इसरो चीफ बोले-चंद्रयान-2 की 'सॉफ्ट लैंडिंग' एक नवजात शिशु को हाथों में संभालने जितनी मुश्‍किल

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Updated: September 6, 2019, 4:48 PM IST
इसरो चीफ बोले-चंद्रयान-2 की 'सॉफ्ट लैंडिंग' एक नवजात शिशु को हाथों में संभालने जितनी मुश्‍किल
इसरो चीफ का कहना है कि लैंडर विक्रम के लैंडिंंग के आखिरी 15 मिनट सबसे अहम हैैं.

इसरो के लिए ये सॉफ्ट लैंडिंग (soft-landing) का पल कितना अहम चुनौतियों से भरा है, इसे बताते हुए डॉ. के सिवन (ISRO chief Dr K Sivan) का कहना है, ये ठीक वैसा ही है, जैसे अचानक से आपके हाथ में कोई तुरंत पैदा हुए बच्‍चे को थमा देता है.

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बेंगलुरु: ‘चंद्रयान-2' (Chandrayaan-2) के लैंडर 'विक्रम' ( lander Vikram) की चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग की घड़ी करीब आ चुकी है. भारत के इस सबसे महत्‍वकांक्षी मिशन (India Moon Mission) की कामयाबी के लिए लाखों करोड़ों लोग दुआएं कर रहे हैं. शुक्रवार-शनिवार की देर रात 1.55 बजे चांद की सतह पर इसकी लैंडिंग होगी. लेकिन लैंडर 'विक्रम' का चांद की सतह पर उतरना इतना आसान नहीं है. अंतरिक्ष एजेंसी के अध्यक्ष के. सिवन (ISRO chief Dr K Sivan) ने कहा कि प्रस्तावित ‘सॉफ्ट लैंडिंग' दिलों की धड़कन थाम देने वाली साबित होने जा रही है क्योंकि इसरो ऐसा पहली बार करने जा रहा है.

यान के चांद की सतह पर उतरने की प्रक्रिया को बताते हुए सिवन (ISRO chief Dr K Sivan) ने कहा,  एक बार जब 30 किमी की दूरी से संबंधित प्रक्रिया शुरू होगी तो इसे पूरा होने में 15 मिनट लगेंगे. इसे वैज्ञानिकों ने '15 मिनट्स ऑफ टेरर' कहा है.'

चुनौतियों भरी है 'साफ्ट लैंडिंग'
इसरो के लिए ये सॉफ्ट लैंडिंग  (soft-landing) का पल कितना चुनौतियों से भरा है, इसे बताते हुए डॉ. के सिवन (ISRO chief Dr K Sivan) ने कहा, 'ये ठीक वैसा ही है, जैसे अचानक से आपके हाथ में कोई तुरंत पैदा हुए शिशु को  थमा देता है. इसे आपको बिना किसी सहारे के संभालना होता है. ऐसे में बच्‍चा अपने तरीके से हिलता डुलता है, मूवमेंट करता है, लेकिन हमें उसे संभालना होता है, यही काम हमें इस मिशन में इस पल में करना है. लैंडर विक्रम के साथ भी यही होगा वह किसी भी दिशा में हरकत कर सकता है, लेकिन हमें उसे एक नवजात की तरह ही संभालना है.'

ये प्रक्रिया काफी जटिल
इसरो प्रमुख के. सिवन ने कहा कि प्रस्तावित ‘सॉफ्ट लैंडिंग' की प्रक्रिया काफी जटिल है. हमारे लिए ये बिल्‍कुल नई है. ये उनके लिए भी नई है, जो इसे पहले कर चुके हैं. क्‍योंकि लैंडिंग की ये प्रक्रिया हर बार ही जटिल होती है. इसलिए ही आखिरी के 15 मिनट हमारे लिए 'टेरर' से भरे हैं.

लैंडर 'विक्रम' की चांद पर 'सॉफ्ट लैंडिंग' को यान में लगे आठ उपकरणों द्वारा पूरा किया जाएगा. 'विक्रम' शनिवार तड़के डेढ़ बजे से ढाई बजे के बीच चांद की सतह पर 'सॉफ्ट लैंडिंग' करेगा. 'विक्रम' के अंदर रोवर 'प्रज्ञान' होगा जो शनिवार सुबह साढ़े पांच से साढ़े छह बजे के बीच लैंडर के भीतर से बाहर निकलेगा.
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First published: September 6, 2019, 12:32 PM IST
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