सावधान! यह वायरस चुपके से खींच लेता है आपकी फोटो, कर लेता है वीडियो रिकॉर्डिंग

आप फोन पर जो कुछ भी टाइप करते हैं उसे भी यह रिकॉर्ड कर लेता है. इस तरह से आपके स्मार्टफोन में मौजूद हर चीज़ का पता इस वायरस को चल जाता है.

News18Hindi
Updated: July 25, 2019, 12:51 PM IST
सावधान! यह वायरस चुपके से खींच लेता है आपकी फोटो, कर लेता है वीडियो रिकॉर्डिंग
आप फोन पर जो कुछ भी टाइप करते हैं उसे भी यह रिकॉर्ड कर लेता है. इस तरह से आपके स्मार्टफोन में मौजूद हर चीज़ का पता इस वायरस को चल जाता है.
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Updated: July 25, 2019, 12:51 PM IST
मोबाइल सिक्यॉरिटी फर्म Lookout ने एक ऐसे एंड्रॉयड मेलवेयर का पता लगाया है जो कि आपके फोन में घुसकर न सिर्फ आपका पूरा डेटा चुरा लेता है बल्कि चुपके से यह आपकी फोटो भी क्लिक कर सकता है और आपकी वीडियो भी बना सकता है. आपको इसकी भनक भी नहीं लगेगी. यही नहीं आप फोन पर जो कुछ भी टाइप करते हैं उसे भी यह रिकॉर्ड कर लेता है. इस तरह से आपके स्मार्टफोन में मौजूद हर चीज़ का पता इस वायरस या मैलवेयर को चल जाता है. इस वायरस का नाम Monokle है.

वास्तव में यह एक मैलवेयर नहीं है बल्कि कस्टम ऐंड्रॉयड सर्विलांस टूल्स का एक सेट है. जिस तरीके से किसी पर भी नज़र रख सकता है उसे देखते हुए इसे मौजूदा हालात में सबसे खतरनाक मैलवेयर कहा जा सकता है. दावा किया जा रहा है कि इसे रूस की एक कंपनी स्पेशल टेक्नॉलजी सेंटर ने डिवेलप किया है.

टारगेट बनाकर चुराता है डेटा-
मोबाइल सिक्यॉरिटी फर्म लुकआउट ने एक ब्लॉग पोस्ट में इस बारे में लिखा, 'लुकआउट ने इस वायरस Monokle का पता साल 2018 में लगाया था और रिसर्च के दौरान हमें पता चला कि ये टूल्स कुछ टारगेटेड कैंपेन का हिस्सा हैं और इन्हें रूस के पीटर्सबर्ग की कंपनी स्पेशल टेक्नॉलजी सेंटर (एसटीसी) ने डिवेलप किया है. इस कंपनी का नाम 2016 के यूएस प्रेसीडेंशियल इलेक्शन में जीआरयू को मटीरियल सपोर्ट देने में भी सामने आया था.' रिसर्चर्स ने कहा, 'मोनोकल रिमोट ऐक्सेस ट्रोजन (रैट) फंक्शन की मदद से अडवांस डेटा एकफिल्टरेशन टेक्निक इस्तेमाल करता है. इस तरह इन्फेक्टेड डिवाइस के ट्रस्टेड सर्टिफिकेट्स की जगह यह अटैकर-स्पेसिफाइड सर्टिफिकेट इंस्टॉल कर देता है.'

खोलता है बाकी अटैक्स का रास्ता-
रिसर्चर्स का कहना है कि ट्रस्टेड सर्टिफिकेट की जगह यह दूसरे सर्टिफिकेट को इन्स्टॉल कर देता है जिसके बाद MITM यानी मैन-इन-द-मिडिल का रास्ता खुल जाता है. कुछ दिन पहले भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था जब इज़रायल की कंपनी एनएसओ ग्रुप की ओर से बनाए गए मैलवेयर Pegasus का अपडेटेड वर्जन यूजर्स का गूगल, फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट, ऐमजॉन और ऐपल आईक्लाउड तक के सर्वर में स्टोर डेटा चुरा सकता है.

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First published: July 25, 2019, 12:49 PM IST
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