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Reliance Jio ने चुकाया करोड़ों का AGR, Airtel-Vodafone ने मांगी मोहलत

रिलायंस जियो (Reliance Jio) एकमात्र टेलीकॉम कंपनी है जिसने एजीआर का पेमेंट डेडलाइन खत्म  होने के पहले ही कर दिया है.

रिलायंस जियो (Reliance Jio) एकमात्र टेलीकॉम कंपनी है जिसने एजीआर का पेमेंट डेडलाइन खत्म होने के पहले ही कर दिया है.

रिलायंस जियो (Reliance Jio) एकमात्र टेलीकॉम कंपनी है जिसने एजीआर का पेमेंट डेडलाइन खत्म होने के पहले ही कर दिया है.

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    नई दिल्लीः देश की जानी-मानी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम (Reliance Jio Infocom) ने 177 करोड़ रुपये समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का पेमेंट कर दिया है. रिलायंस जियो एकमात्र टेलीकॉम कंपनी है जिसने एजीआर का पेमेंट करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा फिक्स किए गए डेडलाइन तक भुगतान कर दिया है. कोर्ट ने एजीआर के पेमेंट के लिए 23 जनवरी की समय सीमा तय की थी. हालांकि, कंपनी ने टेलीकॉम विभाग को 31 जनवरी तक के बकाया 195 करोड़ का भुगतान किया है.

    एयरटेल और वोडाफोन ने एजीआर का बकाया चुकता करने संबंधी एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की है. इसलिए जब तक कोर्ट का आदेश नहीं आ जाता तब तक एजीआर का पेमेंट करने के लिए उन्होंने समय मांगा है. इसलिए डेडलाइन के बावजूद भी जब तक सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं आ जाता है तब तक टेलीकॉम विभाग एजीआर पेमेंट न करने के लिए किसी टेलीकॉम कंपनी पर कोई ऐक्शन नहीं लेगा.



    वोडाफोन, एयरटेल ने मांगा समय-
    वोडाफोन, एयरटेल द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए याचिका की सुनवाई अगले हफ्ते है. बता दें कि टेलीकॉम कंपनियों को सरकार को कुल 92,642 करोड़ रुपये लाइसेंस शुल्क के रूप में और 55,054 करोड़ रुपये स्पेक्ट्रम यूज़ेज चार्ज के रूप में देना है. यह लायबिलिटी टेलीकॉम कंपनियों के ऊपर तब सामने आई जब अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नॉन-टेलीकॉम रेवेन्यू को भी बकाया राशि में गिनना चाहिए.



    बता दें कि भारती एयरटेल का कुल 35,586 करोड़ रुपये बकाया है जिसमें 21,682 करोड़ रुपये लाइसेंस शुल्क और 13,904 करोड़ रुपये एसयूसी के रूप में देने होंगे. वहीं वोडाफोन-आइडिया के मामले में कुल बकाया राशि 53,038 करोड़ रुपये है जिसमें 28,309 करोड़ रुपये लाइसेंस शुल्क व 24,729 करोड़ रुपये एसयूसी चार्जेज़ हैं. सरकार ने इन्हें निर्देश दिया है कि 24 अक्टूबर 2019 को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक पैसे जमा करें.

    क्‍या होता है एजीआर-
    दूरसंचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा टेलिकॉम कंपनियों से लिए जाने वाले स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क और लाइसेंसिग फीस को ही एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू या एजीआर कहते हैं. एजीआर के दो हिस्से होते हैं. पहला स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क और दूसरा लाइसेंस शुल्क. यह 3-5 फीसद और 8 फीसद होता है. सरकार और दूरसंचार कंपनियों के बीच 14 सालों से एजीआर विवाद चल रहा है.

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