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Opinion: आईयूसी मुद्दे पर अब रेग्युलेटर्स भविष्य को ध्यान में रखकर निर्णय लें

News18Hindi
Updated: October 9, 2019, 10:59 PM IST
Opinion: आईयूसी मुद्दे पर अब रेग्युलेटर्स भविष्य को ध्यान में रखकर निर्णय लें
1 जनवरी 2020 से आईयूसी को घटाकर जीरो पैसा किया जाना था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

इंटरकनेक्ट यूजेस चार्जेस यानी आईयूसी दूसरी टेलिकॉम कंपनी का नेटवर्क इस्तेमाल करने पर लगता है. टेलिकॉम कंपननियां दूसरे से आईयूसी लेती हैं. जिस कंपनी के नेटवर्क पर कॉल जाती है उसे ही आईयूसी मिलता है.

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  • Last Updated: October 9, 2019, 10:59 PM IST
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सौनक मित्रा
अक्सर देखा गया है कि उपभोक्ता नियामकों के विफल वादों के लिए भुगतान करते हैं. जैसे सहकारी बैंकों के जमाकर्ताओं को केंद्रीय बैंक के उधारदाताओं की निगरानी के लिए भुगतान करना पड़ता है. इसी तरह मोबाइल कंज्यूमर्स को अब ज्यादा पैसे चुकाने पड़ेंगे, क्योंकि ट्राई (Trai) ने जो इंटरकनेक्ट यूजेस चार्जेस (IUC) को खत्म करने का वादा किया था, वह पूरा नहीं हुआ. इंटरकनेक्ट यूजेस चार्जेस यानी आईयूसी दूसरी टेलिकॉम कंपनी का नेटवर्क इस्तेमाल करने पर लगता है. टेलिकॉम कंपननियां दूसरे से आईयूसी लेती हैं. जिस कंपनी के नेटवर्क पर कॉल जाती है उसे ही आईयूसी मिलता है.

9 अक्टूबर 2019 को अपने एक बयान में रिलायंस जियो इन्फोकॉम ने कहा, अब उसके यूजर्स अगर दूसरे नेटवर्क पर कॉल करेंगे तो उनसे 6 पैसे प्रति मिनट के हिसाब से पैसे वसूले जाएंगे. अब तक यह IUC रिलायंस जियो द्वारा वहन किया जा रहा था. पिछले तीन साल में कंपनी ने आईयूसी चार्ज के रूप में 13500 करोड़ रुपए का भुगतान दूसरी कंपनियों को किया है. लेकिन ट्राइ के नए नियमों के बाद अब कंपनी ने अपने दबाव को कम करने की कोशिश की है. इसीलिए अब कंपनी यूजर्स से एक मिनट में 6 पैसे लेगी.

ट्राइ का ये फैसला उस फैसले से निराशाजनक और शर्मनाक है, जिसमें जिसमें 1 जनवरी 2020 से आईयूसी को घटाकर जीरो पैसा किया जाना था. लेकिन इसे अभी 14 से 6 पैसे पर कर दिया गया. कुछ लोगों का कहना है कि आईयूसी एक विवादास्पद मुद्दा रहा है. लेकिन ट्राई ने इसके समर्थन और विरोध के बारे में विस्तार से अध्ययन करने के बाद ये निर्णय लिया. ये एक प्रगतिशील और भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय है. नई तकनीक में कॉल की दरें घटेंगी.

2017 की IUC पॉलिसी का उद्देश्य सेवा प्रोवाइडर्स को अधिक कुशल नेटवर्क प्रौद्योगिकी (जैसे 4G) की ओर ले जाने के लिए प्रोत्साहित करना था. उस समय ट्राई ने कहा था, " वह IUC एक ऐसा नियामक प्रदान करेगी, जो सेवा प्रदाताओं को अपने नेटवर्क और विकास के अनुसार योजना बनाने में मदद करेगा. भारत में टेलिकॉम हमेशा से विवादों को बुलाने वाला सेक्टर रहा है. अब समय है कि आगे बढ़ने के लिए मोबाइल रेग्युलेटर्स एक स्टैंड लें.

(इस लेख में लेखक के ये अपने विचार हैं. )

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First published: October 9, 2019, 10:42 PM IST
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