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ट्विटर पर दक्षिणपंथी ट्वीट्स को मिल रही ज्यादा तरजीह, वजह जानने में जुटी कंपनी

ट्विटर पर दक्षिणपंथी ट्वीट्स को मिल रही ज्यादा तरजीह, वजह जानने में जुटी कंपनी

इस अध्ययन में पता चला कि मुख्यधारा की दक्षिणपंथी पार्टियों के ट्वीट्स को वामपंथी विचारधारा वाली पार्टियों के मुकाबले ज्यादा प्राथमिकता मिल रही है.

इस अध्ययन में पता चला कि मुख्यधारा की दक्षिणपंथी पार्टियों के ट्वीट्स को वामपंथी विचारधारा वाली पार्टियों के मुकाबले ज्यादा प्राथमिकता मिल रही है.

रिसर्च करने वाली टीम का कहना है कि उसने ट्विटर के एल्गोरिद्म पर अध्ययन किया, जिसमें यह पता चला कि ट्विटर अपने यूजर्स को दक्षिणपंथी विचारधारा वाली पार्टियों के ट्वीट्स को ज्यादा तरजीह देता है.

    नई दिल्ली. ट्विटर का एल्गोरिद्म दक्षिणपंथी पार्टियों के ट्वीट्स को ज्यादा प्राथमिकता देता है. एक रिसर्च में यह बात निकलकर सामने आई है. रिसर्च करने वाली टीम का कहना है कि उसने ट्विटर के एल्गोरिद्म पर अध्ययन किया, जिसमें यह पता चला कि ट्विटर अपने यूजर्स को दक्षिणपंथी विचारधारा वाली पार्टियों के ट्वीट्स को ज्यादा तरजीह देता है.

    कंपनी ने दुनिया के सात देशों कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, स्पेन, ब्रिटेन और अमेरिका पर यह अध्ययन किया है. इन देशों की राजनीतिक पार्टियों द्वारा 1 अप्रैल 2020 से लेकर 15 अगस्त तक ट्विटर पर शेयर की गईं सामग्रियों की जांच की गई. इसमें यह पता लगाया गया कि ट्विटर का एल्गोरिद्म कौन से ट्वीट को ज्यादा प्रमोट कर रहा है. इस अध्ययन में पता चला कि मुख्यधारा की दक्षिणपंथी पार्टियों के ट्वीट्स को वामपंथी विचारधारा वाली पार्टियों के मुकाबले ज्यादा प्राथमिकता मिल रही है.

    ट्विटर मेटा टीम की निदेशक रुम्मन चौधरी ने बताया कि हमें यह पता चला है कि वामपंथी दलों की तुलना में दक्षिणपंथी विचारधारा वाले ट्वीट्स को ट्विटर का एल्गोरेद्मि ज्यादा आगे बढ़ रहे हैं. चौधरी ने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘ट्विटर एक सामाजिक-तकनीकी प्रणाली है… जो हो रहा है उसके लिए हमारे एल्गो जिम्मेदार हैं. अब इसके मूल कारण का विश्लेषण करना है कि क्या यह मॉडल अनपेक्षित रूप से पूर्वाग्रह से ग्रस्त है? या यह दुनिया में हो रही घटनाओं को लेकर लोगों के ट्वीट्स के आधार पर काम कर रहा है? या फिर इसके पीछे दोनों वजह हो सकती हैं.’

    उन्होंने कहा कि हम इसका कारण पता करने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, अभी इन सवालों का जवाब देना काफी कठिन है.

    हालांकि यह पहला मौका नहीं जब ट्विटर के एल्गोरिद्म पर सवाल उठे हैं. इससे पहले अप्रैल में भी हुई एक स्टडी में सामने आया था कि अश्वेत लोगों के मुकाबले ट्विटर गोरे व युवा चहरों को ज्यादा तरजीह देता है. रिसर्च में पता चला था कि जब एक तस्वीर में दो चेहरे होते हैं, तब प्रीव्यू के लिए ट्विटर उस तस्वीर को चुनता है जो दोनों में अपेक्षाकृत गोरे होते हैं. इसके बाद ट्विटर ने अपनी नीति में बदलाव किया था और साथ ही कहा था कि यूजर्स अपनी तस्वीर को खुद एडिट करे तो बेहतर है.

    Tags: Twitter, Twitter Account, Twitter Controversy

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