क्या ये फेसबुक छोड़ने का सही समय है?

ऑनेस्ट डेटा सर्वे के मुताबिक, उत्तरी अमेरिका के लोगों ने फेसबुक को समाज के लिए ख़तरनाक बताया है. सर्वे के मुताबिक फेसबुक उन तमाम कंपनियों में शामिल है जिसका समाज में रहने वाले लोगों पर खराब प्रभाव पड़ा है.

News18Hindi
Updated: March 21, 2018, 11:45 AM IST
क्या ये फेसबुक छोड़ने का सही समय है?
ऑनेस्ट डेटा सर्वे के मुताबिक, उत्तरी अमेरिका के लोगों ने फेसबुक को समाज के लिए ख़तरनाक बताया है. सर्वे के मुताबिक फेसबुक उन तमाम कंपनियों में शामिल है जिसका समाज में रहने वाले लोगों पर खराब प्रभाव पड़ा है.
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Updated: March 21, 2018, 11:45 AM IST
4 फरवरी 2004 के दिन दुनिया की सबसे लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक की शुरुआत हुई थी. 13 साल से भी कम वक्त में फेसबुक ने वो मुकाम हासिल कर लिया, जो दूसरे प्रतिद्वंदियों के लिए सिर्फ एक सपना भर है. लेकिन क्या लगातार उड़ान के बाद आज फेसबुक को अलविदा कहने का वक्त आ गया है.

ऑनेस्ट डेटा सर्वे के मुताबिक, उत्तरी अमेरिका के लोगों ने फेसबुक को समाज के लिए ख़तरनाक बताया है. सर्वे के मुताबिक फेसबुक उन तमाम कंपनियों में शामिल है जिसका समाज में रहने वाले लोगों पर खराब प्रभाव पड़ा है. साथ ही CEO मार्क ज़ुकरबर्ग ने बीते दिनों साफ किया था कि फेसबुक को इस्तेमाल करने वाले एक्टिव यूजर्स की तादाद घटी है. ऐसा अभी तक फेसबुक के इतिहास में पहली बार हुआ है. हाल ही के दिनों में फेसबुक को लेकर काफी नकारात्मक चर्चाएं हुईं हैं.



क्यों खराब है फेसबुक?

2000 अमेरिकियों ने सर्वे के ज़रिए ये राय जाहिर की है. फेसबुक ने समाज पर नकारात्मक प्रभाव डाला है. इस सर्वे में फेसबुक के साथ अन्य कंपनियां जैसे मार्लबोरो, वॉलमार्ट और मैकडोनाल्ड्स शामिल हैं. इन तमाम कंपनियों में से 27% अमेरिकों ने माना कि फेसबुक समाज के लिए खराब है. जबकि सबसे ज़्यादा नकारात्मक कंपनी में सिगरेट बनाने वाले इंटरनेशनल ब्रांड मार्लबोरो को रखा गया है. इन सभी कंपनियों में फेसबुक अकेली टेक कंपनी शामिल है.

टेक कंपनियों में सबसे खराब
इस सर्वे के शामिल लोगों से जब पूछा गया कि टेक कंपनियों में सबसे ज़्य़ादा नकारात्मक प्रभाव डालने वाली कंपनी कौन सी है तो सबसे ऊपर फेसबुक का नाम सामने आया.

सर्वे में 32% अमेरिकियों ने फेसबुक नकारात्मक है जबकि टि्वटर को 27%, गूगल को 7%. नेटफ्लिक्स को 6% लोगों ने गलत बताया. जबकि आधे से ज़्यादा 53% लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने इन कंपनियों में किसी को समाज पर नकारात्मक प्रभाव नहीं डालने वाला बताया.



कितने कम हुए एक्टिव यूजर्स
फेसबुक के सीईओ ज़ुकरबर्ग ने पोस्ट के ज़रिए बताया था कि "बीते क्वार्टर में हमने कुछ वायरल वीडियो दिखने के लिए बदलाव किए थे. इन बदलाव का कारण था कि हमें और ज़्यादा यूजर्स मिले. लेकिन बावजूद इसके यूजर्स साइट पर लगभग 5 करोड़ घंटे प्रति दिन कम समय बिताने लगे. ज़ुकरबर्ग का दावा है कि बेहतर समाज और बिज़नेस के लिए हम बेहतर प्लेटफार्म साबित होंगे.''



फेक न्यूज़ पर फेसबुक की कार्रवाई
लोगों की न्यूज़ फीड में फेक ख़बरों की बहुतायत के चलते फेसबुक को काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था. फेक न्यूज़ से निपटने के लिए फेसबुक सख्त कार्रवाई में जुट गया है. नई नीति के मुताबिक फेसबुक अब यूजर्स के आसपास की खबरों को ज़्यादा प्रसारित करेगा. फेसबुक ने दावा भी किया है कि अगर आप स्थानीय पेज या पब्लिशर को फॉलो करते हैं तो सबसे ऊपर वही दिखाई देगा.
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