स्पेक्ट्रम नीलामी से आपके मोबाइल फोन बिल और सर्विस पर भी पड़ेगा असर, जानिए कैसे

सरकार ने इस बार कुल 77,800 करोड़ रुपये के स्पेक्ट्रम की नीलामी की है. (सांकेतिक तस्वीर)

सरकार ने इस बार कुल 77,800 करोड़ रुपये के स्पेक्ट्रम की नीलामी की है. (सांकेतिक तस्वीर)

स्पेक्ट्रम नीलामी 2021 में करीब एक-तिहाई के साथ रिलायंस जियो (Jio) सबसे बड़ी बिडर बनकर उभरी है. टेलिकॉम कंपनियों द्वारा इस स्पेक्ट्रम नीलामी में खरीदारी से आम ग्राहकों के फोन बिल पर भी असर पड़ेगा. साथ ही टेलिकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी.

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नई दिल्ली. पिछले सप्ताह ही केंद्र सरकार ने स्पेक्ट्रम नीलामी की प्रक्रिया पूरी की है. इस साल स्पेक्ट्रम में रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने भाग लिया है. इस बार के स्पेक्ट्रम नीलामी में रिलायंस जियो करीब दो-तिहाई स्पेक्ट्रम हासिल करने के साथ सबसे बड़ी बिडर बनी है. आपको यह भी जानना चाहिए कि किसी कंपनी के पास कितना स्पेक्ट्रम उपलब्ध है और वे इसके ​लिए कितना खर्च कर रही हैं, इससे आपके मोबाइल बिल पर भी असर पड़ता है. प्रीपेड ग्राहक के तौर पर आपको मिलने वाले ऑफर पर इसका असर पड़ता है. स्पेक्ट्रम नीलामी 2021 में केंद्र सरकार ने 77,800 करोड़ रुपये के कुल स्पेक्ट्रम बेचे. इसमें से जियो ने 57,100 करोड़ रुपये, एयरटेल ने 18,700 करोड़ रुपये और वोडाफोन आइडिया ने 2,000 करोड़ रुपये के स्पेक्ट्रम हासिल किया है.

सबसे पहले तो आपको यह जानना चाहिए कि यह नीलामी 4G स्पेक्ट्रम के लिए है. रिलायंस जियो और एयरटेल ने 800 से 900 MHz के सब-गिगाहार्ट्ज बैंड खरीदा है. ये दोनों कंपनियां 5G सर्विसेज के लिए भी इसका इस्तेमाल कर सकती हैं.

इस स्पेक्ट्रम नीलामी से आपके फोन बिल पर क्या असर पड़ेगा?
हम इसी बारे में आपको जानकारी दे रहे हैं. इसके लिए हम आपको किसी तकनीकी शब्द का जिक्र किए बिना ही ये बता रहे हैं कि आखिर कैसे इन स्पेक्ट्रम की वजह से आपके फोन बिल पर असर पड़ेगा.
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1. मौजूदा 2G और 3G यूजर्स को 4G में स्विच करने का ऑफर: आने वाले समय में हर किसी को तो कम से कम 4G में स्विच करना ही पड़ेगा. इस बार की नीलामी से यह प्रक्रिया और भी तेजी हो जाएगी. हालांकि, जियो के पास केवल 4G सब्सक्राइबर्स हैं. लेकिन एयरटेल और वोडफोन आइडिया को 2G और 3G से 4G में स्विच करने का मतलब होगा कि उनका ऑपरेशन कॉस्ट कम हो जाएगा. उन्हें मौजूदा समय के 3 नेटवर्क की जगह केवल एक ही नेटवर्क ही मेंटेन करना होगा. इसके लिए ये दोनों कंपनियों कुछ ऐसे प्लान्स पेश कर सकती हैं ताकि ग्राहकों को 4जी में स्विच करने में कोई दुविधा न रहे.

इससे उनका प्रति यूजर औसत रेवेन्यू (ARPU) बढ़ेगा. चूंकि, प्रतिदिन डेटा लिमिट वाला 4G प्लान स्टैंडर्ड 2G प्लान की तुलना में करीब चार गुना अधिक है. ऐसे में सब्सक्राइबर्स को 4G में स्विच करने के बाद पहले से ज्यादा बिल देना होगा.

2. मौजूदा 4G ग्राहकों को मिलेगी बेहतर सर्विस: जियो और एयरटेल ने सब​-गिगाहार्ट्ज और 2300 MHz कैटेगरी के स्पेक्ट्रम खरीदे हैं. इससे दोनों कंपनियों को अपना नेटवर्क कवरेज और क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी. इससे टेलिकॉम कंपनियों को अपने नेटवर्क की क्वॉलिटी पहले से बेहतर करने में मदद मिलेगी. कंपनियों के बीच टैरिफ प्लान को लेकर प्रतिस्पर्धा और भी बढ़ जाएगी. ऐसे में अगर आपको भी किसी नेटवर्क पर कॉल ड्रॉप होने या खराब डेटा स्पीड की समस्या से जूझना पड़ रहा है तो इस नीलामी के बाद यह भी दूर हो जाएगा.

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3. रिलायंस जियो और भारती एयरटेल - दोनों ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि वे 5G के लिए तैयार हैं. अब इस नीलामी में जरूरी स्पेक्ट्रम हासिल करने के बाद ये कंपनियां 5G नेटवर्क की टेस्टिंग शुरू कर सकेंगी. हालांकि, इसके लिए अभी सरकार से मंजूरी लेनी होगी. माना जा रहा है कि 5G नेटवर्क को लेकर भारत में दो कंपनियों का वर्चस्व रहेगा. हालिया स्पेक्ट्रम नीलामी और अगले दो साल के अंदर 5G की लॉन्चिंग से इन दोनों कंपनियों के रेवेन्यू में भी इजाफा होगा. (डिस्क्लेमर: न्यूज़18 हिंदी रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का हिस्सा है. नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का स्वामित्व रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास ही है.)
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