TV देखने वालों के लिए खुशखबरी! जल्द आसान होगा चैनल सेलेक्ट करना और बिल भी देना होगा कम

TV देखने वालों के लिए खुशखबरी! जल्द आसान होगा चैनल सेलेक्ट करना और बिल भी देना होगा कम
आने वाले समय में TV देखना सस्ता हो सकता है

ट्राई (TRAI) के TV देखने के नियम बदले हुए कुछ समय हो गया है, मगर अभी भी कई लोग ऐसे हैं जिन्हें चैनल चुनने और पेमेंट करने में दिक्कत आती है. ऐसे में प्राधिकरण ने यूज़र्स की समस्याओं को हल करने का फैसला किया है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 25, 2019, 10:30 AM IST
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ट्राई (TRAI) के TV देखने के नियम बदले हुए कुछ समय हो गया है, मगर अभी भी कई लोग ऐसे हैं जिन्हें चैनल चुनने और पेमेंट करने में दिक्कत आती है. ऐसे में प्राधिकरण ने यूज़र्स की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नए थर्ड पार्टी ऐप(third party app) बनाने का फैसला किया है. हाल ही में प्राधिकरण ने 2017 में पेश किए गए नए ब्रॉडकास्टिंग एंड केबल सर्विसेज (broadcasting and cable services) में अमेंडमेंट करने का भी प्रस्ताव रखा है.

प्राधिकरण के लगातार प्रयास के बावजूद कई यूज़र्स को चैनल सेलेक्ट करने में परेशानी हो रही है. प्राधिकरण ने एक विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि कई यूज़र्स को चैनल सेलेक्ट करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और वो अपनी पसंद के चैनल्स नहीं चुन पा रहे हैं.

ट्राई का कहना है कि ऐप आने से ग्राहक आसानी से अपने पैक सेलेक्ट कर पाएंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि थर्ड पार्टी ऐप ब्रॉडकास्टिंग और केबल सर्विस सेक्टर से जुड़े सभी कस्टमर तक आसानी से पहुंच पाएगा. थर्ड पार्टी ऐप्स की फंक्शनिंग को सपॉर्ट करने के लिए ट्राई की ओर से चैनल सेलेक्शन सिस्टम एपीआई स्पेसिफिकेशन डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है, जिससे डिस्ट्रीब्यूशन प्लैटफॉर्म ऑपरेटर्स (DPO) के कॉमन API जुड़े हैं. इसकी मदद से थर्ड पार्टी यूज़र्स के लिए ऐप डेवलप कर सकेगी. फिलहाल इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि ये ऐप कब लॉन्च किया जाएगा.



सस्ता हो सकता है TV देखना
DTH और केबल की सेवाएं महंगी होने की शिकायतों के बाद TRAI ने ब्रॉडकास्टिंग और केबल इंडस्ट्री के टैरिफ की दोबारा समीक्षा करने का फैसला किया है. इसके लिए ट्राई ने नया कन्सल्टेशन पेपर जारी किया है ताकि ब्रॉडकास्टिंग और टैरिफ संबंधी परेशानियों का कोई हल निकाला जा सके. बता दें कि ट्राई ने मार्च 2017 में नया रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क तैयार किया था, जो 29 दिसंबर 2018 से लागू हुआ.

इसका विश्लेषण करने पर पता चला कि नए नियमों के बाद चैनल की कीमतों में पारदर्शिता आई और स्टेकहोल्डर्स के बीच मौजूद विवाद को कम किया जा सका. बावजूद इसके कंज्यूमर्स को टीवी चैनल चुनने के पर्याप्त आजादी नहीं मिली. अथॉरिटी ने कहा कि ऐसा पाया गया है कि किसी बुके पर 70 फीसदी तक का भी डिस्काउंट दिया जाता है जिसकी वजह से ग्राहक अपने पसंद का चैनल नहीं चुन पाते हैं.
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