भारत ने क्यों दे दिए चीन को 50,000 करोड़ रुपये

भारत ने क्यों दे दिए चीन को 50,000 करोड़ रुपये
चीन की कंपनियां कम कीमत पर हाई स्पेशिफिकेशंस वाले फोन लॉन्च कर रही हैं.

वित्त वर्ष 2018 में चीन की कंपनियों के मोबाइल खरीदने में खर्च की गई रकम पिछले साल खर्च किए गए पैसों से करीब दोगुने हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 30, 2018, 9:17 AM IST
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भारत में लोगों ने वित्त वर्ष 2018 में चीन के 4 ब्रांड्स के स्मार्टफोन खरीदने में 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2018 में चीन की कंपनियों के मोबाइल खरीदने में खर्च की गई रकम पिछले साल खर्च किए गए पैसों से करीब दोगुने हैं.

भारतीय मार्केट में बढ़ेगा चाइनीज कंपनियों का दबदबा
एक्सपर्ट और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि यह ट्रेंड लगातार मजबूत होगा, क्योंकि चाइनीज मोबाइल ब्रांड्स का भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में दबदबा मजबूत हो रहा है. शियोमी, विवो, ओपो और Honor समेत लेनोवो-मोटोरोला, OnePlus और Infinix जैसे दूसरे चाइनीज ब्रांड्स की भारतीय स्मार्टफोन मार्केट की टोटल सेल्स में आधी से ज्यादा हिस्सेदारी है.

सस्ती कीमत पर लॉन्च कर रहीं बेहतर स्पेशिफिकेशंस वाले फोन
चीन की मोबाइल फोन कंपनियां अपनी प्रतिस्पर्धी दक्षिण कोरियाई, जापानी और भारतीय कंपनियों के मुकाबले कम कीमत पर हाई स्पेशिफिकेशंस वाले फोन लॉन्च कर रही हैं. साथ ही, उन्होंने खुद को प्रतिष्ठित ग्लोबल ब्रांड्स के रूप में स्थापित भी किया है. इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि चीन के मोबाइल ब्रांड्स ने अहम प्राइस सेगमेंट में अपनी पैठ बना ली है. शियोमी ने 6,000-13,000 रुपये वाले बैंड में, ओपो और विवो ने 10,000-22,000 रुपये वाले बैंड में और Honor ने 8,000-12,000 रुपये वाले प्राइस बैंड में अपनी स्थिति मजबूत की है.



वित्त वर्ष 2018 के लिए रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) को की गई फाइलिंग के मुताबिक, ऑपरेशंस से शियोमी टेक्नोलॉजी का रेवेन्यू 22,947.3 करोड़ रुपये, ओपो मोबाइल्स इंडिया का 11,994.3 करोड़ रुपये, विवो मोबाइल इंडिया का 11,179.3 करोड़ रुपये और Huawei टेलीकम्युनिकेशंस इंडिया का मोबाइल बिजनेस 5,601.3 करोड़ रुपये का रहा है. इन चार मोबाइल कंपनियों की कंबाइंड सेल्स 51,722.1 करोड़ रुपये रही है, जो कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान 26,262.4 करोड़ रुपये थी.
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