कैसे खत्म हो सकता है 'सर्च' पर गूगल का एकाधिकार

आज दुनियाभर में बड़ी टेक कंपनियों के खिलाफ कुछ सख्त कदम उठाने को लेकर मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है. इन बड़ी कंपनियों में सबसे ऊपर गूगल और फेसबुक का ही नाम आ रहा है

News18Hindi
Updated: July 15, 2019, 8:54 PM IST
कैसे खत्म हो सकता है 'सर्च' पर गूगल का एकाधिकार
गूगल (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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Updated: July 15, 2019, 8:54 PM IST
आज दुनियाभर में बड़ी टेक कंपनियों के खिलाफ कुछ सख्त कदम उठाने को लेकर मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है. इन बड़ी कंपनियों में सबसे ऊपर गूगल और फेसबुक का ही नाम आ रहा है. ब्लूमबर्ग बिजनेसवीक पर छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोपियन यूनियन 2017 से गूगल पर फाइन लगा रहा है, जो कि अब 8 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा हो चुका है. वहीं फेसबुक रेप्यूटेशन को लेकर अमेरिका में 100 मोस्ट विजिबल कंपनियों में बेहद नीचे पहुंच चुका है.

इन कंपनियों के पूर्व कर्मचारियों तक ने कहा है कि ये कंपनियां सामाजिक ताने-बाने को बड़ा नुकसान पहुंचा रही हैं और साथ ही लोगों के दिमाग भी हाईजैक कर रही हैं. आज गूगल और फेसबुक ने समाज के सामने कई बड़े खतरे खड़े कर दिए हैं. इनमें से तीन बड़े खतरे हैं- आक्रामक निगरानी करना, सामग्री (कन्टेंट) का दमन और 250 करोड़ से ज्यादा लोगों की सोच और बर्ताव को बदलना.

google

आज गूगल से टक्कर लेना इसलिए भी आसान नहीं है, क्योंकि उसने सर्च के मामले में अपनी मोनोपोली बना ली है. गूगल 92 परसेंट सर्च को कंट्रोल करता है, जो कि उसके सबसे बड़े कंप्टीटर माइक्रोसॉफ्ट बिंग (2.5%) से बहुत ज्यादा है. लेकिन कंपनी की इस मोनोपोली को खत्म करने का एक आसान तरीका है और वो ये है कि गूगल के 'इंडेक्स' यानी डेटाबेस को सार्वजनिक कर दिया जाए. इंटरनेट के जरिए गूगल का डेटाबेस हर दिन तेज रफ्तार से बढ़ता ही जा रहा है.

गूगल की बिजनेस प्रेक्टिसेस और कानून दोनों में ही ये प्रावधान है कि जब कोई जरूरी रिसोर्सेस (पानी, बिजली, टेलीकम्यूनिकेशन) वाली प्राइवेट कंपनी समाज के हित में न काम करे, तो सरकार उनपर लगाम लगा सकती है.

google (file photo)

गूगल एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस यानी एपीआई के जरिए बहुत से उद्योगों, नॉन प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशंस और यहां तक की व्यक्तियों को भी अपना इंडेक्स शेयर करता है. उसने इस तरह की शेयरिंग 'स्टार्टपेज' जैसी छोटी मगर चालाक कंपनियों को भी की है. गूगल ने स्टार्टपेज के सर्च रिजल्ट के पास एड्स के जरिए जनरेट होने वाली फीस के बदले, स्टार्टपेज को इंडेक्स दिया है.
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इस सब के बीच सोचने वाली बात ये है कि अगर गूगल का एकाधिकार खत्म करना इतना ही जरूरी है, तो फिर अभी तक इसे लेकर बड़े पैमाने पर दुनियाभर में सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है. अगर गूगल की सर्च पर मोनोपोली खत्म होती है, तो उसके साथ न जाने कितना डेटा भी खत्म हो जाएगा. ये सोचने वाली बात है कि ऐसा करना ठीक होगा या नहीं.

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First published: July 15, 2019, 8:54 PM IST
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