ज़ुकरबर्ग को सीईओ पद से हटाना चाहते हैं फेसबुक इनवेस्टर्स

शेयरहोल्डर्स नहीं चाहते कि वह फेसबुक के चेयरमैन के तौर पर काम करें.

News18.com
Updated: June 7, 2019, 11:08 AM IST
ज़ुकरबर्ग को सीईओ पद से हटाना चाहते हैं फेसबुक इनवेस्टर्स
फेसबुक के शेयरहोल्डर्स ने मार्क जुकरबर्ग के खिलाफ की वोटिंग
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Updated: June 7, 2019, 11:08 AM IST
(शौविक दास)

फेसबुक के चेयरमैन मार्क ज़ुकरबर्ग की अध्यक्षता, उनकी नीतियों को लेकर उठ रहे सवालों को पर इसके शेयर होल्डर्स ने निगेटिव वोटिंग की. मतलब शेयरहोल्डर्स नहीं चाहते कि वह फेसबुक के चेयरमैन के तौर पर काम करें. इस स्थिति में किसी और चेयरमैन को उनका पद छोड़ना पड़ता लेकिन ज़ुकरबर्ग ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि उनके और बोर्ड के दूसरे मेंबर्स के पास फेसबुक द्वारा ईश्यू किए गए टू-क्लास यानी बी-क्लास के शेयर्स हैं जिनका वोटिंग वेटेज ए-क्लास के वोटिंग शेयर्स से 10 गुना ज्यादा होता है. जबकि पब्लिक और फेसबुक के अधिकतर शेयरहोल्डर्स के पास क्लास-ए शेयर है जिसका वोटिंग वेटेज एक होता है.



कुल मिलाकर देखा जाए तो ज़ुकरबर्ग के पास एक तरह से पूरे अधिकार हैं. यहां तक कि अगर उनके खिलाफ पूरी मज़बूती के साथ भी वोट किया जाए तो भी वह उसे खारिज कर सकते हैं और उन्होंने यही किया.

क्या हुआ अभी तक?

फेसबुक के ऐनुअल जनरल मीटिंग (एजीएम) में ज़ुकरबर्ग के खिलाफ काफी विरोध किया गया. सामान्य यानी ए-क्लास वाले करीब 68 फीसदी शेयर होल्डर्स ने उनके चेयरमैन बने रहने का विरोध किया. शेयर होल्डर्स का मानना था कि स्वतंत्र रूप से अगर किसी को चेयरमैन बनाया जाता है जिसके प्रति ज़ुकरबर्ग की भी जवाबदेही हो, तो इससे इनवेस्टर्स के हित सुरक्षित रहेंगे.

लेकिन इस वक्त ज़ुकरबर्ग के पास कंपनी के 75 फीसदी बी-क्लास के शेयर्स हैं जिसकी वजह से उनके पास कंपनी का 60 फीसदी वोटिंग अधिकार है. इस स्थिति में अगर कंपनी का हर शेयर होल्डर भी किसी प्रस्ताव के खिलाफ वोट करता है तो भी ज़ुकरबर्ग के पक्ष में ही प्रस्ताव पास होगा.

क्या हो सकता है अब?
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अगर शेयर होल्डर्स इसी तरह से विरोध करते रहे तो यह कंपनी के लिए अच्छा नहीं होगा. मार्क ज़ुकरबर्ग अभी कुल 35 साल के हैं और वह फेसबुक जैसी बड़ी कंपनी के मालिक हैं. शायद इसीलिए उन्हें लगता है कि जिस कंपनी को उन्होने खुद बनाया है उसका मालिकाना हक और फैसले लेने के सारे अधिकार उन्हीं के पास होने चाहिए.

मौजूदा हालात में कंपनी के शेयर का एक बड़ा हिस्सा ज़ुकरबर्ग के पास होने के कारण उनके प्रभाव को कम नहीं किया जा सकता. आगे देखना होगा कि इस विरोध के बाद ज़ुकरबर्ग कंपनी के काम करने के तरीके में किसी तरह का बदलाव लाते हैं.

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