26 जनवरी को आखिरी बार होगी Flipkart, Amazon की सेल, फिर नहीं मिलेगा डिस्काउंट

प्रतीकात्मक फोटो

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सरकार ने फ्लिपकार्ट, अमेजन जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों को लेकर नए नियम जारी किए हैं जिसमें अब कोई भी कंपनी ख़ास रियायत नहीं दे सकती है

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  • Last Updated: December 27, 2018, 6:29 PM IST
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अगर आप भी ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं और बड़े शॉपिंग सेल्स व शॉपिंग फेस्टिवल का इंतजार करते हैं तो आपके लिए बुरी खबर है, हो सकता है नए साल की शुरुआत से आपको ऐसे सेल का ऑप्शन ना मिले और आप कैशबैक और बंपर डिस्काउंट न पा सकें. जी हां सरकार ने फ्लिपकार्ट, अमेजन जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों को लेकर नए नियम जारी किए हैं जिसमें अब कोई भी कंपनी ख़ास रियायत नहीं दे सकती है. ऐसे में कैशबैक, एक्सक्लूसिव सेल या किसी पोर्टल पर एक ब्रैंड के लॉन्च, अमेज़न प्राइम और फ्लिपकार्ट एश्योर्ड जैसी डील्स या किसी तरह की खास सेवा देने में अब कंपनियों को परेशानी हो सकती है.



ई-कॉमर्स कंपनियां नहीं कर सकेंगी ये काम

सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) वाली ई-कॉमर्स कंपनियों के लिये प्रावधानों को सख्त कर दिया. अब फ्लिपकार्ट और अमेजॉन जैसे ऑनलाइन बाजार मंच उन कंपनियों के उत्पाद नहीं बेच पाएंगी जिनमें इनकी हिस्सेदारी है. इसके अलावा सरकार ने ऑनलाइन बाजार का परिचालन करने वाली कंपनियों पर उत्पादों की कीमत प्रभावित कर सकने वाले कॉन्ट्रैक्ट की रोक लगा दी है. इससे वे किसी यूनिट के साथ उसके किसी उत्पाद को केवल अपने प्लेटफॉर्म पर बेचने का कॉन्ट्रैक्ट नहीं कर सकेंगे. (ये भी पढ़ेंः आपके मोबाइल में इंस्टॉल इन 5 बड़े ऐप्स पर बैन लगाएगी मोदी सरकार?)



छोटे कारोबारियों को हो सकता है फायदा
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने ऑनलाइन खुदरा कारोबार में एफडीआई के बारे में संशोधित नीति में कहा कि इन कंपनियों को अपने सभी वेंडरों को बिना भेदभाव किये समान सेवाएं एवं सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी. मंत्रालय ने कहा कि संशोधित प्रवधान का लक्ष्य घरेलू कंपनियों को उन ई-कंपनियों से बचाना है जिनके पास एफडीआई के जरिए बड़ी पूंजी उपलब्ध है.





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कंपनियां कीमत को नहीं कर सकेंगी प्रभावित

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ''इस कदम से ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा कीमतों को प्रभावित करने पर पूरी तरह से लगाम लगेगी. इससे ई-कॉमर्स कंपनियों के मामले में एफडीआई दिशानिर्देशों का बेहतर क्रियान्वयन भी सुनिश्चित होगा.'' नीति के अनुसार, कोई भी वेंडर अधिकतम 25 प्रतिशत उत्पादों को ही किसी एक ऑनलाइन मार्केटप्लेस के जरिए बेच सकेंगे. इसके अलावा यह भी कहा गया है कि ई्-कॉमर्स कंपनी किसी भी बिक्रेता को अपना कोई उत्पाद सिर्फ अपने मंच के जरिए बेचने के लिए बाध्य नहीं कर सकती हैं.



ई-कॉमर्स कंपनियों ने किया फैसले का स्वागत

स्नैपडील के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कुनाल बहल ने इसकाका स्वागत करते हुए ट्वीट किया, ''मार्केटप्लेस ईमानदार एवं स्वतंत्र बिक्रेताओं के लिए है जिनमें से अधिकांश एमएसएमई हैं. ये बदलाव सभी बिक्रेताओं को बराबर मौके देंगे तथा उन्हें ई-कॉमर्स की पहुंच का फायदा उठाने में मदद मिलेगी.''



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खुदरा कारोबारियों के संगठन कैट ने कहा कि यदि इन बदलावों का ईमानदारी से क्रियान्वयन किया गया तो कीमतों को प्रभावित करने वाले कदम और ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा दी जाने वाली अतिरिक्त छूट आदि इतिहास की चीजें हो जाएंगी. कैट ने ई-कॉमर्स नीति लाने तथा क्षेत्र पर निगरानी के लिये एक नियामक बनाने की भी मांग की.



1 फरवरी, 2019 से लागू होगा नियम

इस नियम को 1 फरवरी, 2019 से लागू किया जाएगा. मंत्रालय के अनुसार उन्होंने यह फैसला ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा कस्टमर्स को भारी छूट दिए जाने के खिलाफ घरेलू कारोबारियों की आपत्तियों के मद्देनज़र यह फैसला लिया है.
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