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अब आप भी बन सकते हैं अन्तर्यामी, इरादा भांपने वाली तकनीक तैयार


Updated: November 4, 2019, 12:57 PM IST
अब आप भी बन सकते हैं अन्तर्यामी, इरादा भांपने वाली तकनीक तैयार
फेक न्यूज़ की असलियत उजागर करने वाले इस तरीके पर की गई शोध 'जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल एंड थियोरेटिकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' में प्रकाशित की गई है.

शोधकर्ता इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स (Artificial Intelligence) की मदद से कर सकत हैं. इसकी मदद से आप फेक न्यूज़ (Identify Fake News) को भी पकड़ सकते हैं जो आज के दौर में एक बड़ा खतरा बन चुका है.

  • Last Updated: November 4, 2019, 12:57 PM IST
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वॉशिंगटन. अपने जीवनकाल में आपने एक न एक बार यह तो जरुर सोचा होगा कि आपके बारे में दूसरे लोग क्या सोचते हैं (What others think of me). यह जानने का तरीका अगर आप को मिल जाए तो आप क्या करेंगे (How to know whats others are thinking). पहले ही आपको मालूम हो जाएगा कि जिससे आप बात करने वाले हैं वो आपके विषय में क्या सोचता है. ये भी मालूम हो सकता है कि आपसे जो बात कही जा रही है उसकी पीछे की मंशा क्या है (Intent not content). आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि शोधकर्ताओं (Researchers Discovery) ने ऐसा तरीका खोज निकालने का दावा किया है. शोधकर्ता इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स (Artificial Intelligence) की मदद से कर सकत हैं. इसकी मदद से आप फेक न्यूज़ (Identify Fake News) को भी पकड़ सकते हैं जो आज के दौर में एक बड़ा खतरा  बन चुका है.

फेक न्यूज़ की असलियत उजागर करने वाले इस तरीके पर की गई शोध 'जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल एंड थियोरेटिकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (Journal of Experimental and Theoretical Artificial Intelligence) में प्रकाशित की गई है. भ्रम फैलाने के लिए तो वैसे कई तरीके अपनाए जाते हैं. शोधकर्ताओं की माने तो भ्रम फैलाने के लिए इस्तेमाल किए गए संदेश से ज्यादा महत्वपूर्ण उसके पीछे का इरादा होता है.

उदाहरण के लिए संदेश देने वाले या बोलने वाले से गलती हो जाए तो उसे भ्रामक नहीं माना जाना चाहिए. हो सकता है कि संदेश देने वाले को सही जानकारी ही न हो या फिर वो खुद ही किसी धारणा से ग्रसित हो सकता है.

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अविष्कार की गई तकनीक का एल्गोरिथ्म ही किसी भ्रामक धोखे के पीछे का इरादा जानने का सबसे सटीक तरीका है.


डार्टमाउथ में थायर स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग (Thayer School of Engineering at Dartmouth) के प्रोफेसर और शोधकर्ता, यूजीन सैंटोस जूनियर ने कहा कि जानबूझकर श्रोताओं को गुमराह करना और गलती से ऐसा हो जाने में बहुत अंतर हैं. इसके खतरे भी बड़े हैं.

सैंटोस ने दावा किया कि उनकी अविष्कार की गई तकनीक का एल्गोरिथ्म ही किसी भ्रामक धोखे के पीछे का इरादा जानने का सबसे सटीक तरीका है. इसके जरिए यह भी पता लगाया जा सकता है कि आखिर कोई कृत्य कितना दुर्भावनापूर्ण हो सकता है.

सैंटोस का मानना ​​है कि "फेक न्यूज़" को बनाने में इस्तेमाल की गईं दलीलें या उसमें शामिल राय कितनी तार्किक है इसे पाठको को समझाना बेहद जरूरी है. आवश्यकता होने पर सच जानने की इस तकनीक को और विकसित किया जा सकता है.
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First published: November 4, 2019, 12:57 PM IST
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