NASA कर्मचारियों को झांसा दे रहे हैं हैकर्स, वर्क फ्रॉम होम की वजह से कर रहे हैं मैलवेयर अटैक

NASA कर्मचारियों को झांसा दे रहे हैं हैकर्स, वर्क फ्रॉम होम की वजह से कर रहे हैं मैलवेयर अटैक
नासा ने अपने परंपरागत काम से हट कर यह काम किया है.

कोरोना वायरस महामारी के बीच घर से काम करने पर साइबर हमलों की एक नई लहर फेडरल एजेंसी कर्मचारियों को टारगेट कर रही है...

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नासा (NASA) ने पिछले कुछ दिनों में मैलवेयर अटैक (malware attack) में तेजी से वृद्धि का अनुभव किया है. इसकी वजह कर्मचारियों का घर से काम करना बताया जा रहा है. स्पेस एजेंसी के चीफ इन्फॉर्मेशन ऑफिसर (cheif information officer) के मुताबिक यहां वेबसाइट तक पहुंचने की कोशिश करने वाले एजेंसी उपकरणों की दोहरीकरण का अनुभव भी किया गया है.

कंपनी ने मेमो में लिखा कि कोरोना वायरस महामारी के बीच घर से काम करने पर साइबर हमलों की एक नई लहर फेडरल एजेंसी कर्मचारियों को टारगेट कर रही है. इसमें शामिल है...

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- ईमेल फ़िशिंग प्रयासों का दोहरीकरण.



- नासा प्रणालियों पर मैलवेयर के हमलों में तेजी से वृद्धि.
- नासा कर्मचारियों का मैलिशियल लिंक पर क्लिक (अनजाने में) करना दोगुना होना.



बताया गया है कि इसमें सबसे ज्यादा डराने वाला आखिरी पॉइंट है, जिसमें पाया गया है कि नासा कर्मचारी, कॉन्ट्रैक्टर्स इमेल और मैसेज पर भेजी गए मैलेशियस लिंक शिकार हो रहे हैं. वह इन लिंक्स पर सामान्य रूप से दोगुनी दर से क्लिक कर रहे हैं.

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लोगों को मैलेशियस लिंक पर क्लिक करवाना और उन्हें ईमेंल अटैचमेंट में मैलवेयर भेजकर शिकार बनाना, हैकर्स के लिए सबसे आसान काम है. इससे वह कंपनी के गोपनीय और संवेदनशील नेटवर्क में जगह बना लेते हैं. इस तरह के सभी हमलों का जोखिम केवल COVID-19 महामारी के प्रकोप से बढ़ा है, जिसकी वजह से रातों रात लोगों को घर से काम करने का फैसला करना पड़ा.

इस समय हैकर्स चल रही महामारी के भय को भुनाने में सक्षम हैं और इन हमलों में वृद्धि को देखने वाला नासा ही अकेला नहीं है. तीन हफ्ते पहले, शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस-थीम वाले फ़िशिंग ईमेल की एक टॉरेंट की सूचना दी थी. विश्वविद्यालय के नाम से कुछ फर्जी ईमेल छात्रों और कर्मचारियों के सामने आए.

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अन्य लोगों ने संक्रमण को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों का विवरण देते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन के संचार के रूप में संदेश दिया है. स्क्रूटनी कंपनी सोफोज़ के रिसर्चर्स ने दर्जनों नए बनाए गए इंटरनेट डोमेन को ट्रैक किया है, साथ ही कोरोना वायरस बीमारी का कारण बताने वाली 5,000 से ज़्यादा HTTPS सर्टिफिकेट को भी खोजा है.
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