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लॉकडाउन के बीच Work from Home कर रहे कर्मचारियों पर ऐसे नज़र रख रहे हैं Boss

News18Hindi
Updated: April 7, 2020, 8:35 AM IST
लॉकडाउन के बीच Work from Home कर रहे कर्मचारियों पर ऐसे नज़र रख रहे हैं Boss
Work from home के दौरान नज़र रख रहे हैं बॉस

भारतीय कंपनियां घर से काम कर रहे कर्मचारियों पर निगरानी के लिए कई डिजिटल (digital surveillance) तरीके अपना रही हैं.

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पूरे देश में लॉकडाउन (lockdown in india) चल रहा है और ऐसे में लोग अपने घर से काम यानी कि वर्क फ्रॉम होम (work from home) कर रहे हैं. इस परिस्थिति में भारतीय कंपनियां घर से काम कर रहे कर्मचारियों पर निगरानी के लिए कई डिजिटल (digital surveillance) तरीके अपना रही हैं. कंपनियां ऐसे सॉफ्टवेयर (software) का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे बॉस अपने कर्मचारी के वेब ब्राउज़िंग हिस्ट्री से लेकर कई जानकारी हासिल कर सकता है.

बॉस ये भी चेक कर सकता है कि कर्मचारी ने कौन सी ऐप डाउनलोड की है, साथ ये भी जानना मुमकिन है कि काम के दौरान कंप्यूटर कितनी देर एक्टिव नहीं रहा है.

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साइबर सिक्योरिटी फर्म्स ने TOI को बताया कि इस समय कॉरपोरेट कंपनियों की तरफ से सबसे ज़्यादा डिमांड ट्रैकिंग को इनेबल करने की हो रही है. इसमें सबसे ज़्यादा डिमांड मोबाइल डिवाइस मैनेजमेंट (MDM) है. ये प्री-बिल्ट ट्रैकिंग मेकैनिज़म है, जो कि हर लैपटॉप और फोन पर पहले से मौजूद रहता है. इस टूल से मैनेजर डेटा रीड, स्क्रीन टेकओवर, रिमोट-वाइप सेंसिटिव इन्फॉर्मेशन एक्सेस कर सकते हैं.



40 देशों में 148 क्लाइंट वाली साइबर सिक्योरिटी फर्म InfySec के CEO Vinod Senthil ने बताया कि पहले ऐसे टूल की रिक्वेस्ट सिर्फ बैंक और फाइनेंशियल सेक्टर से आती थी, लेकिन अब इसकी डिमांड बाकी कंपनियां भी कर रही हैं.


कई साइबर सिक्योरिटी ने बताया कि पिछले महीने में Crossover, Qumram, Teramind, Destrack, WorkAnalytics, iMonitorSoft जैसे सॉफ्टवेयर की डिमांड काफी बढ़ गई है.

रिपोर्ट में बताया गया कि कंपनियां कर्मचारियों से काम के दौरान वेब कैमरा ऑन किए रहने के लिए कह रही है. जहां इसे लेकर कुछ कर्मचारियों ने उनकी प्राइवेसी पर खतरा बताया है, वहीं डिजिटल कार्यकर्ता ने कहा कि ये कानूनी रूप से ग्रे एरिया है.

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इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन के मेंबर Devdutta Mukhopadhyay ने कहा कि भारत में कोई व्यापक डेटा गोपनीयता कानून नहीं है. यहां IT Act और SDPI (Sensitive Personal Data or Information) रूल्स हैं, जो बायोमेट्रिक जैसे कॉरपोरेट प्रशासन के कुछ पहलुओं पर नज़र रखते हैं, लेकिन इसमें रियल-टाइम वीडियो सर्विलेंस (निगरानी) के बारे में कुछ नहीं कहा गया है. व्हाइट कॉलर वाले वर्कर्स (प्रोफेशनल, एडिमिनिस्ट्रेशन, मैनेजेर) को ये सब कोविड-19 के समय एक्सपीरिएंस करना पड़ रहा है.

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First published: April 7, 2020, 7:22 AM IST
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