Chandrayaan 2: आज चांद को चूमेगा चंद्रयान, जानें लैंडर 'विक्रम' और रोवर 'प्रज्ञान' का क्या है काम

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Updated: September 6, 2019, 4:39 PM IST
Chandrayaan 2: आज चांद को चूमेगा चंद्रयान, जानें लैंडर 'विक्रम' और रोवर 'प्रज्ञान' का क्या है काम
चंद्रयान-2 चांद के साउथ पोल पर लैंड करेगा. अभी तक इस जगह पर कोई भी देश नहीं पहुंचा है

चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचकर उस सतह के संबंध में अध्ययन करना है. वैज्ञानिकों के मुताबिक चंद्रमा की इस सतह पर बर्फ और धूप काफी मात्रा में है. माना जा रहा है कि भविष्य में मंगल मिशन के लिए इसका अध्ययन काफी मददगार साबित होगा.

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बेंगलुरु. चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2)  के चांद पर कदम रखने को लेकर उल्टी गिनती शुरू हो गई है. आज जैसे ही चंद्रयान-2 चांद की सतह पर लैंड करेगा भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा. अभी तक अमेरिका, रूस और चीन ने ही ऐसा कारनामा किया है. खास बात ये है कि चंद्रयान-2 चांद के साउथ पोल पर लैंड करेगा. अभी तक इस जगह पर कोई भी देश नहीं पहुंचा है. चांद के साउथ पोल पर स्पेसक्राफ्ट उतारने के बाद भारत ऐसा करने वाला पहला देश बन जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके देशवासियों से चंद्रयान-2 की लैंडिंग देखने की अपील की है. पीएम मोदी ने कहा- मैं खुद इसकी तस्वीरें ट्वीट करूंगा.

चंद्रयान-2 मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचकर उस सतह के संबंध में अध्ययन करना है. वैज्ञानिकों के मुताबिक चंद्रमा की इस सतह पर बर्फ और धूप काफी मात्रा में है. माना जा रहा है कि भविष्य में मंगल मिशन के लिए इसका अध्ययन काफी मददगार साबित होगा. आइए जानते हैं लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान के बारे में:-

>>‘विक्रम’ और उसके भीतर मौजूद रोवर ‘प्रज्ञान’ के सात सितंबर को देर रात 1 बज कर 30 मिनट से 2 बज कर 30 मिनट के बीच चंद्रमा के सतह पर उतरने की उम्मीद है.

>>चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद विक्रम से रोवर प्रज्ञान उसी दिन सुबह पांच बज कर 30 मिनट से छह बज कर 30 मिनट के बीच निकलेगा.

>>लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह पर रोवर प्रज्ञान को लॉन्च करेगा, जो सौर शक्ति से संचालित होगा. ये रोवर 6 पहियों पर चलेगा और 1 सेमी प्रति सेकंड की रफ्तार से बढ़ते हुए करीब 500 मीटर की दूरी तय करेगा.

>>रोवर सतह से जमा किए गए डेटा लैंडर को भेजेगा. लैंडर के ज़रिए ये डेटा इसरो के अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचेगा. रोवर प्रज्ञान चंद्रमा के एक दिन या पृथ्वी के हिसाब से 14 दिनों तक सक्रिय रहेगा.

>>एक चंद्र दिवस के बराबर चंद्रमा की सतह पर रहकर परीक्षण करेगा.
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>>चंद्रमा का एक दिन पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर है. लैंडर का भी मिशन जीवनकाल एक चंद्र दिवस ही होगा जबकि ऑर्बिटर एक साल तक काम करेगा.

>>लैंडर का नाम विक्रम रखा गया है. ये संस्कृत शब्द का अर्थ साहस और वीरता से जुड़ा है. विक्रम रखने के पीछे एक मकसद वैज्ञानिक विक्रम साराभाई को श्रद्धांजलि देना भी है.

>> प्रज्ञान का वजन 27 किलोग्राम है, ये 50W पावर से चलता है.

>>प्रज्ञान में लगे टेरेन मैपिंग कैमरा लगा है. इससे चांद के कई और रहस्यों का पता चल पाएगा.

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First published: September 6, 2019, 2:07 PM IST
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