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रूस ने बनाया अपना इंटरनेट सिस्टम, दुनिया के कई देशों ने की आलोचना

इस टेस्ट का उद्देश्य यह देखना था कि देश का नेशनल इंटरनेट सिस्टम RuNet बिना ग्लोबल डीएनएस सिस्टम और एक्सटर्नल इंटरनेट के रन कर सकता है या नहीं.

इस टेस्ट का उद्देश्य यह देखना था कि देश का नेशनल इंटरनेट सिस्टम RuNet बिना ग्लोबल डीएनएस सिस्टम और एक्सटर्नल इंटरनेट के रन कर सकता है या नहीं.

इस टेस्ट का उद्देश्य यह देखना था कि देश का नेशनल इंटरनेट सिस्टम RuNet बिना ग्लोबल डीएनएस सिस्टम और एक्सटर्नल इंटरनेट के रन कर सकता है या नहीं.

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    रूस की सरकार ने सोमवार को कहा कि देश में वैकल्पिक इंटरनेट सिस्टम को लेकर कई टेस्ट किए गए जो कि सफल रहे हैं. यह टेस्ट कई दिनों तक चला. पिछले हफ्ते से शुरू हुआ इस टेस्ट में सरकारी एजेंसियों, लोकल इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स और लोकल इंटरनेट कंपनियों को शामिल किया गया.

    इस टेस्ट का उद्देश्य यह देखना था कि देश का नेशनल इंटरनेट सिस्टम RuNet बिना ग्लोबल डीएनएस सिस्टम और एक्सटर्नल इंटरनेट के रन कर सकता है या नहीं. खास बात है कि लोगों ने अपने इंटरनेट सिस्टम के इस्तेमाल के दौरान किसी भी तरह का बदलाव महसूस नहीं किया. रोज की तरह वे बिना किसी रुकावट के इंटरनेट का इस्तेमाल करते रहे.

    हालांकि, सरकार ने किसी भी तरह की कोई तकनीकी डीटेल इसके बारे में नहीं दी है. रूस इसके लिए पिछले तीन सालों से तैयारी कर रहा था. दरअसल, रूस को इस बात की चिंता थी कि अगर वर्ल्ड वाइड वेब से उसका संपर्क टूट जाता है तो अपना इंटरनेट सिस्टम इतना मज़बूत होना चाहिए कि आंतरिक तौर पर देश में कोई बुरा असर नहीं पड़े. रूस के इस प्रयोग की अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देशों ने यह कहते हुए आलोचना की है कि इससे इंटरनेट ब्रेकअप होगा और रूस अपने ही देश के लोगों पर पूरा नियंत्रण रखना चाहता है. इससे पहले चीन और ईरान ऐसी कोशिश कर चुके हैं.

    ऐसे काम करता है इंटरनेट-
    डोमेन वह सिस्टम है, जो इंटरनेट में बताए गए नाम और आईपी एड्रेस स्टोर रखता है। डोमेन का जिक्र करते ही इंटरनेट सर्वर उसे संबंधित आईपी एड्रेस में ट्रांसलेट करके डेटा कम्प्यूटर तक भेज देता है. सर्विस प्रोवाइडर भी 3 स्तरों पर हैं। पहली कंपनी समुद्र के नीचे केबल डालकर सर्विस प्रोवाइडर्स को दुनियाभर से जाेड़ती हैं. दूसरी इन प्रोवाइडर्स को राष्ट्र से और तीसरी कंपनी स्थानीय प्रोवाइडर्स होती हैं. इंटरनेट में गाइडलाइन, स्टैंडर्ड और रिसर्च करने वाले समूह को वर्ल्ड वाइड कंसोर्टियम (W3C) कहते हैं.

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