एक्सपर्ट्स की राय, पॉर्न से दुनिया को हो सकते हैं कई नुकसान!

रिसर्च के मुताबिक, ऑनलाइन वीडियो की वजह से हर साल करीब 30 करोड़ टन कार्बन का उत्सर्जन होता है और इसमें से एक तिहाई पोर्नोग्राफिक कंटेट की वजह से होता है.

News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 2:29 PM IST
एक्सपर्ट्स की राय, पॉर्न से दुनिया को हो सकते हैं कई नुकसान!
रिसर्च के मुताबिक, ऑनलाइन वीडियो की वजह से हर साल करीब 30 करोड़ टन कार्बन का उत्सर्जन होता है और इसमें से एक तिहाई पोर्नोग्राफिक कंटेट की वजह से होता है.
News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 2:29 PM IST
पॉर्न देखने से पर्यावरण को नुकसान हो सकता है, क्या आपने कभी ऐसा सोचा था! हाल ही में आई एक रिपोर्ट की मानें तो Porn देखने से पर्यावरण को हानि पहुंचती है. दरअसल, फ्रेंच थिंक टैंक 'द शिफ्ट' प्रोजेक्ट की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोपियन देश बेल्जियम अकेले जितना कार्बन डाईऑक्साइड (Co2) उत्सर्जित करता है उतना पूरी दुनिया में पोर्नोग्राफी की लाइव स्ट्रीमिंग से कार्बन एमिशन होता है. रिसर्च के मुताबिक, ऑनलाइन वीडियो की वजह से हर साल करीब 30 करोड़ टन कार्बन का उत्सर्जन होता है और इसमें से एक तिहाई पोर्नोग्राफिक कंटेट की वजह से होता है.

डिजिटल टेक्नॉलजी की वजह से होता है ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में रिसर्चर्स ने पता लगाया था कि डिजिटल टेक्नॉलजी की वजह से कुल 4 फीसदी ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन होता है और 2025 तक यह बढ़कर 8 फीसदी हो सकता है. रिसर्चर्स ने ऑनलाइन वीडियो को फोन और टीवी से लेकर दूसरे डिवाइसेज़ तक पहुंचाने में लगने वाली बिजली में उत्सर्जित होने वाले कार्बन डाईऑक्साइड के बारे में पता लगाया है.

रिसर्च का नेतृत्व करने वाले कंप्यूटर मॉडलिंग के जानकार इंजीनियर मैक्सिम एफू-हेस्स को पता लगा कि डिजिटल टेक्नॉलजी से होने वाले एनर्जी कंजंप्शन में सालाना 9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और दुनिया भर के डेटा फ्लो का 60 फीसदी ऑनलाइन वीडियो से आता है. इस रिपोर्ट में शामिल किए गए वीडियो में Skype और इसके जैसे दूसरे वीडियो स्ट्रीमिंग सर्विसेज को अलग रखा गया था. इनको शामिल करने से वर्ल्ड डेटा फ्लो 60 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो जाता.

हाई क्वालिटी वीडियो से होता है ज्यादा उत्सर्जन
रिसर्च के अनुसार हाई क्वालिटी रिज़ोल्यूशन वाले वीडियो आने से कार्बन उत्सर्जन और ज्यादा बढ़ने की संभावना है. वीडियो की लाइव स्ट्रीमिंग से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए द शिफ्ट प्रोजेक्ट ने कुछ सुझाव भी दिए हैं. सुझाव में कहा गया है कि ऑटो प्ले ऑप्शन को बंद करके रखना चाहिए और जब ज़रूरत हो तभी हाई रिज़ोल्यूशन वीडियो देखा जाए. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके लिए उचित नियम बनाना ज़रूरी है. रिसर्चर्स ने पूरी दुनिया में वीडियो के ट्रैफिक को जानने के लिए सिस्को और Sanvine द्वारा जारी किए गए साल 2018 की एक रिपोर्ट का भी सहारा लिया.

ये भी पढ़ें- ऑफिस में नहीं चला पाएंगे Facebook-WhatsApp! सोशल मीडिया को लेकर कड़ा निर्देश जारी
Loading...

ये भी पढ़ें- Flipkart Big Shopping Days: 275 रुपये से शुरू करें शॉपिंग, Smart TV पर 75% की छूट


 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए मोबाइल-टेक से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: July 15, 2019, 2:07 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...