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आधार जारी करने वाली UIDAI 15 सितंबर से शुरू कर रही ये नई सुविधा

News18Hindi
Updated: August 18, 2018, 6:24 PM IST
आधार जारी करने वाली UIDAI 15 सितंबर से शुरू कर रही ये नई सुविधा
फेस रेकग्निशन सत्यापन का एक अतिरिक्त माध्यम होगा.

फेस रेकग्निशन की शुरुआत टेलीकॉम सर्विस देने वाली कंपनियों से होगी और यह 15 सितंबर से शुरू होगा.

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  • Last Updated: August 18, 2018, 6:24 PM IST
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आधार जारी करने वाली संस्था UIDAI ने आखिरकार फेस रेकग्निशन (चेहरे से पहचान) को चरणबद्ध तरीके से लाने की घोषणा कर दी है. फेस रेकग्निशन सत्यापन का एक अतिरिक्त माध्यम होगा. फेस रेकग्निशन की शुरुआत टेलीकॉम सर्विस देने वाली कंपनियों से होगी और यह 15 सितंबर से शुरू होगा. आधार जारी करने वाली UIDAI की पहले 1 जुलाई 2018 से फेस रेकग्निशन फीचर लाने की योजना थी. बाद में इस तारीख को आगे बढ़ाकर 1 अगस्त 2018 कर दिया गया.

तय लक्ष्य न पूरा करने पर लगा सकता है जुर्माना
आधार की नोडल एजेंसी UIDAI का निर्धारित लक्ष्य न पूरा करने वाली टेलीकॉम कंपनियों पर जुर्माना लगाने का भी प्रस्ताव है. यह अगले महीने मध्य से शुरू होगा. टेलीकॉम सर्विस उपलब्ध कराने वाली कंपनियों (TSP) के अलावा दूसरी सत्यापन करने वाली एजेंसियों के लिए UIDAI ने कहा है कि उनके लिए फेस रेकग्निशन फीचर लागू करने की खातिर खास दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे. हालांकि, UIDAI ने इसके लिए कोई समय सीमा नहीं निर्धारित की है.

मोबाइल कंपनियां ऐसे करेंगी फेस रेकग्निशन का इस्तेमाल

यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने कहा है, 'जिन मामलों में मोबाइल सिम लेने के लिए आधार का इस्तेमाल किया गया है, उनमें चेहरे का मौके पर फोटो लेना (लाइव फेस फोटो कैप्चर) और इसका eKYC में लिए गए फोटो के साथ मिलान (वैरिफिकेशन) जरूरी होगा.' UIDAI ने कहा है कि इस कदम का मकसद फर्जी फिंगरप्रिंट या क्लोनिंग की संभावना को रोकना. साथ ही, मोबाइल सिम जारी करने और उसे एक्टिवेट करने से जुड़ी प्रक्रिया को सख्त करना और हर लिहाज से सुरक्षित बनाना है. इस साल जून में हैदराबाद के एक मोबाइल सिम कार्ड डिस्ट्रीब्यूटर ने हजारों सिम को एक्टिवेट करने में फर्जी आधार डिटेल्स का इस्तेमाल किया था.

UIDAI के सीईओ अजय भूषण पांडेय ने बताया, 'लाइव फेस फोटो को eKYC के फोटो से मिलाने के निर्देश उन मामलों में लागू होंगे, जहां सिम लेने में आधार का इस्तेमाल किया गया है. अगर सिम किसी दूसरे आइडेंटिटी पर जारी हुआ है तो यह दिशा-निर्देश लागू नहीं होंगे.' UIDAI की तरफ से प्रस्तावित दो-स्तरीय सत्यापन प्रक्रिया के तहत अगर कोई व्यक्ति अपना आधार नंबर उपलब्ध कराता है तो फिंगरप्रिंट या आइरिया और चेहरे का इस्तेमाल करते हुए सत्यापन किया जाएगा. अगर कोई व्यक्ति वर्चुअल ID उपलब्ध कराता है तो सत्यापन फिंगरप्रिंट या आइरिस से किया जा सकता है.

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First published: August 18, 2018, 6:20 PM IST
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