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Social Media मामले में सरकार ने SC से कहा- आतंकवादियों को नहीं है राइट-टू-प्राइवेसी

News18Hindi
Updated: October 22, 2019, 4:05 PM IST
Social Media मामले में सरकार ने SC से कहा- आतंकवादियों को नहीं है राइट-टू-प्राइवेसी
सरकार किसी की निजता भंग करने के खिलाफ है लेकिन यह आतंकवादियों के हाथ में धोखा देने का हथियार नहीं बनना चाहिए.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Social Media Platforms) को लेकर कड़े कानून की वकालत करते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा आतंकवादी गतिविधियों को फैलाने के लिए राइट-टू-प्राइवेसी (Right to Privacy) नहीं हो सकता है.

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  • Last Updated: October 22, 2019, 4:05 PM IST
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फेसबुक (Facebook), वॉट्सऐप (WhatsApp) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को लेकर कड़े कानून की वकालत करते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा आतंकवादी गतिविधियों को फैलाने के लिए राइट-टू-प्राइवेसी नहीं हो सकता है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने कहा कि सरकार किसी की निजता भंग करने के खिलाफ है लेकिन यह आतंकवादियों के हाथ में धोखा देने का हथियार नहीं बनना चाहिए.

सॉलिसिटर जनरल ने कहा, 'हम सभी राइट-टू-प्राइवेसी के समर्थक हैं लेकिन इसे नेशनल सिक्युरिटी और देश की संप्रभुता के साथ संतुलित होना चाहिए. क्या एक आतंकवादी राइट-टू-प्राइवेसी का दावा कर सकता है. क्या निजता यानी प्रिवसी की आड़ में आतंकवादी गतिविधियों को संरक्षण दिया जा सकता है. तमिलनाडु की तरफ से इस मामले में शामिल होने वाले केके वेणुगोपाल ने तुषार मेहता का समर्थन किया.

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने देश के विभिन्न हाईकोर्ट्स में लंबित पड़े सोशल मीडिया जैसे फेसबुक (Facebook), वॉट्सऐप (WhatsApp) को आधार (Aadhar) से लिंक करने से संबंधित मामलों को अपने पास सुनवाई के लिए ट्रांसफर कर लिया था और केंद्र सरकार से इस मामले में अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा था.

बता दें कि इस मामले में कई पीआईएल (Social Media Related PIL) डाले जा गए थे. पहला पीआईएल जुलाई 2018 में मद्रास हाईकोर्ट के सामने डाला गया था. बाद में बॉम्बे और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पीआईएल डाली गई थी. सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने बाद में इन सारे मामलों को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की गुहार लगाई थी. याचिकाकर्ता एंटनी क्लीमेंट रूबिन ने इस मामले में मांग की थी कि कोर्ट, सरकार को निर्देश दे कि वह हर सोशल मीडिया अकाउंट के साथ किसी सरकारी आईडी प्रूफ को अनिवार्य बनाए ताकि सोशल मीडिया अकाउंट की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान नहीं लगाया जा सके. इस मामले में तमिलनाडु की तरफ से के.के.वेणुगोपाल पेश हुए थे जिन्होंने हाई कोर्ट में लंबित सभी मामलों को सुप्रीम को में ट्रांसफर किए जाने संबंधी फेसबुक की याचिका का विरोध छोड़ दिया.


 

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First published: October 22, 2019, 3:57 PM IST
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