4G के बाद अब आएंगे 5G वाले स्मार्टफोन! जानिए क्या होगा इनमें खास

आने वाली 5जी टेक्नॉलजी में डेटा का रेट काफी फास्ट होगा. बताया जा रहा है कि इसमें डेटा रेट 4जी की तुलना में 100 गुना ज्यादा होगा.

Shiv Pandey | News18Hindi
Updated: June 10, 2019, 12:48 PM IST
Shiv Pandey | News18Hindi
Updated: June 10, 2019, 12:48 PM IST
5 जी टेक्नॉलजी को लेकर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है. कई देशों में इसकी टेस्टिंग भी की जा रही है. चीन ने इसके कमर्शियल इस्तेमाल को लेकर हरी झंडी दे दी है. इसके बाद भारत में भी इस तकनीक को लाने को लेकर कवायद शुरू हो गई है. इस टेक्नॉलजी का आना विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में एक नए युग के आरंभ जैसा होगा. हाल ही में कुछ महीने पहले सैमसंग ने अपना पहला 5जी स्मार्टफोन साउथ कोरिया में लॉन्च किया था, वहीं सैमसंग के अलावा चिपसेट निर्माता कंपनी क्वॉलकॉम और हुवावे जैसी कंपनियां भी 5जी को लेकर काम कर रही हैं.

भारत में 100 दिनों के अंदर शुरू होगा 5जी का ट्रायल


बता दें कि हाल ही में केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को पद ग्रहण करने के बाद कहा कि हमारा पहला लक्ष्य 100 दिन के भीतर देश में 5जी का ट्रायल शुरू करना है. उन्होंने कहा कि सरकार इस साल 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी करने को प्रतिबद्ध है.

साथ ही कई रेडियो फ्रीक्वेंसी की भी नीलामी की जाएगी. ट्राई ने भी 5जी समेत करीब 8,644 मेगाहर्ट्ज टेलीकॉम फ्रीक्वेंसी की नीलामी की सिफारिश भेजी है. इससे करीब 5 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है. इसके अलावा देश भर में 5 लाख वाई-फाई हॉटस्पॉट बनाने की योजना पर भी तेजी से काम किया जाएगा.

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खबर यह भी थी कि बीएसएनएल ने अमेरिका की नेटवर्किंग सेवा देने वाली कंपनी 'सिएना' के साथ करार किया है. ये करार कंपनी की 5जी सेवाओं की फील्ड ट्रायल के लिए किया गया है. अगले कुछ हफ्तों तक अलग-अलग नेटवर्क इलाकों वाली जगहों पर 5जी सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए दोनों कंपनियां मिलकर काम करेंगी.

क्या है 5जी नेटवर्क
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5जी मोबाइल फोन वायरलेस सेवा की पांचवी पीढ़ी है. पिछली जेनरेशन की तुलना में इसकी स्पीड काफी अच्छी होगी. 5जी टेक्नोलॉजी के बाद इंटरनेट के उपयोगकर्ताओं को डेटा की हाई डेन्सिटी मिलने लगेगी, बेहतर कवरेज मिलेगा और मोबाइल उपकरणों की बैटरी भी कम खर्च होगी. मई 2013 से ही इस टेक्नोलॉजी पर काम शुरू हो गया था.

5जी जिस तरह से तैयार किया जा रहा है उसके मुताबिक यह मौजूदा एलटीई नेटवर्क पर काम कर सकेगा. एक अनुमान के अनुसार साल 2025 तक दुनिया की एक-तिहाई आबादी को 5जी नेटवर्क का कवरेज मिलेगा.

5जी कैसे है पहले की तकनीक से बेहतर-
लगातार 5जी को लेकर हो रही बातों के बीच सभी के मन में एक बात उठती है कि आखिर इसके फायदे क्या हैं. दरअसल, 1G तकनीक 1980 में लॉन्च हुई थी. यह फर्स्ट जेनरेशन वायरलेस तकनीक थी जो कि केवल वाइस कॉल को सपोर्ट करती थी. इसके बाद साल 1991 में 2जी तकनीक आई. इसमें खास बात यह थी कि अब वॉइस कॉल के साथ-साथ टेक्स्ट मैसेज भी भेजा जा सकता था. 2जी की अधिकतम स्पीड 50 kbps थी.

साल 1998 में 3जी नेटवर्क आया. इसमें डेटा ट्रांसमिशन की स्पीड काफी हाई थी. इससे वीडियो कॉलिंग के साथ-साथ इंटरनेट एक्सेस करना भी संभव हो गया. 3जी की अधिकतम स्पीड 2 mbps के लगभग थी. इसके बाद साल 2008 में आई 4जी टेक्नॉलजी. इसकी स्पीड 1Gbps थी.

आने वाली 5जी टेक्नॉलजी में डेटा का रेट काफी फास्ट होगा. बताया जा रहा है कि इसमें डेटा रेट 4जी की तुलना में 100 गुना ज्यादा होगा. इसका मतलब है कि 5जी कनेक्शन पर डाउनलोड स्पीड 2.5 गीगाबाइट प्रति सेकेंड होगी जबकि अपलोड स्पीड 1.25 गीगाबाइट प्रति सेकेंड होगी. इसको इस तरह से समझा जा सकता है कि मान लीजिए अगर आप 3 जीबी की कोई मूवी डाउनलोड करना चाहते हैं तो अगर इसे 3 जी नेटवर्क पर डाउनलोड करेंगे तो यह 1 घंटे 8 मिनट में डाउनलोड होगी. अगर 4जी पर डाउनलोड करेंगे तो 40 मिनट में डाउनलोड हो जाएगी और अगर 5जी पर डाउनलोड करेंगे तो सिर्फ 35 सेकेंड लगेंगे.



क्या हैं 5जी के फायदे-
. बैटरी की खपत काफी घट जाएगी. जिसकी वजह से बैटरी की लाइफ बहुत बढ़ जाएगी.
. नेटवर्क की एनर्जी 90 फीसदी तक घट जाएगी.
. कई डिवाइस को एक साथ जोड़ा जा सकेगा.
. लंबी दूरी तक के लिए भी हायर स्पीड पर डेटा को भेजा जा सकेगा.
. 3 घंटे की एचडी मूवी 1 सेकेंड से कम समय में डाउनलोड हो जाएगी.
. इसकी मदद से घर के सिक्योरिटी सिस्टम को चलाया जा सकेगा.

भारत को कैसे पहुंचेगा फायदा-
5जी आने के बाद भारत के डिजिटल मार्केट पर काफी प्रभाव पड़ेगा. मौजूदा समय में भारत आईटी सेक्टर में काफी तेजी से विकास कर रहा है. तेज़ कनेक्टिविटी और संचार माध्यमों में तेजी से विकास होने के कारण भारत की जीडीपी तेज़ी से बढ़ेगी.

5 जी की वजह से भारत को तमाम आर्थिक फायदे होने वाले हैं. अनुमान है कि इसकी वजह से वैश्विक स्तर पर 2035 तक 3.5 ट्रिलियन डॉलर का रेवेन्यू जेनेरेट होगा कम से कम 2.2 करोड़ नौकरियां जेनरेट होंगी. ज़ाहिर है भारत को भी इससे लाभ होगा. साथ ही भारत अपने मेक इन इंडिया को डिजिटल इंडिया के साथ कनेक्ट करके भी देश के विकास को गति दे सकता है.

इससे पहले भारत सरकार ने 5 जी नेटवर्क शुरू करने के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए थे. भारत इसके माध्यम से आने वाले पांच से सात सालों में अंतर-राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी वस्तुओं के मैन्युफेक्चरिंग को लेकर भारतीय बाज़ार का 50 फीसदी और अतंर-राष्ट्रीय बाज़ार का 10 फीसदी कैप्चर करना चाहता है. 5जी तकनीक इसमें काफी मददगार साबित होगी.

डिजिटल इकोनॉमकि पॉलिसी पर बनी ओईसीडी की एक कमिटी के मुताबिक 5जी टेक्नॉलजी की वजह से जीडीपी ग्रोथ रेट बढ़ने के साथ-साथ रोज़गार और डिजिटलाइज़ेशन में भी बढ़ोत्तरी होगी.

इन इड्स्ट्रीज़ पर पड़ेगा प्रभाव-
इंटरटेनमेंट एंड मीडिया- 5जी की वजह से हाई क्वालिटी वीडियो स्ट्रीमिंग हो पाएगी. इसके अलावा मोबाइल वर्चुअल रियलिटी गेमिंग की भी क्वालिटी ज्यादा अच्छी हो पाएगी.

ऑटोमोटिव- 5जी की सहायता से सेल्फ ड्राइविंग कार को भारत में लॉन्च करने में मदद मिलेगी. क्योंकि ऐसी कारों के लिए ज्यादा से ज्यादा डेटा बहुत कम समय में ट्रांसफर होना चाहिए. हालांकि, इसके लिए सरकार को पहले इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देना होगा. पर इस दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है.

हेल्थकेयर- 5जी आ जाने के बाद टेलीमेडिसिन के क्षेत्र में भी काफी प्रोग्रेस होगी. इससे न सिर्फ ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक हेल्थकेयर को पहुंचाया जा सकेगा बल्कि रोबोटिक सर्जरी भी की जा सकेगी. टेक्नॉलजी की एक खासियत यह होती है कि इससे गलतियां होने की संभावना काफी कम होती हैं और एक्युरेसी रेट काफी अच्छा होता है.

एग्रीकल्चर- 5जी की वजह से एग्रीकल्चर की फील्ड में भी भारत को काफी फायदा मिल सकता है. इसके माध्यम से उपकरणों से पता लगाया जा सकता है कि खेत की मिट्टी की क्या स्थिति है जिससे सही मात्रा में फर्टिलाइज़र, पानी और पेस्टीसाइड्स प्रयोग करके पैदावार को बढ़ाया जा सकेगा. पानी की कमी जिस तरह से आज कल समस्या बनती जा रही है उसे देखते हुए सिंचाई के लिए ज़रूरी पानी ही खेतों तक पहुंचाया जाएगा जिस पानी की बर्बादी को भी रोका जा सकेगा.



होम ऑटोमेशन और ऊर्जा मैनेजमेंट- होम ऑटोमेशन के ज़रिए एनर्जी की काफी बचत की जा सकेगी. जैसे- मान लीजिए कि आपको वॉशिंग मशीन से कपड़े धोने हैं तो आप इसमें टाइम सेट कर सकते हैं कि मशीन शाम को चार बजे से चलकर पांच बजे तक बंद हो जाए. इसी तरह से घर के दूसरे उपकरणों पंखा, एसी, फ्रिज के लिए भी टाइमर सेट किया जा सकता है. कुल मिलाकर कहा जाए तो जहां-जहां सेंसर्स यूज़ हो सकते हैं वहां-वहां हर जगह इसका प्रयोग किया जा करके लाभ लिया जा सकता है.

हो सकता है इस टेक्नॉलजी के आने के बाद इसके फायदों को देखते हुए हम ये सोचने पर मजबूर हो जाएं कि अब तक हम कैसे इसके बिना रह रहे थे. लेकिन इस बात को लेकर भी हमें सावधान रहना होगा कि ये चीन या अमेरिका द्वारा मैनेज न हो बल्कि हमारे खुद के द्वारा मैनेज किया जाए क्योंकि काफी मात्रा में डेटा का प्रयोग किया जाएगा जिसके लीक होने पर समस्या हो सकती है.

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