70 लाख से ज्यादा डेबिट-क्रेडिट कार्ड का डेटा ऑनलाइन लीक, PAN से लेकर इनकम तक की है जानकारी

सांकेतिक तस्वीर

एक साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर ने दावा किया है कि डॉर्क वेब  (Dark Web) पर 70 लाख भारतीय डेबिट व क्रेडिट कार्ड की जानकारी लीक हुई है. लीक हुए इस डेटा में कार्डहोल्डर्स के फोन नंबर से लेकर पैन नंबर और सालाना इनकम तक के बारे में जानकारी दी है. इस​ रिसर्चर ने साइबर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम CERT-In को भी जानकारी दी है.

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    नई दिल्ली. भारतीय साइबर​ सिक्योरिटी रिसर्चर, राजशेखर राजाहरिया ने दावा किया है कि 70 लाख से अधिक भारतीय डेबिट व क्रेडिट कार्ड से जुड़ी प्राइवेट डेटा ऑनलाइन लीक हुई है. राजाहरिया को यह जानकारी डार्क वेब (Dark Web) फोरम के जरिए मिली है, जहां इन डेटा को संभावित ग्राहकों को बेचा जा सकता है. सुरक्षा के लिहाज से देखें तो इन डेबिट और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी प्राइवेट जानकारी का इस्तेमाल कई तरह की गलत साइबर एक्टिविटी के लिए किया जा सकता है. News18 ने अपनी एक रिपोर्ट प्राप्त जानकारी के आधार पर कहा है कि लीक हुए कुल डेटा की साइज 1.30 GB है. राहत की बात यह है कि लीक हुए डेटा में ऐसी कोई जानकारी नहीं है, जिसकी मदद से कोई फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन हो सकेगा.

    हालांकि, इस डेटा में क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड के नंबर के बारे में जानकारी नहीं है. लेकिन इसमें कार्डहोल्डर्स के फोन नंबर्स, क्रेडिट कार्ड टाइप, इनकम स्टेटस, सालाना कमाई, जन्मतिथि, शहर और कुछ मामलों में पहचान पत्र के बारे में जानकारी है.

    5 लाख पैन नंबर भी चोरी
    Inc42 की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि लीक हुए डेटा में करीब 5 लाख पैन नंबर भी हैं. इन डेटा से पता चलता है कि इन्हें कई अलग-अलग सोर्स से जुटाया गया है. संभव है कि बैंकों के थर्ड पार्टी सर्विस पार्टनर्स ने ही ऐसी संवेदनशील जानकारियों को असुरक्षित रूप से रखा है.

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    कई शहरों के कार्डहोल्डर्स की जानकारी लीक
    ध्यान देने वाली बात एक यह भी है कि लीक हुए डेटा में अधिकतर डेबिट व क्रेडिट कार्ड देश के अलग-अलग शहरों से हैं. इन डेटा से जुड़ा एक फोल्डर डार्क वेब पर जारी भी कर दिया गया है. संभावना है कि इसे बेच भी दिया जाएगा. हालांकि, इन डेटा में मौजूदा जानकारी को लेकर यह बता पाना मुश्लिक है कि मौजूदा माहौल अटैकर्स के लिए ऐसी जानकारी कितने काम की साबित होती है.

    मीडिया रिपोर्ट में राजाहरिया के हवाले से कहा गया है कि इस डेटा लीक के बारे में सबसे पहली जानकारी CERT-In को दी थी. CERT-In देश की साइबर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम है. हालांकि, अभी तक उन्हें CERT-In की टीम की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है.

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    इस में यह भी बताया गया है कि कार्डहोल्डर्स में एक विशेष तरह की समानता भी देखने को मिली है. लीक हुए डेटा में जिन कार्डहोल्डर्स की जानकारी है, वो एक्सिस बैंक, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, केलॉग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और मैकेंसी एंड कंपनी में काम कर चुक हैं. इसमें ऐसे लोगों के कार्ड की भी जानकारी है जो सालाना 7 लाख रुपये से लेकर 35 लाख रुपये तक की कमाई करते हैं.

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