Zero-Click Hacks: बिना कुछ किए आपका फोन हो जाएगा हैक.. पढ़िए कैसे काम करता है जीरो क्लिक हैक्स?

Zero-Click Hacks: इस आधुनिक हैकिंग प्रोसेस में आपके पास न कोई लिंक आएगा या मैसेज, अपने आप आपका फोन हैक हो जाएगा...

Zero-Click Hacks: इस आधुनिक हैकिंग प्रोसेस में आपके पास न कोई लिंक आएगा या मैसेज, अपने आप आपका फोन हैक हो जाएगा...

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    नई दिल्ली. Zero-Click Hacks (जीरो-क्लिक हैक्स) आजकल ये नाम काफी सुन रहें होंगे आप...लेकिन इसके बारे में जानते हैं कि ये क्या है और कैसे काम करता है? तो आपको बता दें ये डिवाइस पर क्लिक किए बिना हमला कर सकते हैं, इन्हें जीरो क्लिक अटैक कहा जाता है... चौंक गए ना...दरअसल, ये तकनीक नया रूप है जिसे आप साइबर सुरक्षा की दुनिया का विकास कह सकते हैं. जो इस वक्त साइबर की दुनिया में तेजी से अपना पैर पसार रहा है. जीरो-क्लिक हैक अब गुप्त एजेंटों और अवास्तविक प्लाट वाली विज्ञान-फाई फिल्मों के लिए नहीं हैं. साइबर सुरक्षा की दुनिया में विकास के आधार पर, शून्य-क्लिक हैक स्थिर गति से बढ़ रहे हैं. इस तरह के हमले आमतौर पर प्रकृति में बहुत अधिक हाई टारगेटेड होते हैं. इन हमलों के बड़े पैमाने पर परिणाम हो सकते हैं, जिससे आप यह जाने बिना कि पृष्ठभूमि में कुछ गड़बड़ है, आप अपने जीवन पर पूरा नियंत्रण खो देते हैं. तो आइए जानते हैं इसके बारे में सबकुछ...

    जानिए क्या है जीरो क्लिक हैक्स?
    जैसा कि नाम से पता चलता है कि बिना किसी क्विल के हैक. यानी कि किसी Call /SMS/ Link पर क्लिक किए बिना ही आपका फोन या आपका अकाउंट हैक हो सकता है. दरअसल, इसमें हैकर तकनीक की कमी का फायदा उठा कर आपके फोन में एंटर कर जाएंगे और आपको भनक तक नहीं होगा. पैगासस स्पायवेयर (Pegasus software) इसी तरह काम करता है. बता दें कि पेगासस एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो बिना सहमति के आपके फोन तक पहुंच हासिल करने और व्यक्तिगत और संवेदनशील जानकारी इकट्ठा कर जासूसी करने वाले यूज़र को देने के लिए बनाया गया है. यह आपके स्मार्टफोन या स्मार्ट डिवाइस में सेंधमारी के लिए फिशिंग मैसेज के हथकंडे से आगे निकल चुका है. Pegasus का आधुनिक अटैक कोई लिंक या मैसेज नहीं भेजता, जिस पर क्लिक करते ही मेलवेयर आपके डिवाइस में फैल जाता था. यानी यूजर्र को न मिस क़ॉल आती है, न मैसेज और न किसी तरह कोई लिंक.. पर वह हैकिंग के शिकार बन जाते हैं. स्पायवेयर से हमले की इसी तकनीक को जीरो क्लिक अटैक कहते हैं.

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    जानें कितना खतरनाक है यह
    बता दें कि यह तकनीक इतना खतरनाक है कि आपके द्वारा उपयोग किए जा रहे डिवाइस से बिना कुछ किए कोई भी साइबर हमला हो सकता है. चाहे वह आईओएस (ios) या एंड्रॉइड (Android) हो या फिर विंडोज या मैकओएस (Windows or macOS). इस पर बड़ी-बड़ी क्लाउड कंपनियां भी अपने सर्वर को ऐसे हमलों से बचाने में जुटी हैं. इसमें एपल से गूगल तक की कंपनियां शामिल हैं. जो इस साइबर खतरे से बचने और सुरक्षित रहने की तैयारी कर रही है. वहीं, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन वेब सर्विसेज ने मेलवेयर को ब्लॉक करने के लिए कई कदम उठाए हैं.

    जीरो क्लिक हैक्स कैसे काम करते हैं?
    उदाहरण के लिए, साल 2019 का वाॅट्सऐप नियम उल्लंघन को देख सकते हैं. जो एक मिस्ड कॉल द्वारा ट्रिगर किया गया था. यह हमला एक मिस्ड कॉल ट्रिक से किया गया है. अब आपको कोई भी मिस्ड कॉल कर सकता है इसे आप रोक तो नहीं सकते हैं. बस इसी तरह जीरो क्लिक हैक काम करता है. बता दें कि मिस्ड कॉल ट्रिक ने दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप वाॅट्सएप के सोर्स कोड फ्रेमवर्क में एक खामी का फायदा उठाया था. हमलावर को मिस्ड कॉल के कारण दो उपकरणों के बीच डेटा एक्सचेंज में स्पाइवेयर लोड करने की अनुमति मिल गई थी. एक बार लोड हो जाने पर, स्पाइवेयर अपने आप ही एक पृष्ठभूमि संसाधन के रूप में सक्षम हो जाएगा. जो आपके डिवाइस के सॉफ़्टवेयर ढांचे के अंदर गहराई से एम्बेडेड हो जाएगा.

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    इनसे बचने के लिए क्या करें?
    मोबाइल वैरिफिकेशन टूलकिट (MVT) का उद्देश्य यह पहचानने में मदद करना है कि पेगासस ने डिवाइस को संक्रमित किया है या नहीं. यूं तो यह Android और iOS दोनों डिवाइसों पर काम करता है, लेकिन इसके लिए कुछ कमांड लाइन नॉलेज की आवश्यकता होती है. MVT के समय के साथ ग्राफिकल यूज़र इंटरफेस (GUI) प्राप्त करने की उम्मीद भी है, जिसके बाद इसे समझना और चलाना आसान हो जाएगा.इसके अलावा आप अपने डिवाइस और सॉफ्टवेयर को अप टु डेट रखें. अपनी सेटिंग में जाकर automatic updates को एक्टिवेट कर दें. अपने डिवाइस, साइट और हर ऐप के लिए ऐसा अनोखा पासवर्ड रखें जिनका अनुमान लगाना बेहद कठिन हो. जहां-जहां संभव हो टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन (two-factor authentication) को चालू कर दें.

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