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more than 200 banking apps targeted by sova malware know what it is and how to prevent it

SOVA मैलवेयर के निशाने पर 200 से अधिक बैंकिंग ऐप, जानिए क्या है यह और कैसे करें इससे बचाव?

 जानिए क्या है sova मैलवेयर

जानिए क्या है sova मैलवेयर

भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम द्वारा एडवाइजरी मिलने के बाद बैंकों ने अपने ग्राहकों के लिए चेतावनी जारी की है. बैंकों ने ग्राहकों को आधिकारिक ऐप स्टोर के अलावा किसी अन्य सोर्स से मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड न करने को कहा है.

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  • News18Hindi
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हाइलाइट्स

भारतीय बैंकों ने ग्राहकों से केवल आधिकारिक स्टोर से ही बैंकिंग ऐप डाउनलोड करने को कहा है
भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम द्वारा एडवाइजरी मिलने के बाद बैंकों ने यह चेतावनी जारी की है.
भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम ने SOVA वायरस के चलते बैंकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की थी.

नई दिल्ली. HDFC बैंक और IDBI बैंक सहित कई भारतीय बैंकों ने ग्राहकों को आधिकारिक ऐप स्टोर के अलावा किसी अन्य सोर्स से मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड न करने की चेतावनी दी है. दरअसल, भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) ने SOVA वायरस के चलते बैंकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की थी. इसके बाद बैंकों ने अपने ग्राहकों को यह अलर्ट दिया है.

बता दें कि SOVA ट्रोजन वायरस का एक नया वर्जन है. इसने कथित तौर पर 200 से अधिक मोबाइल बैंकिंग और क्रिप्टो ऐप को टारगेट किया है. यह वायरस ऐप की लॉगिन क्रेडेंशियल और कुकीज चुरा रहा है. इस मैलवेयर को पहली बार सितंबर 2021 में डिटेक्ट किया गया था.

क्या है SOVA?
SOVA एक Android बैंकिंग ट्रोजन मैलवेयर है, जो पर्सनल जानकारी चुराने के लिए बैंकिंग ऐप्स को टारगेट करता है. यह ऐप्स में फर्जी लेयर्स जोड़ता है. ये लेयर्स मैलवेयर को पेमेंट ऐप की कॉपी करने में मदद करती हैं. इस मैलवेयर को पहली बार सितंबर 2021 में सर्च किया गया था.

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क्या कर सकता है SOVA?
SOVA वायरस की लॉगिंग के जरिए कुकीज चुरा कर ऐप्स में फेक लेयर्स जोड़ सकता है और फिर आपके यूजरनेम और पासवर्ड को भी चुरा सकता है. इसके अलावा SOVA मैलवेयर के दूसरे काम भी कर सकता है. इनमें स्वाइप करना, कुकीज चुराना और स्क्रीनशॉट लेना शामिल हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक वायरस को अपडेट भी किया गया है. यह अब सभी डेटा को एन्क्रिप्ट भी कर सकता है.

कैसे काम करता है SOVA?
यह मैलवेयर स्मिशिंग से फैलता है. स्मिशिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें लोगों को पासवर्ड सहित अपनी डिटेल शेयर करने के लिए फर्जी SMS भेजे जाते हैं. एक बार मोबाइल फोन पर ऐप डाउनलोड हो जाने के बाद मैलवेयर डाउनलोड किए गए सभी ऐप की सूची सर्वर को भेज देता है, जिसके बाद स्कैमर्स ऐप्स को कंट्रोल करता है. इसके बाद सर्वर मैलवेयर को टारगेट ऐप्स की सूची भेजता है फिर यह वायरस जानकारी को XML फाइल में इकठ्ठा करता है. इस तरह मैलवेयर और सर्वर ऐप्स को मैनेज करने लगते हैं.

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क्या अटैक किए गए ऐप को अनइंस्टॉल किया जा सकता है?
अगर मैलवेयर किसी ऐप पर अटैक कर देता है, तो यूजर उस ऐप को अनइंस्टॉल नहीं कर सकेंगे. मैलवेयर को मिले नए अपडेट के चलते ऐप पर अटैक होने का बाद यूजर्स उसे अनइंस्टॉल करने की कोशिश करेंगे, तो उनको फोन की स्क्रीन पर This app is secured मैसेज मिलता है.

इससे कैसे करें बचाव ?
इस मैलवेयर से बचने के जरूरी है कि आप मोबाइल ऐप को केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें. इसके अलावा, ऐप डाउनलोड करते समय Additional Information सेक्शन में जाएं. यहां ऐप की डिटेल, डाउनलोड संख्या और यूजर रिव्यू को जरूर देखें. इसके अलावा सीईआरटी-इन ने यूजर्स को डिवाइस वेंडर्स द्वारा प्रदान किए गए ऐप्स और ऑपरेटिंग सॉफ़्टवेयर के लेटेस्ट अपडेट को डाउनलोड करने की सलाह दी है.

एंटी-वायरस एक्टिव करें
साथ ही आप एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर डाउनलोड करके उसे एक्टिव कर सकते हैं. वायरस से बचने के लिए यूजर्स किसी भी गैर जरूरी ईमेल और एसएमएस में दिए गए लिंक पर क्लिक करने से बचें, किसी भी अविश्वसनीय लिंक का पालन न करें और सावधानी बरतें. इस बीच अगर बैंक अकाउंट में किसी भी तरह की असामान्य गतिविधि होती है, तो तुरंत संबंधित बैंकों को इसकी सूचना दें.

Tags: Apps, Mobile Application, Virus

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