लाइव टीवी

WhatsApp, Facebook पर है सरकार की नजर, जल्द लगेगी लगाम

News18Hindi
Updated: October 9, 2019, 12:52 PM IST
WhatsApp, Facebook पर है सरकार की नजर, जल्द लगेगी लगाम
व्हाट्सऐप

TRAI ने ओवर द टॉप (OTT) सर्विस प्रोवाइडर्स को रेगुलेट करने को लेकर डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्यूनिकेशंस (DoT) को सुझाव दिए हैं

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 9, 2019, 12:52 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली: व्हाट्सऐप, फेसबुक, गूगल व अन्य 'ओवर द टॉप' (OTT) प्लेटफॉर्म्स टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के रेडार पर हैं. TRAI ने ओवर द टॉप (OTT) सर्विस प्रोवाइडर्स को रेगुलेट करने को लेकर डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्यूनिकेशन (DoT) को सुझाव दिए हैं. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, डिओटी अगर इन सुझावों को मान लेता है तो WhatsApp, Facebook, Google जैसी इंटरनेट के सहारे विविध सेवाएं देने वाली कंपनियां (OTT) कानून के दायरे में आ जाएंगी. नियमों में मुख्य तौर पर सुरक्षा और वैध रूप से दखल देने पर जोर दिया जा रहा है.

क्या है ओटीटी
'ओवर द टॉप' सर्विस प्रोवाइडर्स या ओटीटी कंपनियां वो होती हैं, जो दूरसंचार नेटवर्क कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले इंटरनेट के सहारे अपनी सेवाएं देती हैं. इनमें स्काइप, वाइबर, व्हाट्सएप, हाइक, स्नैपचैट जैसी मैसेजिंग और इंटरनेट फोन सेवाएं देने वाली विभिन्न कंपनियां शामिल हैं. इसके अलावा ऑनलाइन एंटरटेनमेंट प्रदान करने वाली नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, हॉटस्टार, जी5 और आल्ट बालाजी इत्यादि भी ओटीटी का हिस्सा हैं.

अभी लग सकता है और समय

ओटीटी के लिए नियमों को अंतिम रूप देने में ट्राई को एक महीने का अतिरिक्त समय लग सकता है. ट्राई इस संबंध में ओटीटी पर अंतरराष्ट्रीय नियम-विनियम को देख रहा है. उसका विशेष ध्यान सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर है. ट्राई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ओटीटी पर नियम बनाने को लेकर नियामक ‘व्यावहारिक धारणा’ अपनाने के पक्ष में है.

ओटीटी नियमों में सुरक्षा बड़ा मुद्दा
हालांकि ओटीटी के उपयोग से दूरसंचार सेवाप्रदाताओं को भी लाभ हुआ है, क्योंकि लोगों का इंटरनेट उपभोग बढ़ा है. ऐसे में दूरसंचार कंपनियों का इनके मुफ्त सेवाएं देने का तर्क बहुत ज्यादा मान्य नहीं रह गया है. अधिकारी ने कहा कि ऐसे में ओटीटी नियमों के बारे में आर्थिक पक्ष उतना महत्वपूर्ण नहीं रह गया है. उन्होंने कहा, 'अब ओटीटी नियमों में सुरक्षा बड़ा मुद्दा बन गया है. बड़ा सवाल अब ये है कि सुरक्षा चिंताओं का समाधान कैसे किया जाना है, अन्य देश सुरक्षा संबंधी चिंताओं से कैसे निपट रहे हैं, नियमों से जुड़ी समस्या अब सीमित हो चुकी है और अब यह उतनी जटिल और बड़ी नहीं है जितनी पहले थी.'
Loading...

ट्राई ने पिछले साल ओटीटी कंपनियों को नियामकीय ढांचे के दायरे में लाने के लिए एक परिचर्चा पत्र पेश किया था. बाद में इनमें से कई मंच सरकार की निगरानी के दायरे में आ गए और सरकार का सूचना प्रौद्योगिकी कानूनों में भी बदलाव का प्रस्ताव है ताकि इन कंपनियों के लिए बेहतर जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके.

(भाषा से इनपुट)

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए ऐप्स से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 8, 2019, 12:30 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...