मोबाइल में फिट होगा डेढ़ रुपये का ये सेंसर, बताएगा खाना खराब है या नहीं

यह सेंसर खाने को खराब करने वाली अमोनिया और ट्राइमिथायलामाइन का पता लगाकर पैकेज्ड भोजन की गुणवत्ता के बारे में बता सकता है.

News18Hindi
Updated: August 24, 2019, 5:17 AM IST
मोबाइल में फिट होगा डेढ़ रुपये का ये सेंसर, बताएगा खाना खराब है या नहीं
यह सेंसर खाने को खराब करने वाली अमोनिया और ट्राइमिथायलामाइन का पता लगाकर पैकेज्ड भोजन की गुणवत्ता के बारे में बता सकता है.
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Updated: August 24, 2019, 5:17 AM IST
हम से काफी लोग पैकेज फूड एक्सपायरी डेट नज़दीक देखकर फेंक देते हैं, क्योंकि हमें इस बात का डर होता है कि कहीं वह खराब तो नहीं हो गया. या हम कई बार सूंघकर पता लगाने की कोशिश करते हैं कि वह सही है या खराब हो गया. लेकिन अब इस बात की ज़रूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि अब एक ऐसा सेंसर आ गया है जो कि बता देगा कि खाना खराब हुआ है या नहीं.

यह सेंसर आपको स्मार्टफोन से जुड़ा होगा. खास बात ये है कि ईको फ्रेंडली होने के साथ-साथ यह सस्ता भी होगा. इसकी कीमत करीब डेढ़ रुपये है. इस सेंसर के प्रयोग से पैकेज फूड की बर्बादी को बचाया जा सकेगा. (Airtel लाएगा स्मार्ट सेट टॉप बॉक्स, फ्री मिल सकती है LED TV)

लंदन के इम्पीरियल कॉलेज द्वारा तैयार यह सेंसर खाने को खराब करने वाली अमोनिया और ट्राइमिथायलामाइन का पता लगाकर पैकेज्ड भोजन की गुणवत्ता के बारे में बता सकता है. इस सेंसर को 'पेपर आधारित इलेक्ट्रिकल गैस सेंसर' (पीईजीएस) कहा जाता है. बता दें कि ब्रिटेन में लगभग एक तिहाई लोग खाने के पैकेट को सिर्फ इसलिए फेंक देते हैं, क्योंकि उसके उपभोग की अंतिम तिथि (एक्सपायरी डेट) करीब होती है. इसमें से 42 लाख टन भोजन ऐसा होता है, जिसे खाया जा सकता था.

बाज़ार में इससे पहले कुछ एक ऐसे सेंसर पहले से भी मौजूद हैं लेकिन इसकी खास बात ये है कि इस सेंसर की परफॉर्मेंस अच्छी है और यह काफी सस्ता भी है. प्रयोगशाला में जब इस सेंसर को इस्तेमाल किया गया तो इसने खाने को खराब करने वाली गैसों को बहुत तेजी से पहचान लिया.

जर्नल में प्रकाशित शोध में रिसर्चर्स का कहना है कि इस सेंसर के आने से पैकेज्ड फूड पर यूज बाय डेट की जगह इसे ही लगाया जा सकता है. यह ज्यादा सटीक और विश्वसनीय होगा. इससे ग्राहकों को भी खाना सस्ती दर पर मिल सकेगा.

इस शोध के हेड डॉ. फिरात गुडेर का कहना है कि यह एकमात्र सेंसर है, जिसका व्यावसायिक स्तर पर इस्तेमाल संभव है. लोग यूज बाय डेट को विश्वसनीय भी नहीं मानते थे और वह संभवत: सटीक तरीका भी नहीं है. सस्ते होने की वजह से इनका इस्तेमाल संबंधित वस्तु की कीमत पर भी बहुत असर नहीं डालेगा.
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First published: August 24, 2019, 5:17 AM IST
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