हैं.

News18Hindi
Updated: July 14, 2019, 11:56 AM IST
सावधान! आपको हार्ट अटैक तक करवा सकते हैं हैकर्स, MRI रिपोर्ट भी कर सकते हैं गड़बड़ी
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Updated: July 14, 2019, 11:56 AM IST
सोशल मीडिया अकाउंट हैक होने की खबरों के बाद स्मार्ट TV तक के हैक होने की खबर लोगों के लिए चौंकाने वाली रही. पिछले हफ्ते गुजरात के सूरत में स्मार्ट टीवी हैक करने के दो मामले सामने आए हैं. हैकर ने स्मार्ट टीवी हैक करके बैडरूम के निजी पलों को कैद कर लिया और फिर उन्हें इंटरनेट पर अपलोड कर दिया. जांचकर्ताओं ने वीडियो देखने के बाद साइबर एक्सपर्ट की मदद ली. इसके बाद साइबर एक्सपर्ट ने वीडियो को इंटरनेट से डिलीट किया. इससे ये तो साबित हो गया कि सिर्फ Smart Device ही नहीं  ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ (IoT)  को भी आसानी से हैक किया जा सकता है.

क्या है IoT?


स्मार्ट टीवी को इंटरनेट से कनेक्ट करना या किसी स्मार्ट डिवाइस को अपनी आवाज की मदद से कंट्रोल करने की टेक्नोलॉजी को इंटरनेट ऑफ थिंग्स कहते हैं. इसका उदाहरण है Google Assistant और Siri.

IoT एनालिटिक्स के मुताबिक मौजूदा समय में दुनियाभर में 8.3 अरब आईओटी डिवाइस हैं जो 2021 तक बढ़कर 11.6 अरब हो जाएंगी. 2018 में 7 अरब आईओटी डिवाइसेज थीं. इन डिवाइसेज में आईओटी शामिल हैं, इनमें स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप और फिक्स्ड लाइन फोन शामिल नहीं हैं. मैकिंसे ग्लोबल इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक इस समय दुनियाभर में हर सेकंड 127 नई आईओटी डिवाइस इंटरनेट से कनेक्ट होती है.



साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज हैकर्स इतने सक्षम हो गए हैं कि किसी मेडिकल डिवाइस को भी हैक कर यूज़र का नुकसान पहुंचा सकते हैं. ब्रिटेन की रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग ने पिछले साल एक रिपोर्ट जारी कर बताया था कि MRI स्कैनर, पेसमेकर जैसे कनेक्टेड हेल्थ डिवाइसेज को हैक किया जा सकता है और हैकर चाहें तो इस तरह से मरीजों की सेहत को भारी नुकसान भी पहुंचा सकते हैं.


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वैज्ञानिकों का मानना है कि हैकर्स इन डिवाइस के सॉफ्टवेयर को हैक करके आपकी शारीरिक सूचना और कमजोरियों का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं.  रिपोर्ट में कहा गया है ऐसे कनेक्टेड सिस्टम पर साइबर हमलों के साथ ही प्राकृतिक आपदा या डिवाइस के फेल होने का भी खतरा बना रहता है. मेडिकल डिवाइस के फेल होने का सीधा मतलब है मरीज़ों को नुकसान. आसानी से समझा जाए तो अगर किसी मरीज़ को पेसमेकर लगा है, तो हैकर्स दिल की धड़कन रोक सकते हैं. साथ ही हैक करने से इन डिवाइस की बैटरी जल्दी खत्म होती है और व्यक्ति की जान को खतरा हो सकता है.
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