कहीं आप illegal drugs का तो नहीं कर रहे हैं इस्तेमाल! जानिए कैसे Wearable करेगी आपकी सेहत की निगरानी?

New wearable sensor

New wearable sensor

साउथ कोरिया के रिसर्चर ने एक वियरेबल सेंसर (New wearable sensor) को सफलतापूर्वक डिवेलप किया है. यह नैनोमटेरियल्स तकनीक का उपयोग करके पसीने में अवैध दवाओं का पता लगा सकता है. साथ ही टेक्नोलजी फास्ट एंड हाई सेंसिटिव दवा का पता लगाने में भी सक्षम है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 11, 2021, 3:35 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. साउथ कोरिया के रिसर्चर ने एक वियरेबल सेंसर (New wearable sensor) को सफलतापूर्वक डिवेलप किया है. यह नैनोमटेरियल्स तकनीक का उपयोग करके पसीने में अवैध दवाओं ( illegal drugs) का पता लगा सकता है. साथ ही टेक्नोलजी फास्ट एंड हाई सेंसिटिव दवा का पता लगाने में भी सक्षम है. डॉ. हो सांग जंग के नेतृत्व वाली रिसर्च यूनिट, कोरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैटेरियल्स साइंस (KIMS),गवर्नमेंट फ़ंडेड रिसर्च इंस्टीट्यूट अंडर द मिनिस्टरी ऑफ साइन्स एंड ICT का हिस्सा है.

कैसे काम करता है यह तकनीक

पसीने के पैच को एक निश्चित समय के लिए त्वचा से जोड़ा जाता है और फिर टेस्टिंग के लिए लाइट के साथ रेडिएशन में एक्सपोज किया जाता है. इस वेयरबल सेंसर टेक्नोलजी के इस्तेमाल के दौरान जब एक बार पैच पसीने को सोख लेता है, तो पसीने में मौजूद नशीला पदार्थ वेयरबल सेंसर में प्रवेश कर जाता है और सिल्वर नैनोवायर तक पहुंच जाता है. पैच पर रमन लेजर को Irradiated करके, सेंसर को हटाए बिना वास्तविक समय में दवा का पता लगा लेता हैं. इस कार्य में बिना किसी एडिशनल प्रोसेस कर सकते हैं. इसमें केवल एक मिनट का समय लगता है.

यह भी पढ़ें- आपके फोन में आ रहा है Android का नेक्स्ट वर्जन, नहीं रहेगी प्राइवेसी की चिंता, जानिए इसके बारे में सबकुछ
यूरिन में ड्रग्स का पता लगाया जा सकता है!

ट्रेडिशनल ड्रग डिटेक्शन प्रोसेस में बालों, ब्लड और यूरिन सहित जैविक नमूनों से संदिग्ध ड्रग्स कोम्पोनेंट्स को निकालने की एक जटिल विधि की आवश्यकता होती है, और फिर गैस या लिक्विड क्रोमैटोग्राफी-मास स्पेक्ट्रोमेट्री (जीसी / एमएस या एलसी / एमएस) के माध्यम से दवाओं का विश्लेषण किया जाता है. इसमें अधिक समय लगता है और उपकरण और कुशल तकनीशियनों के लिए एक बड़े कमरे की आवश्यकता होती है. हालांकि, रैपिड किट यूरिन में ड्रग्स का पता लगा सकते हैं, लेकिन वे केवल सिंगल टेस्ट से सिंगल कॉम्पोनेंट का पता लगाते हैं और कम संवेदनशीलता वाले होते हैं.

किया जाता है एंटी-डोपिंग ड्रग टेस्टिंग..



एथलीटों के मामले में, ब्लड और यूरिन में निषिद्ध पदार्थों का पता लगाने के लिए एंटी-डोपिंग ड्रग परीक्षण किया जाता है. एथलेटिक्स प्रदर्शन में गिरावट के मामले में चिंताओं के कारण ब्लड टेस्टिंग से अक्सर बचा जाता है और यूरिन टेस्टिंग मानव अधिकारों का उल्लंघन कर सकता है क्योंकि टैस्टर को एथलीट के यूरिन का निरीक्षण करना होता है. ओलंपिक जैसे बड़े खेल आयोजनों के लिए सभी प्रतिभागियों का परीक्षण करना मुश्किल है.

यह भी पढ़ें- Royal Enfield खरीदने का है प्लान तो जल्दी करें, जल्द बढ़ सकती है कीमतें

सबस्टानसेज को किया जाता है पसीने में डिस्चार्ज

शोधकर्ताओं ने पसीने पर ध्यान केंद्रित किया जो आक्रामक नहीं है और मानव अधिकारों के मुद्दों से अपेक्षाकृत मुक्त है. केवल छोटी मात्रा में सबस्टानसेज को पसीने में डिस्चार्ज किया जाता है. स्वीट वैरियस ड्रग्स को कंटेन करती हैं इसलिए हाइली सेनसिटिव सेन्सर टेक्नालजी को डिवैलप करना एक बैटर डिटेकशन के लिए जरूरी था.

यह तकनीक सामाजिक समस्याओं जैसे नशीली दवाओं के वितरण और मशहूर हस्तियों के साथ दुर्व्यवहार, क्लबों में ड्रग के लेन-देन और एथलीटों द्वारा लिए गए प्रतिबंधित पदार्थ का पता लगाने में मदद कर सकती है. चूंकि उत्पादन लागत 50 सेंट प्रति पीस से कम है, इसलिए इसे ओलंपिक जैसे बड़े खेल आयोजनों के दौरान एक पूर्ण डोपिंग सर्वे के रूप में एंटि-डोपिंग प्रोग्राम के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज