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Wi-Fi की नई तकनीक : अब एक किलोमीटर दूर भी कनेक्शन पकड़ेंगे डिवाइस

Wi-Fi की नई तकनीक : अब एक किलोमीटर दूर भी कनेक्शन पकड़ेंगे डिवाइस

वाई-फाई की नई टेक्नोलॉजी वाई-फाई हैलो (WiFi HaLow) के लॉन्च होने के बाद बहुत कुछ बदल जाएगा.

वाई-फाई की नई टेक्नोलॉजी वाई-फाई हैलो (WiFi HaLow) के लॉन्च होने के बाद बहुत कुछ बदल जाएगा.

वाई-फाई की नई टेक्नोलॉजी वाई-फाई हैलो (WiFi HaLow) के लॉन्च होने के बाद बहुत कुछ बदल जाएगा. इस नई तकनीक से वाई-फाई की रेंज कुछ मीटर न रहकर, एक किलोमीटर तक हो जाएगी. बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के अनुसार, वाई-फाई अलांयस (Wi-Fi Alliance) द्वारा इस तकनीक को डेवलप किया जा रहा है. इसके डेटा ट्रांसफर की स्पीड सामान्य वाई-फाई के मुकाबले कम हो सकती है. हालांकि, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डिवाइसेज़ को अल्ट्रा-फास्ट वाई-फाई स्पीड की आवश्यकता नहीं होती है और कम स्पीड के साथ भी वे ठीक से काम कर सकते हैं.

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    नई दिल्ली. जल्द ही वाई-फाई भी हाई-फाई होने वाला है. वाई-फाई की नई टेक्नोलॉजी वाई-फाई हैलो (WiFi HaLow) के लॉन्च होने के बाद बहुत कुछ बदल जाएगा. इस नई तकनीक से वाई-फाई की रेंज कुछ मीटर न रहकर, एक किलोमीटर तक हो जाएगी. बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के अनुसार, वाई-फाई अलांयस (Wi-Fi Alliance) द्वारा इस तकनीक को डेवलप किया जा रहा है. Wi-Fi Alliance वाई-फाई टेक्नोलॉजी पर काम करने वाली कंपनियों का एक नेटवर्क है. HaLow को लो-पावर और हाई-रेंज के उद्देश्य से विकसित किया गया है.

    वाई-फाई हैलो को इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) पर फोकस करते हुए तैयार किया जा रहा है. वाई-फाई हैलो का उद्देश्य औद्योगिक, कृषि, स्मार्ट बिल्डिंग और स्मार्ट सिटी वातावरण में उपयोग के मामलों को सक्षम करना है.

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    वाई-फाई हैलो में क्या है खास
    वाई-फाई अलायंस का दावा है कि वाई-फाई हैलो वायरलेस कनेक्टिविटी के लिए अधिक व्यापक दृष्टिकोण अपनाता है. इसकी रेंज अधिक है, लगभग एक किलोमीटर. यह चुनौतीपूर्ण वातावरण जैसे कि दीवारों या अन्य बाधाओं को भेदने की बेहतर क्षमता रखता है. ये वाई-फाई यूजर्स के बेहतर कनेक्शन प्रदान करने का दावा करती है.

    मौजूदा वाई-फाई तकनीक बैंडविड्थ के मामले में 2.4Ghz से 5Ghz स्पेक्ट्रम पर काम करती है. वही, वाई-फाई हैलो को 1Ghz से कम स्पेक्ट्रम पर काम करने के लिए विकसित किया गया है, जिसका अर्थ है कि यह कम बिजली की खपत करेगा. इसके अलावा, ये तकनीक लो फ्रिक्वेंसी (Low Frequency) में भी लंबी दूरी पर डेटा ट्रांसमिट करने की क्षमता रखती है.

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    स्पीड में फर्क होगा
    जी हां. इसके डेटा ट्रांसफर की स्पीड सामान्य वाई-फाई के मुकाबले कम हो सकती है. इसके कम होने की वजह इसका स्पेक्ट्रम है, जोकि कम है. हालांकि, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डिवाइसेज़ और प्रोडक्ट्स को अल्ट्रा-फास्ट वाई-फाई स्पीड की आवश्यकता नहीं होती है और कम डेटा स्पीड के साथ भी वे ठीक से काम कर सकते हैं.

    कब तक लॉन्च होगी ये तकनीक
    अभी तक, वाई-फाई हैलो की कोई स्पष्ट लॉन्च टाइमलाइन नहीं है. वाई-फाई अलायंस ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि वह 2021 की चौथी तिमाही में डिवाइस सर्टिफिकेशन शुरू करने की उम्मीद करते हैं, जिसका अर्थ है कि अगले साल तकनीक उपयोग के लिए उपलब्ध हो सकती है.

    Tags: 4G network, 5G Technology, Broadband Connection, Technology

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