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    लॉकडाउन में WhatsApp से हुई सबसे ज्यादा Online Class, 50 फीसदी से ज्यादा को नहीं मिली शैक्षिक सामग्री

    इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप
    इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप

    एएसईआर (ASER) के एक सर्वे के अनुसार ऑनलाइन पढ़ाई के लिए इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप (Whastapp) का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 29, 2020, 4:47 PM IST
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    नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Corona virus) की वजह से लगे लंबी अवधि के लॉकडाउन (Lockdown) के कारण छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य के लिहाज से सरकार ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया था. स्थिति और दयनीय होते देख और बच्चों की पढ़ाई के नुकसान के मद्देनजर ऑनलाइन शिक्षा (Online Education) पर जोर दिया गया. एक सर्वे के अनुसार ऑनलाइन पढ़ाई के लिए इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप (Whastapp) का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया. ऑनलाइन शिक्षा के दौरान 66 फीसदी बच्चों को शैक्षिक सामग्री तक नहीं पहुंची.

    एक तिहाई बच्चों को मिली शैक्षिक सामग्री
    यह सर्वे एएसईआर (Annual State of Education Report) ने फोन से किया है. पहली बार है जब इस संस्था ने कोई सर्वे फोन से किया है. सर्वे के मुताबिक, ऑनलाइन पढ़ाई के लिए नामांकित बच्चों में से केवल एक तिहाई बच्चों को ही शैक्षिक सामग्री और गतिविधियों से जोड़ा गया. सर्व में आगे खुलासा किया गाय कि सरकारी और निजी स्कूलों में बच्चों को शैक्षिक सामग्री भेजने के लिए व्हाट्सऐप को सबसे अधिक इस्तेमाल में लाया गया.

    निजी स्कूलों ने भेजी सामग्री
    यह सर्वे इस बात पर केंद्रित था कि सितंबर तक ऑनलाइन शिक्षा के 6 महीनों के दौरान क्या बच्चों को शैक्षिक सामग्री जैसे टेक्स्टबुक, वर्कशीट, वीडियो और रिकॉर्डिंग लेक्चर्स पहुंचाए गए या नहीं. एएसईआर ने बताया कि सरकारी स्कूलों की तुलना में निजी स्कूलों में शैक्षिक सामग्री नियत समय से पहुंचाई गई. रिपोर्ट में आगे बताया कि ऑनलाइन शिक्षा के लिए निजी स्कूलों में 87.2 फीसदी और सरकारी स्कूलों में 67.3 फीसदी व्हाट्सऐप के माध्यम से पढ़ाई कराई गई.



    स्मार्टफोन न होने के कारण वंचित रहा कमजोर वर्ग
    वहीं, सर्वे में कुछ ऐसे राज्य भी सामने आए जहां कुल छात्रों के चौथाई हिस्सों को ऐसी कोई शैक्षिक सामग्री नहीं पहुंचाई गई है. इसमें राजस्थान (21.5 फीसदी), उत्तर प्रदेश (21 फीसदी) और बिहार शामिल है. सर्वे में यह भी पाया गया कि जिन कमजोर वर्गो के पास स्मार्टफोन जैसी सुविधा नहीं थी उनके बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई से वंचित रहे. रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी स्कूलों के 31.8 फीसदी बच्चों को व्यक्तिगत रूप से फोन कर शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराई गई. वहीं, निजी स्कूल में यह आंकड़ा 11.5 फीसदी का है.

    यह है ऑलऑवर आंकड़ा
    सर्वे के मुताबिक, तकरीबन 68 फीसदी सरकारी और निजी स्कूलों ने शैक्षिक सामग्री नहीं भेजी. 11 फीसदी के लिए इंटेरनेट सुविधा न होने के कारण ऐसा नहीं हो सका, लगभग 24.3 फीसदी स्मार्टफोन की कमी के चलते ऑनलाइन पढ़ाई नहीं करा पाए, जबकि 5 फीसदी ने इंटरनेट क्नेक्टिविटी की समस्या का सामना किया. बता दें कि यह सर्वे देश के 26 राज्यों और चार केंद्र प्रशासित राज्यों में किया गया था. जिसमें 52,227 घरों से 5 से 16 साल की उम्र के 59,251 स्कूल छात्र और अध्यापक भी शामिल हैं. साथ ही प्राइमरी ग्रेड का दावा करने वाले 8,963 सरकारी स्कूलों के मुख्यालय भी इस सर्वे में शामिल थे.
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