जल्द Mobile बिल के लिए करना पड़ सकता है ज़्यादा खर्च, जानें क्या है वजह

जल्द Mobile बिल के लिए करना पड़ सकता है ज़्यादा खर्च, जानें क्या है वजह
मोबाइल बिल महंगे होने का अनुमान लगाया जा रहा है.

भारतीय एयरटेल (Airtel) और वोडाफोन (Vodofone) को अगले 7 महीनों में अपने एडजस्‍टेड ग्रॉस रेवेन्‍यू (एजीआर) का 10% अदा करना है. यही वजह है कि कंपनियां अपने टैरिफ को बढ़ा सकती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 2, 2020, 3:07 PM IST
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आने वाले दिनों में आपको अपने मोबाइल के लिए ज़्यादा बिल (mobile bill) देना पड़ सकता है. माना जा रहा है वॉयस (Voice service) और डेटा सर्विसेज (data services) में कम से कम 10% की बढ़ोतरी हो सकती है. दरअसल भारतीय एयरटेल (Airtel) और वोडाफोन (Vodofone) को अगले 7 महीनों में अपने एडजस्‍टेड ग्रॉस रेवेन्‍यू (एजीआर) का 10% अदा करना है. यही वजह है कि कंपनियां अपने टैरिफ को बढ़ा सकती हैं. ये बात इंडस्‍ट्री के अनुमानों में ज़ाहिर की गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम ऑपरेटरों को 31 मार्च 2021 तक अपने बकाया AGR का 10 फीसदी जमा करने के आदेश दिए हैं. बाकी की रकम वे 10 किस्‍तों में जमा कर सकते हैं, जिसकी शुरुआत 31 मार्च, 2022 से होगी. ब्रोकरेज फर्म जेफरीज का अनुमान है कि भारतीय एयरटेल को मार्च तक करीब 2,600 करोड़ रुपये और वोडाफोन को 5,000 करोड़ रुपये तक का भुगतान करना होगा.

इसके बदले में एवरेज रेवेन्यू प्रति यूज़र (ARPU) को 10% और 27% बढ़ाने की जरूरत होगी. पहली तिमाही में एयरटेल के लिए ARPU 157 करोड़ और वोडाफोन आइडिया के लिए 114 करोड़ रुपये थे.



जेफरीज ने कहा, 'हमारा विचार है कि निकट भविष्य में टैरिफ में कम से कम 10 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.' उच्चतम न्यायालय के समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) मामले में निर्णय के बाद विश्लेषकों ने कहा कि वोडाफोन आइडिया लि. (वीआईएल) को बकाया लौटाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
ब्रोकरेज कंपनी मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने कहा कि वोडाफोन आइिया को समय मुताबिक भुगतान करने में समस्या हो सकती है लेकिन भारती एयरटेल के साथ ऐसा नहीं है.

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को वोडाफोन आइडिया, भारती एयरटेल और टाटा टेलीसर्विसेज जैसी कंपनियों को दूरसंचार विभाग (डीओटी) को समायोजित सकल राजस्व से संबंधित बकाया चुकाने के लिए कुछ शर्तों के साथ दस साल का समय दिया. न्यायालय ने अपने फैसले में दूरसंचार कंपनियों को एजीआर मद में अनुमानित 1.6 लाख करोड़ रुपये के बकाये के भुगतान के लिये 20 साल का समय दिये जाने से इनकार कर दिया.
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