लाइव टीवी

बचपन में होने वाले निमोनिया को लेकर, फिलिप्स इंडिया जागरूकता फैलाकर रख रही हर ज़िन्दगी का ख़याल

News18Hindi
Updated: October 29, 2019, 4:45 PM IST
बचपन में होने वाले निमोनिया को लेकर, फिलिप्स इंडिया जागरूकता फैलाकर रख रही हर ज़िन्दगी का ख़याल
UNICEF के अनुसार निमोनिया, दुनियाभर में हर साल लगभग 150,000 बच्चों को अपनी चपेट में लेता है. भारत में भी पांच वर्ष से कम के बच्चों की मौत का कारण 15% निमोनिया ही होता है.

UNICEF के अनुसार निमोनिया, दुनियाभर में हर साल लगभग 150,000 बच्चों को अपनी चपेट में लेता है. भारत में भी पांच वर्ष से कम के बच्चों की मौत का कारण 15% निमोनिया ही होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 29, 2019, 4:45 PM IST
  • Share this:
विकासशील देश भारत में लगातार बढ़ रही जनसंख्या के बीच स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बेहद ज़रूरी हो जाती है. इसकी कमी लाखों लोगों की जिन्दगी पर भारी पड़ सकती है. रॉयल फिलिप्स की सहायक कंपनी फिलिप्स इंडिया ने अपने एकीकृत अनुसंधान और विकास पहल के चलते कई सालों में यह समझा है कि भारत में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैलाना बेहद ज़रूरी है. वह जानते हैं कि लोगों को शिक्षित करने के लिए जागरूकता अनिवार्य है, लेकिन वो सुलभता को भी समान महत्व देते हैं क्योंकि इसका असर सबसे ज्यादा होता है. इसलिए फिलिप्स इंडिया ने CSR कैंपेन 'हर सांस में जिंदगी' के ज़रिए जाग्रुकता फ़ैलाने का दायित्व लिया है. जिससे लोग बचपन के निमोनिया की समय से जांच करवा कर उसकी बेहतर रोकथाम कर सकें.

निमोनिया एक जानलेवा संक्रमण है जो कि फेफड़ों में सूजन पैदा करता है. UNICEF के अनुसार निमोनिया, दुनियाभर में हर साल लगभग 150,000 बच्चों को अपनी चपेट में लेता है. भारत में भी पांच वर्ष से कम के बच्चों की मौत का कारण 15% निमोनिया ही होता है. सबसे हैरान करने वाली बात है कि हर साल लगभग 30 लाख नए केस सामने आते हैं, जिसके साथ पूरी दुनिया में भारत वो देश बन जाता है जहां निमोनिया से सबसे अधिक मौतें होती हैं.



बचपन में होने वाले निमोनिया के लक्षण में लगातार खांसी होना, तेज बुखार, छाती में दर्द और साँस का तेज होना शामिल है. हालांकि यह अलग-अलग बच्चे में अलग हो सकते हैं, लेकिन जल्दी पता चलने पर इसका सही इलाज भी हो सकता है. फिलिप्स इंडिया का मानना है कि लोगों को इस बारे में जागरूक करने से वो अपने बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर सही और बेहतर कदम ले पाएंगे. जागरूकता कैंपेन जैसे 'हर सांस में जिंदगी' से लाइफस्टाइल को बेहतर और हैल्दी बनाने के आईडिया को बढ़ावा मिलेगा, खासकर जब बात बच्चों की हो.

भारत में बच्चों को बेहतर और स्वस्थ जीवन देने को लेकर, फिलिप्स इंडिया के इस कदम को बेहद पॉज़िटिव तरीके से देखा जा रहा है. इससे भारत में निमोनिया के चलते बच्चों की मौत के आंकड़े को भी कम किया जा सकता है. फिलिप्स इंडिया ने न केवल शहरों बल्कि गांवों में भी इस जागरूकता को पहुँचाने का वादा किया है. इस पहल से ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है, जिससे जड़ से इस चीज का इलाज हो सके और स्थिति में सुधार हो.

फिलिप्स इंडिया बचपन में होने वाले इस निमोनिया के बारे में जानकारी देने का काम कर रही है, जिससे लोगों को इसके लक्षण का जल्दी पता चल सके और सही इलाज हो पाए. देश के भविष्य पर ध्यान देते हुए फिलिप्स इंडिया भारत को एक स्वास्थ जगह बनाने को लेकर काम कर रहा है, जिससे देश और देश का भविष्य स्वस्थ रह सके.

इस इनीशिएटिव के बारे में और ज्यादा जानने के लिए यहां क्लिक करें.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए मोबाइल-टेक से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 29, 2019, 12:15 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...