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एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन होने के बावजूद इन तरीकों से लीक होती है वॉट्सऐप चैट!

एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन होने के बावजूद इन तरीकों से लीक होती है वॉट्सऐप चैट!

एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड होने के बावजूद वॉट्सऐप की चैट्स लीक हो जाती हैं.

एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड होने के बावजूद वॉट्सऐप की चैट्स लीक हो जाती हैं.

एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड होने के बावजूद वॉट्सऐप की चैट्स लीक हो जाती हैं. इससे ये साफ होता है कि ऐसा कोई पिछला दरवाजा है या हैक का तरीका है, जिससे की कोई किसी दूसरे की चैट लीक कर सकता है.

    नई दिल्ली. फेसबुक की कंपनी, दुनियाभर में मैसेज भेजने और बात करने (वीडियो और ऑडियो) के लिए सबसे सुगम एप के रूप में चर्चित है, वॉट्सऐप. जिसको लेकर दावा है कि उसकी बात एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड होती है. बावजूद इसके इस सेवा के जरिए भेजे जाने वाले संदेश नियमित रूप से लीक होते हैं. जो कंपनी के इस दावे को खोखला साबित करती है कि कंपनी अपने 200 करोड़ उपयोगकर्ताओं की बातचीत को निजी रखने के लिए एक अभेद सुरक्षा कवच का इस्तेमाल करती है. इससे ये भी साफ होता है कि ऐसा कोई पिछला दरवाजा है या हैक का तरीका है, जिसकी मदद से संदेश भेजने वाले और उसे प्राप्त करने वाले के अलावा भी कोई उसमें घुसपैठ कर सकता है. क्या है वो तरीका, क्यों आपको जानना ज़रूरी है.
    एन्क्रिप्शन होता क्या है

    वॉट्सऐप अपने उपयोगकर्ताओं को हमेशा सुनिश्चित कराता रहा है कि उसकी सेवाओं का इस्तेमाल करके भेजी जाने वाली तस्वीर, वीडियो, संदेश, डॉक्यूमेंट और कॉल पूरी तरह से सुरक्षित रहते हैं. उनका किसी भी गलत हाथ में जाने का सवाल नहीं खड़ा होता है, क्योंकि वो इसकी सुरक्षा के लिए एंड टू एंड एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल करते हैं.

    वॉट्सऐप ने अपने श्वेत पत्र में एंड टू एंड को परिभाषित करते हुए कहा है कि संचार के तौर पर एंड टू एंड एन्क्रिप्शन संदेश भेजने वाले की डिवाईस और उसे प्राप्त करने वाले की डिवाइस से एन्क्रिप्टेड रहता है. इसका मतलब ये हुआ कि कोई भी थर्ड पार्टी (अन्य व्यक्ति) चाहे फिर वो वॉट्सऐप या उसकी कंपनी फैसबुक ही क्यों ना हो, कोई भी दोनों की बीच में हस्तक्षेप नहीं कर सकते है.

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    वॉट्सऐप के मुताबिक बातचीत को जो प्रवाह बहता है उसके लिए सिग्नल एन्क्रिप्शन प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किया जाता है. जिसे एक सुरक्षित ताले की तरह माना जा सकता है. जिसकी चाभी सिर्फ संदेश भेजने वाले और उसे प्राप्त करने वाले के पास होती है. खास बात ये है कि ये एन्क्रिप्शन खुद ब खुद चालू हो जाता है, इसे सक्रिय करने के लिए किसी सेटिंग की याह अपने संदेशों को सुरक्षित रखने के लिए कोई गुप्त चैट जैसा कोई तरीका अख्तियार नहीं करना पड़ता है. सिग्नल एन्क्रिप्शन का यह तरीका क्रिप्टोग्राफिक प्रोटोकॉल है, जिसे 2013 में ओपन व्हिसपर सिस्टम ने विकसित किया था.

    हालांकि वॉट्सऐप इसे लेकर एक बात साफ करता है कि भेजने वाले के पास मौजूद डिवाइस और संदेश को प्राप्त करने वाले के पास मौजूद डिवाइस का संदेश भेजने के दौरान उनके नियंत्रण में रहना एंड टू एंड एन्क्रिप्शन के तहत आता है लेकिन अगर प्राप्तकर्ता अपने छोर पर संदेशों को प्रंबधित करने के लिए किसी विक्रेता का इस्तेमाल करता है तो इसे एंड टू एंड एन्क्रिप्शन की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है.

    बातचीत लीक कैसे होती है
    आमतौर पर वॉट्सऐप के संदेशों की लीक का मतलब बातचीत के स्क्रीनशॉट से ज्यादा कुछ नहीं होता है, जो प्राप्तकर्ता या किसी और के जरिए उसके फोन से साझा किया गया है. यहां वॉट्सऐप अपनी निजता नीति के उपशीर्षक जिसे थर्ड पार्टी इन्फोर्मेशन कहा गया है, उसमें बताता है कि आपको ये बात ध्यान में रखना चाहिए कि कोई भी उपयोगकर्ता आपके संदेश या बातचीत का स्क्रीनशॉट ले सकता है, या आपके कॉल की रिकॉर्डिंग कर सकता हैऔर इसे वॉटसएप के जरिये किसी और को भेज सकता है या किसी दूसरे प्लेटफार्म पर पोस्ट कर सकता है.

    फोन की क्लोनिंग करके भी संभव
    हाल ही में रिया चक्रबर्ती और आर्यन खान के मामले में भारतीय कानून प्रवर्तन अधिकारी उनके फोन के जरिए ही दूसरे के साथ हुई बातचीत तक पहुंच बना सके थे. यहां लीक दरअसल जांचकर्ताओं को अपना फोन सौंपना था, जिसके बाद जांचकर्ता उनके फोन में मिटा दी गई बातचीत को भी दोबारा संग्रहित करके उसे देखने में सक्षम थे. लेकिन यहां एक तकनीकी पिछला दरवाजा भी है जिसके जरिए निजी वॉट्सऐप की बातचीत तक पहुंचा जा सकता है. ऐसा फोन की क्लोनिंग करके किया जा सकता है, जैसा कि नाम से ही जाहिर है, इस माध्यम में किसी भी फोन की हुबहू नकल तैयार करके यानी उसकी क्लोनिंग करके उस फोन में मौजूद तमाम सामग्री को कॉपी किया जा सकता है.

    फिर फोन में गुप्त रूप से एक स्पायवेयर भी डाला (इन्स्टॉल) जा सकता है, जिसके माध्यम कथित फोन से जुड़ी तमाम गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सकती है. पैगासन स्पायवेयर जिसे इजराइली कंपनी ने विकसित किया है जो वॉट्सऐप की बातचीत तक पहुंच बना सकता है.

    लेकिन वॉट्सऐप की बातचीत तक पहुंच बनाने का सबसे आम तरीका क्लाउड में वॉट्सऐप स्टोर में बातचीत के बैकअप के जरिए होता है. अब वॉट्सऐप खुद क्लाउड स्टोरेज और संदेशो का बैकअप जो थर्ड पार्टी (तीसरे पक्ष) जैसे गूगल ड्राइव या आइ क्लाउड के साथ हो, उपलब्ध नहीं कराता है. क्लाउड में मौजूद स्टोरेज एन्क्रिप्टेड नहीं होता है. और अगर उपयोगकर्ता का क्लाउड स्टोरेज हैक हो जाता है तो उसकी बातचीत के बैक अप तक पहुंचा जा सकता है. हालांकि सितंबर में फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने कहा है कि वॉट्सएप में एक और सुरक्षा की परत जोड़ी जा रही है जो गूगल ड्राइव या आई क्लाउड को बैकअप के तौर पर चुनने वाले लोगों को एंड टू एंड एन्क्रिप्शन का विकल्प प्रदान करेगा.

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    क्या ऐसा कोई डेटा है जिस तक वॉट्सऐप की पहुंच हो
    इस मुद्दे को लेकर कानून प्रवर्तन एजेंसियो और वॉट्सऐप के बीच लगातार खींचतान चलती रहती है. एक तरफ जहां एंजेसियों का कहना है कि इससे मामलों की जांच में आसानी होती है और अपराध पर वक्त रहते लगाम लगाई जा सकती है और उसे नियंत्रित किया जा सकता है, वहीं वॉट्सऐप का मानना है कि यह उपयोगकर्ताओं की निजता और सुरक्षा के साथ समझौता होगा .

    ये बात सही है कि वॉट्सऐप संदेश के डिलीवर हो जाने का बाद या उसका किसी तरह का कोई ट्रांजेक्शन लॉग का संग्रहण नहीं करता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वॉट्सऐप अपने उपयोगकर्ताओं के संदेश तक पहुंच नहीं सकता है. उनकी निजता नीति के मुताबिक, अगर इस बात को भरोसा होता है कि ये निहायत ज़रूरी है तो उपयोगकर्ता की जानकारी को संग्रहित, उपयोग, सुरक्षित या साझा किया जा सकता है. ऐसा हालात जिसमें ये बात लागू हो सकती है (अ) उपयोगकर्ता को सुरक्षित रखने हेतु (ब) जांच और किसी गैरकानूनी गतिविधि पर रोक लगाने के लिए ( स) कानूनी प्रक्रिया के प्रतिक्रिया के तौर पर या शासकीय प्रार्थना पर (द) हमारी नियम और नीतिया लागूं करने के लिए. इसके साथ ही इसमें इस बात की जानकारी भी शामिल हो सकती है कि कुछ उपयोगकर्ता हमारी सेवा के जरिए दूसरों से किस तरह से मेलजोल स्थापित करते हैं.

    सिंतबर में प्रो पब्लिका की एक रिपोर्ट में वॉट्सऐप की गोपनीय नीति पर सवाल खड़ा किया है. रिपोर्ट बताती है कि कंपनी के करीब 1000 लोगों का कार्यालय टेक्सास, सिंगापुर और ड़बलिन में है, जिनका काम उपयोगकर्ताओं के उन संदेशों की समीक्षी करना है जिसे उपयोगकर्ता ने फ्लेग (सवाल खड़ा किया है) किया है. यही नहीं कंपनी अपनी गोपनीय नीति में यह बताती है कि जब कोई रिपोर्ट दर्ज की जाती है तो वो हम रिपोर्ट करने वाले और जिसके खिलाफ रिपोर्ट हुई है दोनों की जानकारी एकत्र करते हैं.

    रिपोर्ट में मेटाडाटा के बारे में भी जिक्र किया गया है जो वॉट्सऐप एकत्रित करता है, और यहब एन्क्रिपशन के अधीन नहीं होता है. लेकिन फिर भी इसमें उपयोगकर्ता से जुड़ी कई जानकारियों जैसे जगह, फोन नंबर आदि रहता है. वह इस तरह का मेटाडाटा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुरोध पर उनके साथ साझा भी करता है.

    Tags: Whatsapp, WhatsApp Features, Whatsapp Privacy Policy

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