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टेक कंपनियों को लिए खजाना है आपका पर्सनल डेटा, जानें क्या है वजह?

News18Hindi
Updated: October 15, 2019, 3:35 PM IST
टेक कंपनियों को लिए खजाना है आपका पर्सनल डेटा, जानें क्या है वजह?
फेसबुक पर रोजाना 4 पेटाबाइट्स (1,000 टीबी) डेटा तैयार हो रहा है.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की वेबसाइट पर प्रकाशित वेंकूवर की मीडिया साइट विजुअल केपिटलिस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, फेसबुक पर रोजाना 4 पेटाबाइट्स (1,000 टीबी) डेटा तैयार हो रहा है. वॉट्सऐप पर 65 अरब मैसेज भेजे जा रहे हैं और 5 अरब बार सर्च किया जा रहा है.

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  • Last Updated: October 15, 2019, 3:35 PM IST
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नई दिल्ली. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स की प्राइवेसी पर अक्सर सवाल उठते रहते हैं. निजी जानकारी के गलत इस्तेमाल के कई मामले सामने भी आ चुके हैं. दरअसल, टेक कंपनियों के लिए यूज़र्स का पर्सनल डेटा एक प्रॉपर्टी की तरह है, जिसपर वो ज्यादा से ज्यादा कंट्रोल हासिल करना चाहते हैं. एक अनुमान के मुताबिक, साल 2025 तक दुनियाभर में प्रतिदिन 463 एक्साबाइट (ईबी) डेटा बनने लगेगा. यह डेटा 22 करोड़ डीवीडी के बराबर है. ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जंग भौतिक संसाधनों (Physical Resources) के लिए नहीं, बल्कि अरबों डिजिटल प्रिंट्स और पर्सनल डेटा के लिए लड़ी जाएंगी.

डिजिटल दुनिया के 2020 तक 44 जेटाबाइट्स तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई है. एक जेटाबाइट में लगभग 1,000 ईबी, 10 लाख टेराबाइट (टीबी) या एक लाख करोड़ जीबी के बराबर डेटा होता है.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की वेबसाइट पर प्रकाशित वेंकूवर की मीडिया साइट विजुअल केपिटलिस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, फेसबुक पर रोजाना 4 पेटाबाइट्स (1,000 टीबी) डेटा तैयार हो रहा है. वॉट्सऐप पर 65 अरब मैसेज भेजे जा रहे हैं और 5 अरब बार सर्च किया जा रहा है. अगर हम आज के हिसाब से देखें, तो दुनियाभर में प्रतिदिन 50 करोड़ ट्वीट्स किए जाते हैं और 29.4 करोड़ मेल भेजे जाते हैं.

यूजर्स को ऐसे लुभाने की होती है कोशिश

इतने बड़े पैमाने पर आंकड़े होने पर टेक कंपनियों ने यूजर्स की निजी जानकारी पर अधिक से अधिक कब्जा कर उसका एनालिसिस करने, उसका डिस्ट्रिब्यूशन निकालने और मार्केटरों जैसे लोगों से साझा करने के लिए हाथ-पैर मार रही हैं. मार्केटिंग डिपार्टमेंट उस प्राप्त जानकारी से विज्ञापनों और पब्लिसिटी कंटेंट बनाकर 24 घंटे आपको प्रभावित करती हैं. इस समय चल रहीं एंटी-ट्रस्ट जांच और प्राइवेसी संबंधी जांचों के बीच जब ऑनलाइन यूजर्स की बात आती है, तो फेसबुक और गूगल जैसी टेक कंपनियां इसमें सबसे आगे हैं.

बता दें कि दुनियाभर में 2.41 अरब सक्रिय मासिक यूजर्स के तौर पर फेसबुक सबसे बड़ा सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म है. इसके साथ वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम भी हैं. ऐसे में आप हमारे डिजिटल जीवन में इसके दखल की कल्पना कर सकते हैं.

क्या कहती है वर्ल्ड एडवरटाइजिंग रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट?वर्ल्ड एडवरटाइजिंग रिसर्च सेंटर (WARC) के अनुसार, ग्लोबल ऑनलाइन विज्ञापन बाजार में गूगल और फेसबुक की हिस्सेदारी पिछले साल के 56.4 फीसदी से बढ़कर इस साल 61.4 फीसदी हो जाएगी.

दूसरी तिमाही में फेसबुक का राजस्व 16.62 अरब डॉलर और गूगल का राजस्व 32.6 अरब डॉलर था. मार्केट रिसर्च कंपनी ईमार्केटर के अनुसार, वैश्विक डिजिटल विज्ञापन खर्च के इस साल बढ़कर 333.25 अरब डॉलर होने की संभावना है. बता दें कि आज अरबों लोग फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर और स्नैपचैट पर अपनी भावनाएं साझा करते हैं, जो विज्ञापनकर्ताओं के लिए भविष्य का बड़ा बाजार है.

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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First published: October 15, 2019, 3:31 PM IST
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