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इंटरनेट पर हो रही आपकी जासूसी, ऐसे रहें सेफ

इंटरनेट पर हो रही आपकी जासूसी, ऐसे रहें सेफ

इंटरनेट और डिजिटल वर्ल्ड में हर वक्त आप पर निगरानी रखी जा रही है.

इंटरनेट और डिजिटल वर्ल्ड में हर वक्त आप पर निगरानी रखी जा रही है.

इंटरनेट और डिजिटल वर्ल्ड में हर वक्त आप पर निगरानी रखी जा रही है.

    इंटरनेट और डिजिटल वर्ल्ड में हर वक्त आप पर निगरानी रखी जा रही है. आपकी जासूसी हो रही है और आपको पता भी नहीं है. Google आपकी पूरी इंफोर्मेशन अपने पास रख रहा है. आपका स्मार्टफोन चुगलखोर हो गया है. लैपटॉप में लगा वेब कैम आपका सगा नहीं है. हैकर्स इसके जरिए आपकी गतिविधियों को रिकॉर्ड कर रहे हैं. आपका पसंदीदा फेसबुक भरोसेमंद नहीं है...

    दरअसल, टेक्नोलॉजी के साथ ही आपकी प्राइवेसी में सेंधमारी का जोखिम बढ़ गया है. टीवी से लेकर वैक्यूम क्लीनर तक हर स्मार्ट गैजेट आपके प्राइवेट डेटा कलेक्ट कर रहा है और हैकर्स इस डेटा तक अपनी पहुंच बना रहे हैं. आइये जानते हैं कैसे-कैसे हो रही है आपकी जासूसी....

    आपका राजदार है Google
    गूगल आपके बारे में बहुत कुछ जानता है. गूगल यूजर्स की एक्टिविटीज को ट्रैक करके पैसे बनाता है. सर्च इंजन के रेवेन्यू में ऐडवर्टाइजिंग की एक बड़ी हिस्सेदारी है. इसलिए आपकी Google सर्च, वॉयस सर्च, लोकेशन चेंजेज को गूगल ट्रैक और अपने पास स्टोर करता है.


    आपकी आवाज भी होती है रिकॉर्ड  
    आप अपने वॉयस सर्च में जो भी बोलते हैं, गूगल उसे लगातार रिकॉर्ड कर रहा है. एक यूजर के रूप में आप इन प्रत्येक रिकॉर्ड्स को ब्राउज करके सुन सकते हैं. Google का कहना है कि वह अपने लैंग्वेज और रेकग्निशन टूल्स को बेहतर बनाने के लिए वॉयस को रिकॉर्ड करता है ताकि आगे चलकर आपके सर्च रिजल्ट्स को और बेहतर बनाया जा सके.

    आपकी लोकेशन भी हो रही है ट्रैक
    आपके घर से निकलकर ऑफिस पहुंचने के सफर और हाईवे में आपकी कार कहां पर है, Google इसे भी लोकेट कर रहा है. मॉडर्न टेक्नोलॉजी का फायदा उठाने के लिए हमें अपनी प्राइवेसी से समझौता करना पड़ रहा है. Google Maps अनजाने सफर में हमारी राह आसान बनाता है. Google का हर वक्त आपको ट्रैक करना ठीक नहीं है.


    सेफ रहने के लिए उठाएं ये कदम
    अगर आप सेफ रहना चाहते हैं, और Google की लोकेशन ट्रैकिंग से बचना चाहते हैं तो आपको अपने डिवाइस के सेटिंग्स एप्लीकेशन को ओपन करना होगा. इसके बाद आप Privacy & Safety पर जाएं. यहां जाकर आप लोकेशन को टर्न ऑफ कर सकते हैं. ऐसा करने के बाद गूगल आपकी लोकेशन को ट्रैक नहीं कर पाएगा.

    ऐसे डिलीट करें वॉयस और वेब रिकॉर्ड्स
    Google के माय एक्टिविटी हिस्ट्री पेज पर जाएं. जहां आपको रिकॉर्डिंग की लंबी लिस्ट मिलेगी. यहां से आप स्पेशिफिक ऑडियो पेज पर जा सकते हैं, जहां आपको अब तक दी गई सभी वॉयस कमांड के डिटेल्स मिल जाएंगे. गूगल ने जून 2015 में ऑडियो रिकॉर्ड्स एक्सेसिंग फीचर लॉन्च किया था. गूगल में वेब रिकॉर्ड्स के लिए भी ऐसा ही पेज है. जहां आपको वह सब कुछ दिखेगा, जो कि आपने अब तक वेब में सर्च किया होगा. अपने वॉयस और वेब रिकॉर्डिंग को रोकने का सबसे बेहतर तरीका है कि आप इन फाइल्स को डिलीट कर दें. आप किसी भी रिकॉर्ड एंट्री पर दिए गए तीन डॉट्स पर क्लिक करके उसे डिलीट कर सकते हैं.

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    आपका एंड्रॉयड स्मार्टफोन चुगलखोर है?


    आपका एंड्रॉयड स्मार्टफोन आपको दे रहा है धोखा
    आपका एंड्रॉयड स्मार्टफोन चुगलखोर है? वो आपकी पल-पल की जानकारी गूगल तक पहुंचाता है. आप जो भी एक्टिविटी करते हैं गूगल को उसकी खबर होती है.

    सेंसर की आप पर रहती है नजर
    आप जो एंड्रॉयड स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं, उनमें सेंसर्स लगे होते हैं. ये सेंसर्स आप की निगरानी करते हैं और आपके खड़े होने से लेकर, डेस्क पर काम करने और घूमने-फिरने तक की जानकारी गूगल तक पहुंचाते हैं.
    आपके डिवाइस में यहां लगा रहता है सेंसर
    आपका एंड्रॉयड स्मार्टफोन गूगल को आपकी हर एक्टिविटी की परमिशन देता है. इसे 'एक्टिविटी रिकिग्निशन' कहते हैं. इसे लेकर पिछले हफ्ते रेडिट पर काफी चर्चा भी हुई है. यहां कई यूजर्स का कहना है कि इसमें कोई नई बात नहीं है, लेकिन बस यूजर्स को इसकी जानकारी नहीं होती है. खुद गूगल भी मानता है कि ये एक्टिविटी रिकिग्निशन API सेंसर्स एंड्रॉयड डिवाइस में टॉप पर लगा होता है.

    आप क्या कर रहे हैं गूगल जानता है
    डिवाइस में लगे ये सेंसर्स इस बात पर नजर रखते हैं कि यूजर्स कब क्या कर रहा है? इन मल्टीपल सेंसर से निकलने वाले सिगनल्स यूजर्स की एक्टिविटी को मॉनीटराइज करते हैं. ये एक्टिविटी रिकिग्निशन ऑटोमैटिक ही सेंसर के डाटा को पढ़कर यूजर्स की एक्टिविटी डिटेक्ट कर लेते हैं. यहां तक कि एक्टिविटी रिकिग्निश डेवलपर को ये भी बता देते हैं कि आपने फोन को कहां रखा है? आपका फोन मूव कर रहा है या चार्ज हो रहा है. यहां तक की यूजर्स फोन को जेब में रखकर दौड़ रहा है या फोन कार में रखा है. गूगल को हर बात की खबर रहती है.



    फेसबुक करता है जासूसी...
    फेसबुक हर यूजर को ब्राउजिंग के दौरान ट्रैक करता रहता है. जैसे ही आप इंटरनेट खोलते हैं, फेसबुक आपके सिस्टम में बनने वाली कुकीज के जरिए इस बात की निगरानी करने लगता है कि आप किस वेबसाइट पर जा रहे हैं? कहां क्लिक कर रहे हैं? और क्या तलाश रहे हैं?

    क्यों धोखा दे रहा है आपको फेसबुक?
    फेसबुक हर यूजर के सिस्टम में सेव हुई कुकीज फाइलों के जरिए उसकी रुचियों, जरूरतों का पता लगाता है, ये सब होता है यूजर की सर्च हिस्ट्री का पता लगाकर. इसके बाद फेसबुक इन प्रोडक्ट्स के विज्ञापन आपके सामने पेश करता है.कुल मिलाकर फेसबुक विज्ञापनदाताओं और विज्ञापन कंपनियों को अपने यूजर की डिमांड बेचता है.

    फेसबुक हर यूजर की निगरानी उसके सिस्टम में जमा कुकीज से करता है. ध्यान रखें,कुकीज फाइलें वह होती हैं जो किसी भी यूजर द्वारा पिछली बार की सर्च हिस्ट्री को बताती हैं.जैसे ही आप कंप्यूटर पर लॉग इन करते हैं तो फेसबुक का सोशल प्लग इन आपको डिटेक्ट करता है और आपकी कुकीज फाइलें फेसबुक को भेजता है.

    आपकी बातचीत भी सुनता है फेसबुक...
    यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा की मास कम्युनिकेशन की प्रोफेसर केली बर्न्स फेसबुक पर बातचीत सुनने का आरोप लगा चुकी हैं. वो अफ्रीकन सफारी जाना चाहती थीं और  जीप की सवारी का लुत्फ उठाने चाहती थी. केली ये बातें किसी से फोन पर कह रही थी तभी बातचीत खत्म होने के बाद उनके फेसबुक फीड की पहली स्टोरी सफारी के बारे में थी.

    हालांकि फेसबुक का कहना है कि वो अपने यूजर्स की किसी बातचीत को रिकॉर्ड नहीं करता है. बल्कि अपने ऐप के जरिए वो ये देखता है कि यूजर्स क्या सुन और देख रहे हैं ताकि स्टेट्स अपडेट करते वक्त सुझाव दे सके. हालांकि, फेसबुक ऐप की सेटिंग में बदलाव के जरिए इस फीचर को बंद किया जा सकता है. ये ऑप्शनल है.

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    Tags: Facebook, Google

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